हनी ट्रैप- 2.0: तीन बत्ती से मकरोनिया तक भाजपा नेत्री (?) के तार, रसूखदार भी उलझ चुके हैं!

सागर। इंदौर के बहुचर्चित हनी ट्रैप-2.0 मामले की जांच अब सागर निवासिनी रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी के इर्द-गिर्द घूम रही है, जिसे इस पूरे ब्लैकमेलिंग नेटवर्क की मुख्य कड़ी माना जा रहा है। सागर विधानसभा क्षेत्र के सबसे करीबी विस क्षेत्र (नरयावली/मकरोनिया) की राजनीति में कुछ साल पहले बेहद सक्रिय रही रेशू उर्फ अभिलाषा स्वभाव से बड़बोली और ऊंचे-ऊंचे ख्वाब देखने वाली युवती है। खुद को हायर एजुकेटेड और मेधावी बताने वाली इस युवती का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी विवादों से घिरा रहा है। शुरुआती दौर में उसने साधारण कारोबारियों को अपना निशाना बनाया था। साल 2020 के आसपास उसने सागर शहर के कटरा बाजार में कथित रूप से यूपीएससी (UPSC) कोचिंग के संचालन के नाम पर एक बेहद लोकप्रिय अखबार में बड़ा विज्ञापन दिया, लेकिन उसकी फीस नहीं चुकाई। जब अखबार के एजेंट ने पैसों का तकादा किया, तो रेशू ने उसे अजा-जजा (SC/ST) एक्ट में फंसाने की धमकी दे डाली। इसके बाद उसने सिविल लाइंस में फ्लेक्स और प्रिंटिंग का काम करने वाले एक युवक को चूना लगाया; अपनी तथाकथित कोचिंग के पोस्टर-पंपलेट छपवाने के बाद वह उसकी भी राशि हजम कर गई।
स्थानीय विधायक को प्रभावित करने की कोशिश और सरेआम फटकार
इन छोटे-मोटे विवादों के बाद रेशू ने खुद को शहर से सटे हुए उपनगर मकरोनिया और करीबी विधानसभा क्षेत्र में एक उभरती हुई ‘युवा नेत्री’ के रूप में प्रोजेक्ट करना शुरू कर दिया। सूत्रों की मानें तो अपनी तिकड़मों से वह स्थानीय विधायक को प्रभावित करने में भी कामयाब हो गई थी। लेकिन जल्द ही इस बात की भनक विधायक की पत्नी समेत उनके परिजनों को लग गई। इसके बाद मकरोनिया में आयोजित एक सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रम में विधायक के परिजनों ने रेशू को सरेआम ऐसी फटकार लगाई कि वह चंद दिनों के लिए परिदृश्य से गायब हो गई।हालांकि, उसने हार नहीं मानी और दोबारा राजनीति में पैर जमाने की जुगत भिड़ाने लगी। कुछ समय बाद उसे गोपालगंज स्थित लाल स्कूल के पीछे, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दलित परिवार में भोजन करने के एक शासकीय कार्यक्रम में भी देखा गया था। सूत्रों का कहना है कि राजनीति में बड़ा मुकाम पाने की खातिर उसने स्थानीय विधायक की करीबी हासिल करने के कई जतन किए Iइसके बाद रेशू, उपनगर मकरोनिया के कुछ ‘ग्रे बैकग्राउंड’ (संदिग्ध छवि) वाले लोगों के संपर्क में रही, जिनके जरिए वह अपनी हजरतें पूरी करती रही। उसकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दिल्ली की राजनीति करने वाले टॉप-5 नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें शेयर करती थी, हालांकि यह अभी जांच का विषय है कि ये तस्वीरें असली हैं या AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा तैयार की गई हैं।
कोर्ट पेशी के दौरान जेल में बुना गया ‘हनी ट्रैप-2’ का ताना-बाना
राजनीति और रसूखदारों के बीच पैठ बनाने की इसी सनक के बीच रेशू का संपर्क इंदौर की श्वेता विजय जैन से हुआ। सूत्रों के अनुसार, श्वेता विजय जैन की मुलाकात जेल में इंदौर की ही चर्चित लेडी तस्कर अलका दीक्षित से हुई थी। इसके बाद जब कोर्ट में पेशी होती थी, तब श्वेता अपने साथ रेशू को लेकर अलका से मिलने पहुंचती थी। इसी दौरान कोर्ट परिसर और मुलाकातों के बीच इस नए ब्लैकमेलिंग नेटवर्क (हनी ट्रैप-2) की रूपरेखा तैयार की गई।रेशू ने अलका को भरोसा दिलाया था कि सागर और भोपाल के कई बड़े राजनेता, प्रॉपर्टी कारोबारी, फाइनेंसर, शराब माफिया और आला अफसर उसके सीधे संपर्क में हैं, जिन्हें आसानी से जाल में फंसाकर करोड़ों रुपए ऐंठे जा सकते हैं। इसी रणनीति के तहत रेशू ने श्वेता के माध्यम से अलका दीक्षित से हाथ मिलाया और तीनों ने मिलकर प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
