जबलपुर लोकायुक्त का ‘इंस्टेंट एक्शन’, आरटीओ आरक्षक और प्राइवेट कर्मचारी रंगे हाथ गिरफ्तार

सागर/जबलपुर। भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए जबलपुर लोकायुक्त इकाई ने बुधवार को एक बड़ी और चौंकाने वाली ‘ट्रेप’ कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देशों और डीआईजी मनोज सिंह के मार्गदर्शन में टीम ने जबलपुर-नागपुर हाईवे (बरगी) पर जाल बिछाकर आरटीओ आरक्षक श्वेता अहिरवार और उसके निजी साथी मोहित साहू को 4500 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों धर दबोचा।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता प्रशांत दत्तात्रेय जाधव (नवी मुंबई), जिनकी गाड़ियां बरगी के रास्ते उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में जाती हैं, ने लोकायुक्त को सूचना दी थी कि उनकी गाड़ी (DD 01P 09764) को निकालने के बदले आरक्षक श्वेता अहिरवार और मोहित साहू ने अवैध वसूली की मांग की है। वाहन चालक जय सिंह यादव के माध्यम से जब यह राशि दी जा रही थी, तभी पहले से घात लगाए बैठी लोकायुक्त टीम ने आरोपियों को दबोच लिया।
वर्किंग आवर्स में लोकायुक्त का ‘इंस्टेंट एक्शन’
इस मामले का सबसे उल्लेखनीय पहलू लोकायुक्त पुलिस की ‘बुलेट स्पीड’ रही। आमतौर पर रिश्वत की शिकायत के सत्यापन और ट्रेप की तैयारी में कम से कम 24 घंटे का समय लगता है, लेकिन इस केस में लोकायुक्त ने ‘इंस्टेंट एक्शन’ मोड में काम किया। शिकायत मिलने के बाद उसी दिन, वर्किंग आवर्स के भीतर ही पूरी प्रक्रिया को अंजाम देकर आरोपियों को दबोच लिया।
चर्चा में आरटीओ और लोकायुक्त का ‘कनेक्शन’
इस कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि वर्तमान में जबलपुर आरटीओ के पद पर रिंकू शर्मा पदस्थ हैं। श्रीमती शर्मा करीब दो माह पहले ही नर्मदापुरम से स्थानांतरित होकर जबलपुर आई हैं। खास बात यह है कि वे सागर में पदस्थ लोकायुक्त पुलिस के जोनल एसपी योगेश्वर शर्मा की पत्नी हैं। पति की ही विभाग की इकाई द्वारा पत्नी के विभाग (आरटीओ) के कर्मचारियों पर इस तरह की त्वरित कार्रवाई करना चर्चा का विषय बना हुआ है। उक्त कार्रवाई में निरीक्षक राहुल गजभिए, शशि मर्सकोले, बृजमोहन सिंह नरवरिया और जितेंद्र यादव के दल ने आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधन 2018) की धारा-7, 12, 13(1)B और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया है।
-9425172417



