चौपाल/चौराहा

जानिए क्या है….. सागर को लेकर दोनों नवागत एडिशनल एसपी की सोच

एडि.एसपी सोलंकी: अपराधियों को ” कानूनी पिंजरा”और वाइल्ड लाइफ को कैमरे में कैद करने में हैं माहिर ! 

सागर। नवागत सिटी एडिशनल एसपी नरेंद्र सोलंकी वर्ष 2014 राज्य पुलिस सेवा बैच के अधिकारी हैं। मूलतः उज्जैन निवासी एडि. एसपी सोलंकी की 11 साल से अधिक की सेवाओं में ज्यादातर पोस्टिंग मालवांचल में रही है। निवर्तमान एसपी अनुराग सुजानिया के साथ वे मंदसौर में बतौर एसडीओपी और सीएसपी काम कर चुके हैं। हालांकि इसके पहले उनका चयन वर्ष 2010 में प्लाटून कमांडर और वर्ष 2013 में पुलिस की स्पेशल ब्रांच में बतौर एसआई हो चुका था। चूंकि मालवांचल के नीमच, मंदसौर अफीम, डोडा चूरा की तस्करी के लिए कु- ख्यात हैं जिसके चलते एडि. एसपी सोलंकी को इन अपराधों को ट्रेस करने का खूब मौका मिला। सागरवाणी से चर्चा में उन्होंने बताया कि मेरा व्यक्तिगत मानना है कि सागर समेत बुंदेलखंड आपराधिक गतिविधियों पर रोकथाम के मामले में पूर्व की पोस्टिंग वाले इलाकों से ज्यादा सरल है। जिसकी मुख्य वजह ये है कि यहां चोरी-लूट छोड़ दें तो यहां अपराध प्री- प्लान्ड नहीं होते हैं। मारपीट, हत्या समेत अन्य अपराध तात्कालिक घटनाक्रम पर आधारित होते हैं। संगठित अपराध जैसा यहां कुछ देखने नहीं मिलता है। इससे पहले एडि. एसपी सोलंकी ने बताया कि मेरी पुलिसिंग में तकनीकी साक्ष्यों की अहम भूमिका रहती है, इसलिए मैं खुद को भी लैपटॉप फ्रैंडली बनाते हुए अपराधियों का डाटा बेस खंगालता हूं। साथ ही अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को मैदान में जाकर अधिक से अधिक साक्ष्य एकत्र करने प्रेरित करता हूं। 2016 में सिंहस्थ ड्यूटी कर चुके श्री सोलंकी, जिला प्रशासन की वर्किंग पर लोक प्रशासन विभाग के अंतर्गत एम फिल कर चुके हैं। किताबों के अलावा उन्हें वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी का बहुत शौक है। वे कहते हैं कि मैं प्रत्येक अपराधी को कानूनी पिंजरा ( जेल) और अधिक से अधिक वाइल्ड लाइफ को अपने कैमरे में कैद करने की कोशिश करता हूं। श्री सोलंकी ने बताया कि हाल ही में गृह विभाग ने इंट्राऑपरेटिव क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) डिजिटल डाटा बेस तैयार कराने का काम शुरु किया है। दरअसल ये एक राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पहल है जो भारत में आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न घटकों को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ती है। यह प्रणाली “वन डेटा, वन्स एंट्री” के सिद्धांत पर काम करती है। यह प्रणाली न्याय वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए पाँच प्रमुख स्तंभों को आपस में जोड़ती है। जिनमें पुलिस, न्यायालय, जेल, अभियोजन शाखा और फोरेन्सिक विज्ञान प्रयोगशाला शामिल है। मेरा प्रयास है कि अपने अधिकार क्षेत्र में इसका शत- प्रतिशत उपयोग कराऊं। यहां बता दें कि आईसीजेएस में किसी भी अपराधी का डाटा फीड होने के बाद दूसरे किसी अपराध में उसकी पहचान करना सरल रहेगा। इसके अलावा जमानत पर बाहर आकर अपराध करने वालों की भी इस सिस्टम से समय रहते पहचान हो जाएगी जिसके बाद उन्हें पूर्व के अपराध में मिली जमानत को कैंसिल कराने में सहुलियत होगी। यहां बता दें कि एडिशनल एसपी सोलंकी को सागर व मकरोनिया के अलावा देवरी, रहली के थाना क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी दी गई है।

