बम्हौरी तिराहा से सदर होकर गढ़पहरा तक बनेगी 66 करोड़ की फोरलेन सड़क
शहर को भी यातायात के दबाव से मिलेगी राहत

सागर। शहर के यातायात को एक नई दिशा देने और राष्ट्रीय राजमार्गों से कनेक्टिविटी को सुगम बनाने की दिशा में सागरवासियों को एक बड़ी सौगात मिली है। बम्हौरी तिराहा से गढ़पहरा रैयतवारी तक बनने वाली महत्वाकांक्षी फोरलेन सड़क योजना को प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है। नरयावली से वरिष्ठ विधायक प्रदीप लारिया की निरंतर मांग और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखा दी है। लगभग 22 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण पर 66 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसकी स्वीकृति मिलते ही विभाग अब जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। यह फोरलेन मार्ग बम्हौरी तिराहा से शुरू होकर सिरोंजा और मकरोनिया चौराहा को क्रॉस करते हुए आनंद नगर व रजाखेड़ी के रास्ते आगे बढ़ेगा। इसके बाद सड़क श्री परेड हनुमान मंदिर के सामने से गुजरते हुए सदर कबूला पुल तक पहुंचेगी। यहाँ से स्व. हरनाम सिंह राठौर के बंगले के सामने और गढ़पहरा रैयतवारी गांव से होकर यह मार्ग सीधे झांसी-लखनादौन राष्ट्रीय राजमार्ग में जाकर मिल जाएगा। इसके अलावा, पीडब्ल्यूडी सड़क के दूसरे छोर को उद्योगपति गजेंद्र सिंह राठौर के निवास के पास से गुजरने वाले मार्ग से जोड़कर फोरलेन में मर्ज करने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है।
शहर को भी यातायात के दबाव से मिलेगी राहत
वरिष्ठ विधायक लारिया का कहना है कि इस फोरलेन सड़क के निर्माण से सागर शहर के भीतर वाहनों का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। वर्तमान में नरसिंहपुर की ओर से आने वाले भारी और हल्के वाहनों को झांसी, बीना या भोपाल जाने के लिए शहर के घने ट्रैफिक से गुजरना पड़ता है। वाहन चालकों को मजबूरी में राजघाट तिराहा, धर्मश्री, मोतीनगर तिराहा अथवा विश्वविद्यालय और सिविल लाइन मार्ग से होकर जाना पड़ता है, जिससे अक्सर शहर के मुख्य चौराहों पर जाम की स्थिति बनी रहती है।
वैकल्पिक रूट से समय और ईंधन की बचत
इस नए फोरलेन रूट के चालू हो जाने से नरसिंहपुर से झांसी जाने वाले यात्रियों को शहर के बाहर से ही एक शानदार और सीधा वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगा। वहीं, बीना और भोपाल की ओर यात्रा करने वाले लोगों के लिए भी भैंसा नाका तक बिना किसी रुकावट के फोरलेन मार्ग की सुविधा उपलब्ध होगी। पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री (ईई) साहित्य तिवारी के अनुसार, प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद अब तकनीकी औपचारिकताएं और टेंडर प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएंगी, ताकि धरातल पर निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके। इस फोरलेन के बनने से न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि सागर के शहरी विस्तार और व्यावसायिक गतिविधियों को भी एक नई रफ्तार मिलेगी।
प्रतीकात्मक फोटो



