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आबकारी टेंडर : अफसर की उदासीनता बनाम 5 दिन में 50 दुकानों की नीलामी की चुनौती

कीमतें घटाने के बाद अब एक- एक दुकान नीलाम करने की तैयारी

सागर। जिले में शराब दुकानों की नीलामी को लेकर आबकारी विभाग की स्थिति ‘ढाक के तीन पात’ वाली बनी हुई है। विभाग ने ठेकेदारों को लुभाने के लिए दुकानों की आरक्षित कीमत में 10% की कटौती भी की, लेकिन इसके बावजूद जिले की 50 दुकानें अब तक नीलाम नहीं हो पाई हैं। सातवें चरण की मशक्कत के बाद मंगलवार को बमुश्किल दो समूह—कटरा (रवि घोषी एंड कंपनी) और खुरई (जंडेल सिंह गुर्जर एंड कंपनी)—ही नीलाम हो सके। अब हार मानकर शासन ने अपनी रणनीति बदलते हुए समूह (ग्रुप) के साथ-साथ सिंगल दुकानों को भी अलग-अलग नीलाम करने का निर्णय लिया है।

सहायक आयुक्त की उदासीनता, पॉलिसी फेल करने की ‘साजिश’ या सुस्ती?

​जिले में कुल 104 दुकानें हैं, जिनमें से एक महीना बीतने के बाद भी महज आधी दुकानें ही नीलाम हो पाई हैं। इस विफलता के पीछे मुख्य कारण सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे का बेहद उदासीन और संपर्क-विहीन रवैया माना जा रहा है। दरअसल, शराब ठेका एक जोखिम भरा और करोड़ों रुपये के निवेश वाला व्यवसाय है। एक अनुभवी ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस व्यापार में निवेशक शासन से मुनाफे की गारंटी तो नहीं, लेकिन प्रशासनिक सुरक्षा और विधिक सहयोग का आश्वासन जरूर चाहता है। ​तथ्य यह है कि पिछले वर्षों में सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारी खुद सक्षम और पुराने ठेकेदारों से संवाद स्थापित करते थे। उन्हें अवैध शराब की तस्करी रोकने, पुलिस-प्रशासन का फील्ड सपोर्ट दिलाने और ठेकेदार के हितों की रक्षा का भरोसा दिलाकर टेंडर में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाता था। इसके विपरीत, वर्तमान में सहायक आयुक्त दुबे की कार्यशैली ऐसी है मानो वे राज्य सरकार की नई आबकारी नीति को सागर में विफल करने पर उतारू हों। अधिकारियों की इसी “कमरा-बंद” कार्यप्रणाली के कारण सागर की वे दुकानें भी नहीं बिक पा रही हैं, जो अपनी शानदार बिक्री और मुनाफे के लिए प्रदेश भर में जानी जाती हैं।

नीलामी प्रक्रिया का आठवां चरण और शेड्यूल

​विभागीय सुस्ती और ठेकेदारों की बेरुखी के बीच अब आठवें चरण के लिए विज्ञप्ति जारी की गई है। इसके तहत मधुकर शाह वार्ड से लेकर बताशा वाली गली जैसी प्राइम लोकेशन वाली दुकानों की अलग-अलग बोली लग सकेगी। शेड्यूल के अनुसार ऑनलाइन टेंडर डाउनलोड व ऑफर 25 से 27 मार्च दोपहर 12:00 बजे तक अपलोड किए जा सकेंगे। नीलामी शुक्रवार शाम 4. 30 से शुरु होगी।आठवें चरण में कुल 16 एकल समूह में करीब 50 दुकानों को रखा गया है, जिनका कुल आरक्षित मूल्य लगभग 306 करोड़ रु.है।

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