खबरों की खबर
Trending

शराब दुकान: दिग्गज ठेकेदार फर्म रही सागर कंपनी का खाता खुला, सिविल लाइंस मिली

जहां-जहां आबकारी अमला दुकानें चला रहा, वहां अवैध शराब बिकने का संदेह!

  • सागर। जिले में शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। आबकारी विभाग की इस गहमागहमी के बीच 14 में से 10 दुकानों का आवंटन लगभग तय हो गया है। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा चर्चा जिले की दिग्गज आबकारी फर्म ‘सागर कंपनी’ की वापसी को लेकर है। शासन ने उन उच्चतम बोलीकर्ताओं को प्राथमिकता दी है, जिन्होंने पिछली नीलामी की तुलना में 70 प्रतिशत से अधिक की बोली लगाई थी।

संजीव साहू के हाथ लगी 14 करोड़ वाली दुकान

​खबरों के मुताबिक, सागर कंपनी की ओर से संजीव साहू ने 11.30 करोड़ रुपए की बोली लगाकर एक प्रमुख दुकान अपने नाम की है, जिसकी आरक्षित कीमत 14.22 करोड़ रुपए से अधिक थी। इसके अलावा:

  • राहतगढ़ (दुकान नं. 1 व 2): शर्मा एसोसिएट्स को मिली।
  • बीना-इटावा और जवाहरगंज: वंशिका ट्रेडर्स के खाते में गई।
  • गुरु गोविंद सिंह वार्ड व बलेह: जंडेल सिंह गुर्जर और डीसीआर को आवंटित।
  • रहली-दो: सोनू प्रजापति के नाम रही, जबकि रहली-एक की नीलामी फिलहाल पेंडिंग है।

​वहीं, रेलवे स्टेशन के सामने स्थित बहुचर्चित गुजराती बाजार दुकान के लिए केएसआर ग्रुप की बोली सबसे ऊंची रही है। हालांकि, कर्रापुर, जमुनिया और गढ़ाकोटा जैसी कुछ जगहों पर बोलियां आरक्षित मूल्य से 50-80% तक कम रहीं, जिसके चलते यहां दोबारा नीलामी की नौबत आ सकती है।

क्या आबकारी की आड़ में बिक रही ‘अवैध’ शराब?

​एक तरफ नीलामी का शोर है, तो दूसरी तरफ विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। जब तक इन दुकानों का संचालन आबकारी अमले के हाथ में रहा, वहां बिक्री के आंकड़े अचानक गिर गए। गुजराती बाजार और मधुकरशाह वार्ड जैसी दुकानों में बिक्री सामान्य से आधी रह गई है। जानकारों का आरोप है कि यह ‘अमले की मिलीभगत से अवैध शराब की बिक्री’ का नतीजा हो सकता है।

​हालांकि, आबकारी एसआई सियाराम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि, “स्टॉक में ब्रांड और फ्लेवर की कमी के कारण ग्राहक कम हुए हैं। ठेकेदारों को हैंडओवर मिलते ही बिक्री फिर से बढ़ जाएगी।”

वेयरहाउस में ‘सिंडिकेट’ और अवैध वसूली का खेल

​नीलामी के बीच छोटे और मंझोले ठेकेदारों ने बहेरिया तिराहा स्थित सरकारी वेयरहाउस (बॉन्ड) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ठेकेदारों का कहना है कि,

  1. भेदभाव: बड़े ठेकेदारों को स्टॉक अपडेट की जानकारी पहले ही दे दी जाती है, जिससे वे पूरा माल बुक कर लेते हैं।
  2. शॉर्टेज: छोटे ठेकेदारों को बीयर और स्प्रिट के लिए तरसाया जा रहा है।
  3. अवैध वसूली: प्रति पेटी 10 रुपए ‘ढुलाई’ के नाम पर नकद वसूले जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।इस संबंध में सागरवाणी ने बांड की प्रभारी सीनियर एसआई मंजूषा सोनी से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि ये आरोप सही नहीं हैं। 1 अप्रैल से बीयर का स्टॉक ही नहीं हैं। फिर भेद भाव की बात ही नहीं रह जाती। रही बात लेबर के 10 रु. पेटी का तो यह राशि मजदूरों को दी जाती है। प्रदेश के अन्य बांड में यह चार्ज 10-15 रुपए तक है।

04/03/2026….9425172417

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!