एडिशनल एसपी भदौरिया: क्रिकेट के शौकीन हैं  डाकुओं के बाद अब साइबर लुटेरों के खिलाफ स्ट्राइक 

सागर। सीधे शब्दों में कहें तो नवागत बीना एडिशनल एसपी जयवीर सिंह भदौरिया एक खानदानी पुलिसमैन हैं। पूर्वज ब्रिटिश सरकार में पुलिस अफसर रहे तो आजादी के बाद पिता और ताऊ ने पुलिस महकमे में ऊंचे पदों पर सेवाएं दीं। वर्ष 2002 के राज्य पुलिस सेवा बैच से निकले श्री भदौरिया ने राज्य के उन गिने-चुने पुलिस अधिकारियों में से हैं जिन्होंने मप्र के लगभग सभी अंचल में काम किया है। प्रोवेशन पीरियड उज्जैन में पूरा करने के बाद वे कभी सीएसपी इंदौर ( मालवा) व जबलपुर ( महाकौशल) तो कभी रीवा (बघेलखंड) और मुरैना, सबलगढ़ ( ग्वालियर-चंबल) आदि में एसडीओपी रहे हैं। अब वे बुंदेलखंड यानी सागर पहुंचे हैं। करियर की असल शुरुआत चंबल से हुई। जहां उन्होंने दस्यू उन्मूलन कार्यक्रम के तहत साल 2005 में 25 हजार के ईनामी डकैत रमेश जाटव को सबलगढ में मार गिराया था। दो साल बाद श्री भदौरिया एक और चर्चित 8 लाख रु. के ईनामी डकैत जगजीवन राम परिहार के एनकांउटर में शामिल हुए। ग्वालियर के जीवाजी राजकीय विवि से लोक प्रशासन में गोल्ड मेडलिस्ट (एमए) क्रिकेट के बड़े शौकीन हैं। डकैतों की समस्या लगभग समाप्त होने के बाद अब एडि. एसपी भदौरिया, साइबर फ्रॉड करने वालों को टारगेट पर लेते रहते हैं। उनका कहना है कि बीहड़ के डकैतों से ज्यादा खतरनाक एयर कंडीशंड कमरों में बैठे साइबर फ्रॉड और बीच बाजार में चिटफंड कंपनी चलाने वाले लूटेरे हैं। मेरा लक्ष्य इस समस्या को खत्म करने से ज्यादा लोगों को इन अपराधियों के प्रति जागरुक करना है। सागर के कार्यकाल में, मैं साइबर और चिटफंड सरीखे अपराधों की पड़ताल को प्राथमिकता दूंगा। बीना, बंडा, राहतगढ और खुरई के 17 थाना क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण के उत्तरदायी श्री भदौरिया ने करीब 25 वर्ष पहले साल 2002 में शहर के परकोटा किला स्थित जेएनपीए से डीएसपी की ट्रेनिंग ली थी। उनका कहना है कि इन बीते 25 वर्ष में सागर बहुत बदल गया है। बड़ा नजरिया रखें तो अब ये शहर महानगर की शक्ल लेता दिख रहा है। जहां तक अन्य अपराध की बात है तो उनमें लिप्त तत्वों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति रहेगी। जागरूक नागरिक भी अपने समस्याएं व सुझाव रख सकते हैं। उन पर यथा संभव काम किया जाएगा। फिलहाल वरिष्ठ अधिकारी, मैं और साथी अधिकारी और अधीनस्थ अमला आईसीजेएस को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए कटिबद्ध हैं। यह डाटाबेस आदतन अपराधियों पर शिकंजा कसने में कारगर हथियार साबित होगा।

9425172417……25/06/2026

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