रात 11 बजते ही स्मार्ट रोडों की बत्ती गुल, ननि और स्मार्टसिटी एक-दूसरे को बता रहे जिम्मेदार
अंधेरे में आवाजाही से हादसे और अपराध का डर

सागर। शहर को स्मार्ट बताने के दावों के बीच सागर के प्रमुख सड़कों पर रात होते ही अंधेरे का खौफ पसर जाता है। शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाले व्यस्ततम मार्गों की स्ट्रीट लाइटें और चौराहों पर लगी हाई मास्ट लाइटें हर रात ठीक 11 बजे अचानक बंद हो जाती हैं। इसके बाद जो अंधेरा होता है, वह राहगीरों के लिए किसी बड़े हादसे या अपराध का सबब बन सकता है। शहर के व्यवसायिक और संवेदनशील इलाकों में होने वाले इस घुप अंधेरे को लेकर जब ‘सागरवाणी’ ने स्ट्रीट लाइट के मेंटेनेंस के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार सागर स्मार्ट सिटी कंपनी लिमिटेड के एई अभिषेक सिंह से जानकारी ली, तो उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत काम से आउट ऑफ स्टेशन हैं और वैसे भी इन लाइट्स व हाई मास्ट के रख-रखाव की जिम्मेदारी अब नगर निगम को सुपुर्द कर दी गई है। वहीं दूसरी तरफ, जब नगर निगम के पीआरओ अभिषेक गुप्ता को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया गया, तो उन्होंने संबंधित अधिकारी से जवाब लेकर स्पष्ट किया कि स्ट्रीट लाइट्स और हाई मास्ट के मेंटेनेंस का जिम्मा अभी भी पूरी तरह से स्मार्ट सिटी के पास ही है। कुल मिलाकर, शहर को अंधकार में धकेलकर दोनों ही जिम्मेदार एजेंसियां इस बड़ी समस्या को लेकर गेंद एक-दूसरे के पाले में डाल रही हैं।
प्रमुख मार्गों पर पसरा सन्नाटा भगवान भरोसे राहगीर
स्ट्रीट लाइट के बंद होने का यह सिलसिला शहर के दिल कहे जाने वाले कटरा जामा मस्जिद से लेकर वन-वे रोड तक हर रात देखा जा सकता है। इतना ही नहीं, तीन मढ़िया चौराहे पर लगी हाई मास्ट लाइट और मुख्य बस स्टैंड से लेकर जिला अस्पताल और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज तक का पूरा रास्ता 11 बजते ही काली चादर ओढ़ लेता है। इन रास्तों पर चौबीसों घंटे लोगों की आवाजाही रहती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण यहां से गुजरने वाले लोग खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
मरीजों के परिजन और स्थानीय निवासियों ने बयां किया दर्द
रात 11 बजे के बाद पसरे इस अंधेरे को लेकर जब जनता से बात की गई, तो चौंकाने वाले अनुभव सामने आए। बीएमसी केअस्पताल में भर्ती मरीज के परिजन महेश साहू बोले कि “मेरा भाई जिला अस्पताल में भर्ती है। रात को जब उसे दवाइयां या कोई जरूरी सामान पहुंचाने तिली रोड पर निकलता हूं तो इस सड़क पर इतना अंधेरा रहता है कि वाहन को जरूरत से ज्यादा धीमा व बचते-बचाते चलाना पड़ता। आवारा मवेशी सड़क पर बैठे रहते हैं, जिनसे टकराने का डर हर वक्त बना रहता है।” तिली क्षेत्र के निवासी राकेश शर्मा ने कहा कि तिली क्षेत्र मेडिकल हब बन चुका है, यहां बीएमसी और कई निजी अस्पताल हैं। रात 11 बजे लाइट बंद होने के बाद सड़कें सूनी हो जाती हैं। अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं, जिससे यहां रहने वालों और रात में आने-जाने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षा का बड़ा खतरा खड़ा हो गया है। वहीं ऑटो चालक अकरम खान ने कहा कि बस स्टैंड से रात के वक्त जब हम सवारियां लेकर निकलते हैं, तो तीन मढ़िया और बीएमसी रोड पर कुछ दिखाई नहीं देता। अगर कोई राहगीर पैदल चल रहा हो, तो वह तब तक नहीं दिखता जब तक ऑटो की लाइट उस पर न पड़े। यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
सागरवाणी….9425172417



