नारदवाणी: हनी ट्रेप 2.0 गर्ल रेशू ने पहली बोवनी हायर एजुकेशन ” बिजनेस” वालों से की थी

नारदवाणी
1. पुलिस :बीमारी की जड़ सलामत है और पत्तों पर दवाई छिड़की जा रही है
शहर को कटरबाजों और चाकूबाजों से मुक्त कराने के लिए नए कप्तान साहब ने सिंघम स्टाइल में मोर्चा तो खोल दिया है। पुराने मवालियों की थाने में परेड हो रही है और नए ‘उभरते सितारों’ की धरपकड़ जारी है। इसी बहाने अपराधों की गंगोत्री यानी ‘अवैध शराब’ पर भी सर्जिकल स्ट्राइक की स्क्रिप्ट लिखी गई। लेकिन ठहरिए जनाब! जरा चश्मा साफ कीजिए… कार्रवाई अवैध शराब बेचने वाले मगरमच्छों पर नहीं, बल्कि दो घूंट हलक के नीचे उतारने वाले ‘शराब प्रेमियों’ पर हुई है।गजब का इत्तेफाक देखिए, जहां खुलेआम महफिल जमी थी, वहां से महज 10-25 कदम की दूरी पर अवैध शराब की बकायदा ‘होम डिलीवरी’ और काउंटर सेल चल रही थी। लेकिन धन्य हो हमारी खाकी! पुलिस की नजरें सुराप्रेमियों पर भभकी जमाने में इतनी मशरूफ थीं कि पास में ही चल रही अवैध शराब के काउंटर उन्हें नजर ही नहीं आए। अब वहां पुलिस क्यों नहीं गई? यह राज तो या तो वो खुद जानें या फिर खाकी को ‘महालक्ष्मी’ का वरदान देने वाले नारायण ही जानें! कुल मिलाकर, बीमारी की जड़ सलामत है और पत्तों पर दवाई छिड़की जा रही है।
2. दरोगा जी की शामत आई, तो प्यादों की चांदी हो गई!
चार दिन पहले जब एक पूरा कुनबा तथाकथित पुलिसिया प्रताड़ना से तंग आकर मोबाइल टॉवर पर जय-वीरू की तरह चढ़ गया। दरोगा साहब की किस्मत वैसे भी इन दिनों राहु-केतु के फेर में थी, थाने के इलाके में आए दिन होने वाले टंटों ने पहले ही उनकी हालत टाइट कर रखी थी। जब खुद कप्तान साहब को टॉवर से परिवार को उतारने जमीन पर आना पड़ा। ये तमाशा देखने पहुंचे बगल के दो अन्य थानों के प्रभारियों के मन में तो इस फजीहत को देख ‘घी के दीये’ जलने लगे थे, उन्हें लगा कि अब इस मलाईदार थाने की गद्दी खाली होगी। लेकिन साहब, निवर्तमान दरोगा जी की किस्मत शायद साक्षात पीली धातु सोने की कलम से विधाता ने लिखी है, सो उनका बाल भी बांका नहीं हुआ। इसी थाने का एक और दिलचस्प ‘चमत्कार’ सुनिए। अपराधों की बाढ़ आई तो सजा पाकर यहां-वहां फिंके दो पुलिसकर्मियों की थाने में दोबारा ‘वापसी’ हो गई। इनमें से एक सूरमा तो इतने समय तक सीएसपी साहब का सारथी बना रहा कि अब वो खुद को थाने का ‘अघोषित थानेदार’ समझने लगा है। इसे कहते हैं- दरोगा जी की शामत आई, तो प्यादों की चांदी हो गई!
3. पांच पांडवों की ‘सूट-बूट’ वाली फोटो पॉलिटिक्स
कांग्रेस के पांच-सात ‘शूरवीर’ घर से बाहर निकले। वैसे तो प्रदेश आलाकमान ने संगठन को दो हिस्सों (शहर और ग्रामीण) में बांटकर ‘दो सूरमाओं’ को कमान सौंपी थी, लेकिन सागर में एक ‘तीसरा मोर्चा’ भी समानांतर चल रहा है। इस मोर्चे में कुल जमा ’95 कम पूरे 100′ नेता शामिल हैं।पिछले दिनों यह पांच सदस्यीय ‘विशिष्ट’ प्रतिनिधिमंडल जनहित की बड़ी-बड़ी चिंताएं लेकर कलेक्टर साहब की चौखट पर हो आया। मुद्दे वही घिसे-पिटे थे—पानी, बिजली और सड़क, लेकिन असली मकसद तो आखिरी का ‘फोटो सेशन’ था, ताकि अखबारों में चेहरा चमक सके। इस मुलाकात से शहर के हजार-डेढ़ हजार असली कांग्रेसी कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। गलियारों में कानाफूसी है कि “महाराज” और “बहिन जी” अगर हम अदने कार्यकर्ताओं को भी साथ ले लेते तो क्या कलेक्टर साहब डांट देते? हम वहां अपना पद भी नहीं बताते, कम से कम कलेक्टर साहब के सामने कांग्रेस की रही-सही साख का यों सरेआम तमाशा तो नहीं बनता!