निमाड़ के कद्दावर नेता को बनाया निशाना, भोपाल तक हड़कंप
जांच में सामने आया है कि इस त्रिकुटी ने निमाड़ क्षेत्र के एक बेहद प्रभावशाली राजनेता को अपने जाल में फंसाया था। इस नेता का इंदौर स्थित मकान अलका दीक्षित के ही इलाके में है। मामले का खुलासा तब हुआ जब अलका ने इंदौर के चिंटू ठाकुर नाम के व्यक्ति को ब्लैकमेल करने की कोशिश की। चिंटू ठाकुर ने जब अपनी ऊंची राजनीतिक पहुंच का हवाला दिया, तो अलका ने उसे कथित हनी ट्रैप के वीडियो दिखाते हुए साफ कहा कि जिन बड़े नेताओं के नाम वह ले रहा है, उनके वीडियो भी उसके पास महफूज हैं। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया और मामले के तार भोपाल के सियासी गलियारों से जुड़ गए।
19 दिन की देरी के बाद FIR, कई लोग हिरासत में
ब्लैकमेलिंग की इस गंभीर शिकायत के बावजूद पुलिस ने करीब 19 दिन बाद एफआईआर (FIR) दर्ज की। शिकायतकर्ता चिंटू ठाकुर खुद भी आजादनगर थाने में हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी है। एफआईआर दर्ज होते ही पुलिस और इंटेलिजेंस विंग ने ताबड़तोड़ दबिश देकर लेडी तस्कर अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप, पार्टनर लाखन चौधरी, कथित पत्रकार जितेंद्र पुरोहित, श्वेता विजय जैन और एक संदेही हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा को हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि आरोपी पत्रकार जितेंद्र पुरोहित का एक करीबी रिश्तेदार पुलिस विभाग में ही पदस्थ है, जिसने उज्जैन में जमीन के एक सौदे को लेकर अलका से उसकी मुलाकात करवाई थी।
रेशू चौधरी बनी आरोपी! श्वेता जैन ने खुद को बताया बेगुनाह
पुलिस ने बुधवार को कानूनी शिकंजा कसते हुए श्वेता जैन और अलका दीक्षित के साथ-साथ सागर की रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी को भी आधिकारिक तौर पर आरोपी बना लिया है। जानकारी के मुताबिक, रेशू पूर्व में भाजपा के एक प्रकोष्ठ में पदाधिकारी भी रह चुकी है। क्राइम ब्रांच डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने पुष्टि की है कि रेशू को हिरासत में लेकर लगातार पूछताछ की जा रही है। उधर, हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा से भी देर रात तक पूछताछ की गई, जिसके अलका से सीधे संपर्क के सबूत मिले हैं; पर्याप्त साक्ष्य मिलते ही उसे भी आरोपी बनाया जाएगा।इस बीच, पुलिस रिमांड के दौरान श्वेता विजय जैन ने खुद को बेगुनाह बताते हुए सारा ठीकरा अलका और रेशू पर फोड़ दिया है। श्वेता ने अधिकारियों से कहा कि उसने अलका को आगाह किया था कि जिन लोगों को वे फंसा रही हैं, वे बेहद ताकतवर हैं, लेकिन अलका नहीं मानी। श्वेता ने अब इस मामले में ‘सरकारी गवाह’ बनने की इच्छा जाहिर की है।
डिजिटल सबूतों की तलाश, स्थानीय नेताओं में खौफ
फिलहाल महिला अधिकारियों की एक विशेष टीम रेशू चौधरी से कड़ाई से पूछताछ कर रही है। पुलिस की सबसे बड़ी प्राथमिकता आरोपियों के पास मौजूद कथित हनी ट्रैप के वीडियो, ऑडियो क्लिप और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद करने की है। आरोपियों के मोबाइल से कुछ डिलीट की गई फाइलें रिकवर होने की भी खबर है। सागर और मकरोनिया के राजनीतिक हलकों में अब इस बात को लेकर जबरदस्त चर्चाएं और खौफ है कि अपनी बड़बोली और जालसाज फितरत के चलते रेशू ने कहीं सागर के भी कुछ स्थानीय जन-प्रतिनिधियों या रसूखदारों को अपने झूठ और हुस्न के जाल में तो नहीं फंसा लिया है। पुलिस की आगामी जांच में कई और बड़े चेहरों के बेनकाब होने की उम्मीद है।
20/05/2026…..9425172417



