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महिलाओं की बेबसी का मजाक उड़ाती पुरुष टॉयलेट में रोशन “गुलाबी ट्यूबलाइट” 

सागर रेलवे स्टेशन पर पुरुष टॉयलेट का उपयोग करने को मजबूर महिलाएं, रात 10 बजे बंद कर दिया जाता है महिला शौचालय, शराबियों के बीच महिलाओं की सुरक्षा ताक पर

सागर। देश में महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बुंदेलखंड के हृदय स्थल सागर के मुख्य रेलवे स्टेशन के बाहर की हकीकत इन दावों को मुंह चिढ़ा रही है। विडंबना देखिए कि वर्तमान में सागर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व महिला सांसद डॉ. लता वानखेड़े कर रही हैं, और जिले की प्रशासनिक कमान भी महिला कलेक्टर प्रतिभा सिंह पाल के हाथों में है। इसके बावजूद, स्टेशन के ठीक बाहर रोज रात को महिलाओं की निजता और सुरक्षा दांव पर लगती है। मामला प्लेटफॉर्म नंबर एक के बाहर बने पब्लिक टॉयलेट का है। इसका संचालन नई दिल्ली की संस्था ‘आर्य भट्ट सेवा संस्थान’ को 24 घंटे के लिए सौंपा गया है। लेकिन संस्था के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण कर्मचारी रात 10 बजे ही शौचालय का शटर गिराकर गायब हो जाते हैं। इसके बाद शुरू होता है महिला यात्रियों की बेबसी और खौफ का सफर। रात के समय ट्रेनों का इंतजार कर रही महिलाओं को मजबूरी में पुरुषों के लिए बने टॉयलेट का रुख करना पड़ता है। अत्यंत शर्म और झिझक के साथ महिलाएं वहां मौजूद पुरुषों से हाथ जोड़कर मिन्नतें करती हैं कि वे दो मिनट के लिए बाहर रुक जाएं। जिनके साथ परिवार के पुरुष हैं, वे तो जैसे-तैसे भीतर चली जाती हैं, लेकिन अकेली सफर कर रही युवतियों और महिलाओं के लिए यह स्थिति बेहद असुरक्षित और खौफनाक हो जाती है। इस संवेदनशील जगह की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है। शौचालय के ठीक सामने सड़क के दूसरी तरफ शराब दुकान है, जिससे रात होते ही यहां पियक्कड़ों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। ऐसे माहौल में किसी अकेली महिला का आधी रात को पुरुष शौचालय में जाना कितनी बड़ी अनहोनी को दावत देना है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। इस घोर अव्यवस्था के बीच पुरुष टॉयलेट के भीतर जल रही गुलाबी ट्यूबलाइट महिलाओं की बेबसी का मज़ाक उड़ाती प्रतीत होती है। ​जब इस गंभीर लापरवाही को लेकर “सागरवाणी” ने दिल्ली में रह रहे एनजीओ आर्यभट्ट के प्रभारी कुणाल सिंह से बात की, तो उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना तर्क देते हुए कहा कि रात 10 बजे के बाद स्टेशन पर चहल-पहल नहीं रहती, इसलिए कर्मचारी रामकुमार इसे बंद कर देता है। उन्होंने संस्था की आमदनी और वेतन के खर्च का रोना भी रोया। हालांकि, तीखे सवालों के बाद उन्होंने दो दिन के भीतर नाइट शिफ्ट के लिए अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था कर इसे 24 घंटे संचालित करने का आश्वासन दिया है। इधर इन हालात को लेकर रेलवे स्टेशन के एक अधिकारी का कहना है कि प्लेटफार्म पर मौजूद महिला-पुरुष यात्रियों के लिए टॉयलेट उपलब्ध है लेकिन जो महिला-पुरुष यात्री ट्रेन के इंतजार में प्लेटफार्म के बाहर रुके रहते हैं। उनके लिए यह बाहर वाला टॉयलेट है। अधिकारी का कहना है कि इस संबंध में एनजीओ के संचालक से जवाब तलब किया जाएगा। खैर, अब देखना यह है कि दो महिला नेतृत्व वाले इस जिले में महिलाओं को इस जलालत से कब तक मुक्ति मिलती है।

…9425172417     27/06/2026

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