4. रेशू की ‘पेन ड्राइव’ और बड़े-बड़े चौधरियों का ‘हार्ट फेलियर’
इंदौर के मशहूर ‘हनीट्रैप’ कांड की स्क्रिप्ट लिखने वाली मुख्य अदाकाराएं हमारे इसी सागर की मिट्टी की देन हैं, यह तो जगजाहिर है। इन्हीं में से एक मकरोनिया की ‘हसीना’ रेशू चौधरी ने इन दिनों शहर के सफेदपोश चौधरियों और धंधेबाजों की रातों की नींद और दिन का चैन हराम कर रखा है।जैसे ही इंदौर क्राइम ब्रांच की टीम रेशू के पास से डिजिटल सबूत, पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क जब्त करने की खबरें फ्लैश करती है, वैसे ही यहां सागर के इन बड़ों-बड़ों के हाथ-पांव सुन्न हो जाते हैं,दिल-दिमाग हैंग होने लगता है। जनरल नॉलेज के लिए बता दें कि इस सांवली- सलोनी ने अपने इस ‘मायावी बिजनेस’ की पहली बोवनी (शुरुआत) सागर के ही एक सर्वोच्च निजी शिक्षण संस्थान के मालिक का शिकार करके की थी। मजे की बात यह है कि यह ज्ञान का मंदिर नरयावली विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं के भीतर बरसों से फल-फूल रहा है।
5. कानून के मास्साब का ‘कट’ मनी वाला ऑडियो क्लिप
डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कानून विभाग में न्याय और नियम पढ़ाने वाले एक ‘मास्साब’ खुद ही गैर-कानूनी चक्रव्यूह में फंस चुके हैं। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि पिछले दिनों हुई संविदा शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के दौरान इन प्रोफेसर साहब का ईमान डोल गया। इन्होंने एक महिला उम्मीदवार को ज्वाइनिंग लेटर थमाने के बदले ‘मोटी घूस’ की डिमांड रख दी। लेकिन मास्साब कानून पढ़ाते-पढ़ाते यह भूल गए कि जमाना डिजिटल है। महिला उम्मीदवार ने इस पूरी सौदेबाजी की ऐसी ‘एचडी ऑडियो रिकॉर्डिंग’ तैयार कर ली है कि सुनते ही पैरों तले जमीन खिसक जाए। सूत्रों का कहना है कि इस ऑडियो में मास्साब अपने पवित्र मुखारविंद से केवल अपने लिए नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के ऊपर बैठे हाकिमों से लेकर ‘मुखिया’ तक के ‘कट’ (हिस्से) का बकायदा प्रतिशत तय करते सुनाई दे रहे हैं। अब ट्विस्ट यह है कि पीड़ित महिला के पतिदेव खुद पेशे से वकील हैं, सो वे मास्साब को ‘आउट ऑफ कोर्ट’ सेटलमेंट का मौका न देकर, कोर्ट के जरिए ऐसी ‘सर्वश्रेष्ठ’ दवा देने की तैयारी में हैं कि प्रोफेसर साहब ताउम्र कानून की धाराएं गिनते रहेंगे।
6. ज़मीन का सौदा… ‘नॉट फॉर सेल’, ओनली फॉर ‘पद्मश्री’!
इस बार सागर की तथाकथित ‘बीड़ी क्वीन’ यानी लोकल एलिजाबेथ ने ‘पद्म पुरस्कार’ पाने की हसरत में छद्म और प्रपंच की सारी हदें पार कर दी हैं। सागर के बीड़ी अस्पताल के पास स्थित इनकी अरबों रुपये की बेशकीमती पुश्तैनी जमीन का एक मामला सालों से तहसील कार्यालय की फाइलों में धूल खा रहा है। लेकिन अंदर की खबर रखने वाले बता रहे हैं कि इस जमीन पर “Not for Sale” का बोर्ड इसलिए लगा है क्योंकि यह “Only for Padmshri” रिजर्व है। यानी जमीन उसी को मिलेगी जो दिल्ली के दरबार में लॉबिंग करके अम्मा जी को ‘पद्मश्री’ दिलवाएगा। इस ‘पद्मश्री वर्सेस प्रॉपर्टी’ की महा-डील को अंजाम देने के लिए इनके पंजाबी दामाद और एक ‘इंपोर्टेड’ राजकुमारी नेता-नेत्रियों, प्रॉक्सी बिल्डरों और भू-माफियाओं के चक्कर काट रहे हैं। इनका तरीका बिल्कुल हॉलीवुड के बदनाम ‘एप्स्टीन’ जैसा है। इन दामाद जी को डोनाल्ड ट्रम्प की तरह विजय माल्या जैसे भगोड़ों से डील करने का पुराना और गहरा तजुर्बा है, इसलिए ‘जब मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा काजी’ की तर्ज पर लॉबिंग चालू है। अभी कुछ समय पहले यही पंजाबी दामाद कृषि उपज मंडी में जमा बीड़ी सेठियों की एंट्री टैक्स की रकम डकारने की फिराक में थे, और जब वहां दाल नहीं गली तो अब कृषि भूमि की दलाली में उतर आए हैं। हालांकि, इस बेशकीमती जमीन में कुछ अन्य कानूनी हिस्सेदार भी हैं, जिनकी हकमारी की जा रही है। सूत्रों की मानें तो उन हिस्सेदारों की आवाज दबाने और उन्हें ‘निपटाने’ के लिए सिविल लाइंस स्थित इनके शाही बंगले पर बाहुबलियों और बंदूकधारियों की एक ‘मिनी-प्राइवेट आर्मी’ तैयार की जा रही है। यह सीधा-सीधा भू-माफियाओं को खुली ‘दावत-ए-जमीन’ है, ताकि बिटिया और दामाद अपनी ‘लोकल एलिजाबेथ’ को देश के सेंट्रल हॉल में ले जाकर राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित करवा सकें।
सागरवाणी डेस्क…9425172417



