अपराध और अपराधी

इधर कटरबाजों पर एसपी की नजर उधर कलेक्टर का ‘धीमे नशे’ की जड़ पर प्रहार

  सागर के चार मेडिकल स्टोरों पर छापा

सागर। सागर शहर में लगातार सामने आ रही कटरबाजी की वारदातों को रोकने के लिए अब पुलिस और प्रशासन ने दोतरफा रणनीति अपनाई है। एक ओर जहां नवागत एसपी अनुराग सुजानिया लगातार थानों का औचक निरीक्षण कर और कॉम्बिंग गश्त के जरिए पुलिस को चुस्त और अपराधियों में खौफ पैदा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कलेक्टर प्रतिभा पाल इस अपराध की मुख्य जड़, यानी नारकोटिक्स व प्रतिबंधित नशीली दवाओं के अवैध कारोबार की जड़ काटने में जुट गई हैं। चूंकि कलेक्टर प्रतिभा पाल पूर्व में रीवा जिले में इस ‘धीमे नशे’ के सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी हैं, इसलिए उनके इस अनुभव का लाभ अब सागर को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार कटरबाजों द्वारा इन नारकोटिक्स दवाओं का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आने के बाद, एसपी की चर्चा पर कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया। जिसके बाद उन्होंने जिला स्तर पर एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी और ड्रग इंस्पेक्टर की संयुक्त टीम गठित कर सीधे मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी शुरू करवा दी।

4 मेडिकल स्टोरों पर सर्चिंग, बच्चन मेडिकल एजेंसी में मिलीं अनियमितताएं

खाद्य एवं औषधि संचालनालय के निर्देश पर गठित संभाग स्तरीय विशेष कमेटी ने सागर के चार प्रमुख मेडिकल स्टोरों पर ताबड़तोड़ सर्चिंग की। इस कार्रवाई में सागर ड्रग इंस्पेक्टर सोनम जैन, मनीष सुमन, छतरपुर ड्रग इंस्पेक्टर अजीत जैन और टीकमगढ़ से दीपक नामदेव शामिल रहे। टीम ने जब जांच की तो दवाओं के वैध बिल न मिलने पर संबंधित संचालकों को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है। बच्चन मेडिकल एजेंसी, फन्नुसा कुआं की जांच के दौरान करीब 5 प्रतिबंधित दवाओं के न तो बिल मिले और न ही उनके बैच नंबर का कोई रिकॉर्ड था। इसी तरह की कार्रवाई ड्रग हाउस, ओम मेडिकल और चैतन्य मेडिकल पर भी की गई। यहां बिना बिल के मिली संदिग्ध दवाओं को टीम ने जब्त कर लिया है और संचालकों को नोटिस जारी कर बिल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

रीवा कनेक्शन के चलते गहराया शक

सागर के दवा बाजार में यह चर्चा जोरों पर है कि कुछ कतिपय थोक और फुटकर दवा व्यापारी, व्यापार की आड़ में इन नशीली दवाओं को सागर जिले के बाहर भी सप्लाई कर रहे हैं। इस शक की पुख्ता वजह एक साल पुराना वह घटनाक्रम है, जब रीवा पुलिस ने सागर के विजय टॉकीज क्षेत्र के स्थानीय केमिस्ट ‘सिटीजन जैन’ और ‘आनंद चैन’ के ठिकानों से सैकड़ों पेटी नशीली कफ सिरप जब्त की थी। यही कारण है कि इस बार राज्य स्तरीय टीम सीधे सागर से इस नेक्सस को खंगाल रही है।

क्या है शेड्यूल-एक्स दवाएं और क्यों है इन पर नजर?

राज्य शासन के निर्देश पर पूरे प्रदेश में इस समय शेड्यूल-एक्स श्रेणी में आने वाली दवाओं की खरीद-बिक्री की बारीक पड़ताल की जा रही है। इन दवाओं का मुख्य इस्तेमाल अनिद्रा, अत्यधिक तनाव, मिर्गी और मानसिक अवसाद जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के उपचार में किया जाता है। नियमानुसार, कोई भी केमिस्ट इन दवाओं को केवल पंजीकृत डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेच सकता है। दुकानदार के लिए यह अनिवार्य है कि वह इन दवाओं की खरीद-बिक्री के साथ-साथ मरीज का नाम, उसका पता और दवा लिखने वाले डॉक्टर का पूरा रिकॉर्ड अपने पास सुरक्षित रखे।

18/05/2026

 

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