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नारी शक्ति वंदन: सेठानी को आगे और महापौर- विधायक को पीछे की सीट !

सागर। भोपाल के रविन्द्र भवन में मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुए नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम में सागर की नारीशक्ति का तो बोलबाला रहा लेकिन सागर जिले के प्रतिनिधित्व के नाम पर आयोजन में निजी सेटिंग और राजनैतिक गुटबाजी के दृश्य देखने को मिले। सागर की निर्वाचित महापौर श्रीमती संगीता तिवारी और पूर्व मंत्री श्रीमती ललिता यादव को दर्शकों में भी पहली पंक्ति में स्थान नहीं मिला। उन्हें चेयर दी गई। वहीं सागर से आश्चर्यजनक रूप से महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक महिला बीड़ी उद्योगपति को बुलाया गया। वे अपनी पुत्री को लेकर आयोजन में पहुंचीं। उनका परिचय विशिष्ट अतिथि के रूप में दिया गया लेकिन मंच पर उनको भी स्थान नहीं मिला। इन बीड़ी उद्योगपति को दर्शकों में पहली पंक्ति हासिल हुई। आश्चर्य जनक ये था कि जाने कितने लोगों को कैंसर बांटने, जिले की छवि “बिड़भंजा” बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। खैर…..कार्यक्रम आरंभ होने के समय इनकी गार्ड, मैनेजर, डायरेक्टर बनकर चलने वाली पुत्री दर्शकों में दूसरी कतार में थीं, लेकिन मुख्यमंत्री के मंच पर पहुंचते ही जाने कब पहली पंक्ति में अपनी मां के बाजू में बैठी पाई गईं। तब, जबकि बैठक व्यवस्था पहले से निर्धारित थी, कुर्सियों पर नेमचिट पहले से चिपका दी गई थीं कि कौन कहां बैठेगा ,तब ऐसा हौच पौच होना इशारा करता है कि किसी का बेक सपोर्ट मिल रहा था जो सागर जिले की अनेक महिला नेताओं से बड़ा था। हालांकि इस सेटिंग का इशारा साप्ताहिक कालम में पहले ही दे दिया गया था। दरसल हाल ही में संगठन और सत्ता के गलियारों में प्रभावी हुई एक महिला नेत्री “आपणे मुलुक की बहिण आहे” वाला इंटरनल गुट आगे बढ़ा रही हैं। यह चुनी हुई महिला नेत्री बीते साल मराठी माणुष को ओवलाइज करने के फेर में सागर को बसाने वाले राजा उदेन शाह का नाम दबा चुकी हैं। बताया जा रहा है कि उन पर “मी मराठा- तुझा मराठा” इतना हावी हो चला है कि वे बाजीराव पेशवा की तर्ज अपना गोविंदराव पंत बुंदेले तराशने में जुट गई है। लगता है इन मराठी मां- बिटिया में उन्हें अपनी “पंत” दिख रही है। जान लीजिए कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन के तहत हो रहे अगले चुनावों में सागर जिले में आरक्षित हो रहीं तीन चार महिला सीटों पर टिकिट का भरोसा देकर भाजपा में महिला राजनीति की मठाधीश बनने का नया खेल शुरू हो चुका है। यह बिल्कुल अलग तरह की गुटबाजी है जिसके तार भूमिगत रूप से बिछा दिए गए हैं। इसमें जिन नॉनन पोलिटिकल महिलाओं को टिकट की दौड़ में शामिल किया जाना है। उनको समाज सेवा, पुरस्कार-सम्मान, बड़े राजनैतिक नेताओं मंत्रियों से भेंट मुलाकातें प्रायोजित किये जाने जैसे सारे हथकंडे अपनाए जाना अभी से शुरू हो चुके हैं। नागपुर, भोपाल से दिल्ली तक संघ, संगठन और मीडिया के स्तर पर परिवारवाद के खिलाफ हवा चलाई जाने की रणनीति भी इस नवगठित ग्रुप द्वारा चलाई जा रही है। इस रणनीति के लक्ष्य पर जिले के वे सभी बड़े नेता हैं जो अपनी पत्नी, बहु, बेटियों और परिवार की महिलाओं को राजनीति में सक्रिय करके उनकी उम्मीदवारी तैयार कर रहे हैं। महिला राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ इस एजेंडे को कोर कमेटी के सहारे पहले गुपचुप और फिर सही समय आने पर प्रत्यक्ष रूप से सामने लाकर लड़े जाने कि तैयारी हो रही है। राजनीति में अलग- अलग दलों घाट का पानी पीने वाली इन प्रवासी नेत्रियों की उठा-पटक को सागर जिले में बैठ कर देखना फिलहाल असंभव है क्योंकि इनकी गतिविधियां राजधानियों के सत्ता के गलियारों तक सीमित हैं। सागर के सामाजिक मंचों पर गैर -राजनैतिक उपस्थिति से राजनैतिक मंसूबों पर पर्दा डला रहता है। समाजसेवा के आधारहीन फर्जी उल्लेख बायोडाटा की जीनत हैं जिनमें ज्यादातर कांग्रेस के सत्ता काल में गैर भाजपाई विचारधाराओं को बढ़ाने के लिए किए गए थे।

सागरवाणी……9425172417

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