
सागर। मध्य प्रदेश का सागर शहर अब अंतर्राज्यीय साइबर अपराधियों के निशाने पर है। हाल ही में बिहार में हुए एक बड़े साइबर फ्रॉड के तार सागर से जुड़ने के बाद सनसनी फैल गई है। ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म के नाम पर बैंक खातों की खरीद-फरोख्त और फिर उनके जरिए मासूमों को ठगने का एक संगठित गोरखधंधा सामने आया है। इस मामले की जांच के सिलसिले में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साइबर शाखा की एक विशेष टीम ने सागर के मोतीनगर थाना क्षेत्र में दबिश दी।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सागर के तौफीक नाम के एक युवक को उसके ही परिचितों ने झांसे में लिया। तौफीक से उसके परिचित दो-तीन लड़कों ने एक्सिस बैंक का चालू खाता खरीदा, जिसके बदले उसे 20 हजार रुपये का लालच दिया गया। तौफीक को बताया गया था कि इस खाते का उपयोग ऑनलाइन मार्केटिंग साइट ‘मीसो’ पर व्यापारिक लेन-देन के लिए किया जाएगा। जांच में खुलासा हुआ कि तौफीक से यह अकाउंट फैजान लाला ने लिया और उसे इब्राहिम और अरबाज को दे दिया। इन लोगों ने अप्रैल में पुणे (महाराष्ट्र) जाकर ये एकाउंट किसी बड़े साइबर ठग गिरोह को बेच दिया।
इस एक अकेले खाते का इस्तेमाल कर देश के करीब डेढ़ दर्जन राज्यों में साइबर ठगी को अंजाम दिया गया। मुजफ्फरपुर के एक स्थानीय युवक से इसी खाते के जरिए एक लाख रुपये से अधिक की ठगी की गई थी, जिसकी कड़ी जोड़ते हुए बिहार पुलिस सागर पहुंची। फिलहाल, पुलिस ने तौफीक से पूछताछ कर उसे नोटिस थमाया है, लेकिन यह मामला एक बड़ी मॉडस आपरेंडी की ओर इशारा करता है।
कैसे काम करता है बैंक अकाउंट स्कैम?
साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। ठग सीधे अपने खातों में पैसे मंगाने के बजाय गरीब या लालची लोगों से चंद रुपयों में उनके खाते और एटीएम कार्ड खरीद लेते हैं। इन खातों का उपयोग ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह घुमाने के लिए किया जाता है ताकि पुलिस की मुख्य जांच भटक जाए। अक्सर अपराधी इन खातों को ई-कॉमर्स साइट्स के ‘सेलर अकाउंट’ से जोड़ देते हैं, जिससे लेन-देन वैध प्रतीत होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अपना बैंक खाता या ओटीपी किसी को भी बेचना या किराए पर देना कानूनी अपराध है। भले ही खाताधारक को ठगी की जानकारी न हो, लेकिन खाते का उपयोग अपराध में होने पर मुख्य जिम्मेदारी खाताधारक की ही तय होती है। बिहार पुलिस की इस कार्रवाई ने सागर में सक्रिय उन बिचौलियों की पोल खोल दी है जो स्थानीय युवाओं को गुमराह कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय ठगों का मोहरा बना रहे हैं। फिलहाल मोतीनगर पुलिस और बिहार साइबर सेल इस गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है।
27/03/2026



