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सागर की क्रिकेट में करप्सन: सागर डिविजन के चेयरमैन रिटा. प्रो. पित्रे और सचिव पुष्पेंद्रसिंह बाहर

एमपीसीए की 55 पन्नों की रिपोर्ट में सागर की क्रिकेट में काली कमाई और धांधली साबित

सागर। मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) ने सागर डिवीजनल क्रिकेट एसोसिएशन (SDCA) में लंबे समय से जारी भ्रष्टाचार और मनमानी पर कड़ा प्रहार किया है। शिकायतों की जांच के बाद, MPCA ने SDCA के चेयरमैन रिटा. प्रो. केएस पित्रे और सचिव पुष्पेंद्रसिंह (रॉकी) से ‘बलपूर्वक’ इस्तीफा ले लिया है। दोनों को 3 साल के लिए क्रिकेट की किसी भी गतिविधि से प्रतिबंधित कर दिया गया है। जांच में साफ हुआ है कि प्रतिभाओं को निखारने के लिए बनी संस्था को इन पदाधिकारियों ने अपनी निजी जागीर और अवैध कमाई का अड्डा बना लिया था। 55 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट में जालसाजी, गबन, डराना-धमकाना और संस्था को कमजोर करने के आरोप साबित हुए हैं। इंदौर स्थित MPCA मुख्यालय द्वारा गठित जांच कमेटी, जिसमें सुधीर असनानी, संजीव दुआ, अरुंधति किरकिरे, दिलीप चुडगर और रोहित पंडित ने मामले की गहन जांच की।

4 दिन में इस्तीफे का अल्टीमेटम, 3 साल “नो एंट्री”

​जांच कमेटी ने रिपोर्ट जारी कर पित्रे और रॉकी को 4 दिन के भीतर इस्तीफा देने का फरमान सुनाया। चेतावनी दी गई थी कि यदि वे इस्तीफा नहीं देते, तो SDCA की पूरी मैनेजिंग कमेटी को भंग कर दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि पित्रे और रॉकी ने MPCA सचिव असनानी से फैसले को कुछ दिन टालने की गुहार भी लगाई, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली। परिणामस्वरूप, उन्हें इसी सप्ताह इस्तीफा दे दिया। ​समिति ने दोनों को अगले 3 सालों तक MPCA के किसी भी स्तर पर सदस्य बनने या आधिकारिक तौर पर क्रिकेट गतिविधियों में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया है। उन्हें तत्काल एसोसिएशन के सभी रजिस्टर, चाबियां और संपत्ति को सरेंडर करने के लिए भी कहा गया है।

कोच और सचिव की मिलीभगत से फीस की धांधली

​जांच में सामने आया है कि कोच रेहान तारिक ने सचिव रॉकी की शह पर क्रिकेट खिलाड़ियों से 4.90 लाख रुपये की नकद फीस वसूली, जो कई महीनों तक SDCA के बैंक खाते में जमा नहीं हुई। नियमतः फीस काउंटर पर जमा होनी चाहिए थी। हैरानी की बात है कि रॉकी ने खुद इस धांधली की शिकायत की थी, लेकिन जांच में यह खुलासा हुआ कि तारिक, रॉकी के कहने पर ही फीस वसूल रहे थे। उन्होंने बाद में संस्था के खर्च के नाम पर कुछ राशि दिखाते हुए 4.50 लाख रुपये बैंक में जमा कराए। जांच कमेटी ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि चेयरमैन प्रो. पित्रे और सचिव रॉकी ने जानबूझकर इस पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे स्पष्ट है कि वे वित्तीय अनियमितता करने वालों को संरक्षण दे रहे थे।शिकायत करने की बात करने वाले खिलाड़ियों को भी एकेडमी से बाहर करने की धमकियां दी गईं।

मिनट बुक में ओवरराइटिंग, व्हाइटनर का ‘खेल’ और स्पॉन्सरशिप से इनकार

​कमेटी ने पाया कि सचिव रॉकी ने एक कर्मचारी का वेतन इसलिए रोका, क्योंकि उसने उनकी वित्तीय अनियमितताओं का विरोध किया था। MPCA ने जब पिछली बैठकों की ‘मिनट बुक’ मंगवाई, तो उसमें भारी गड़बड़ी मिली। वेतन वृद्धि से संबंधित पन्नों पर व्हाइटनर लगाया गया था और अंकों पर ओवरराइटिंग की गई थी। इतना ही नहीं, टीकमगढ़ के एक खेल प्रेमी द्वारा अंडर-22 टीम को मुफ्त स्पोर्ट्स किट देने की पेशकश को भी सचिव रॉकी ने न केवल ठुकरा दिया, बल्कि प्रस्ताव लाने वाले सदस्य सजल सक्सेना को अनुशासनहीनता का नोटिस जारी कर दिया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ये नोटिस और पत्र ‘बैक-डेट’ में तैयार किए गए थे ताकि जांच समिति को गुमराह किया जा सके।

बैठकें टालकर कार्यकाल बढ़ाना और ‘राधिका बोर्डिंग’ का रोका गया भुगतान

​रिपोर्ट के अनुसार, एसडीसीए के बैंक खातों का संचालन नियमों के विपरीत किया जा रहा था। चेयरमैन ने मनमानी करते हुए सचिव व अध्यक्ष की जगह अपना नाम जुड़वा लिया और कोषाध्यक्ष के साथ मिलकर वित्तीय कामकाज किया। मैनेजिंग कमेटी की वार्षिक बैठकें भी दो साल से नहीं बुलाई गईं, ताकि ये पदाधिकारी अपना कार्यकाल बढ़ा सकें। उदाहरण के लिए, 2025 की बैठक हुई ही नहीं और जनवरी में बुलाई गई 2026 की बैठक में विवाद होने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया, जो आज तक नहीं हुई। जांच कमेटी ने यह भी पाया कि पदाधिकारियों ने संस्थान के वेंडरों के साथ भी वित्तीय दुर्व्यवहार किया। निजी दुश्मनी के चलते सचिव रॉकी ने ‘राधिका बोर्डिंग’ नाम के एक वेंडर का भुगतान रोक दिया था। जांच समिति ने इस भुगतान को तत्काल जारी करने की सिफारिश की है।

06/04/2026…..9425172417

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