नौजवान अध्यक्ष जी के ‘बालपन’ का बैंक खाता और चेन्नई कनेक्शन !

नारदवाणी
1. अध्यक्ष जी के ‘बालपन’ का बैंक खाता और चेन्नई का गुप्त रास्ता!
सत्ताधारी पार्टी ने सागर में अपनी ‘नौजवान ब्रिगेड’ की कमान क्या सौंपी, पार्टी के पुराने सूरमाओं की नींद ही उड़ गई। तीन-तीन विधानसभा क्षेत्रों का बोझ उठाने वाले इस ‘नौसिखिए’ नेता का नाम अचानक लॉटरी की तरह निकला तो प्रतिद्वंद्वी हैरान रह गए। पर अब जब सन्नाटा टूटा, तो भड़ास की सुनामी आ गई है! एक दावेदार का कहना है कि पार्टी ने बंडा में हाथी पर सवार होकर अपनों ही का गला काटने वाले को इतना बड़ा तोहफा दे दिया। तो वहीं दूसरे चतुर प्रतिद्वंद्वी ने सीधा उनका ‘छात्र खाता’ खंगालने का मंत्र दे दिया है। कहा जा रहा है कि अगर इस नौजवान नेता के स्टुडेंट बैंक अकाउंट की पासबुक के पन्ने पलटे जाएं, तो “सागर से चेन्नई” तक फैला वह व्यावसायिक साम्राज्य दिखेगा जिस पर टैक्स वालों की नज़र भी नहीं पड़ सकी। छात्र खातों पर आयकर विभाग की मेहरबानी का ऐसा तगड़ा ‘उपयोग’ देखकर तो बड़े-बड़े मुनीम भी नतमस्तक हैं!
2. अकडू शहज़ादे का “कुकड़ुकूं” किसने किसने बनाया?
बीते सप्ताह भ्रष्टाचारी भविष्य निधि संगठन के एक उच्च श्रेणी के घूसखोर अफ़सर को न्याय के मंदिर ने दोषी करार दिया । EOW द्वारा बीड़ी क्वीन लोकल एलिज़ाबेथ की तीसरी पीढ़ी के अकडू शहजादे ने इन्हें ट्रैप कराया था । पत्रकारों को दी गई बाईट में इस शहजादे ने ख़ुद को उस मुर्गे की तरह बताया जो सबको जगाने के बाद कट कर खा लिया जाता है । इस बाईट से और भी कई दिलचस्प सवाल उठे । इनके फर्म में ऐसी कौनसी ख़ामी थी जिसे छिपाने के लिए इस सोफिस्टीकेटेड शहज़ादे को ऐसा काण्ड करना पड़ा? यह सवाल भी उठता है कि श्री “सत्य “ साईं बाबा को पूजने वाले स्वयंभू महारानी लोकल एलिज़ाबेथ के परिवार के किस किस सदस्य ने इस ट्रैप का हवाला देकर “सत्य “ उजागर करने वाले इस शहज़ादे का कुकड़ुकूँ बनाया और क्यों ? क्या ये बाबा को सच में पूजते हैं या यह भी इनकी समाज सेवा की तरह ढोंग है ? वैसे पद्म सम्मान पाने की असीम तड़प में इनके ख़रीदे गए सिफारिश पत्रों में तो “असत्य” के देवता की स्तुति लिखी है । वैसे तो विजय माल्या की “सहेली “ राजकुमारी और उनके पंजाबी पति भी तो बीड़ी संघों, कृषि उपज मंडी से लेकर कृषि भूमि तक असत्य को ही पूजते आए हैं । वैसे इनका पद्मश्री का बुख़ार उतरा नहीं है बल्कि और चढ़ रहा है । मुर्ग़े के कथन से यह भी प्रश्न उठता है की वे कौन से व्यापारिक संगठन थे जिन्होंने इनके इस ट्रैप काण्ड का हवाला देकर इन्हें पद से उतरने को कहा? वैसे इस मुर्गे की मां भी कब तक खैर मनाएगी! घूसखोर अफ़सर के वफ़ादार “बाबू रसिया “ जैसे कई जहरीले साँप अभी भी सागर के भ्रष्टाचारी भविष्य निधि संगठन में सक्रिय हैं । इसलिए अब यह देखना है की इस मुर्ग़े का दिल्ली स्टाइल पंजाबी बटर चिकन बनता है, या मराठी इस्टाइल चिकन कोलीवाड़ा, या हरियाणवी इस्टाइल मुर्गा या फिर सागर का ढाबा इस्टाइल देसी चिकन क्योंकि EOW या पुलिस या शासन-प्रशासन अपनी “यूज़ एंड थ्रो “ पालिसी के तहत वाक़ई शिकायतकर्ताओं को सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं बख्शते।
3. कागज़ों में उलझी कांग्रेस की ‘लीज’, क्या भोपाल दिलाएगा नया आशियाना?
शहर कांग्रेस के अध्यक्ष जी इन दिनों माथे पर हाथ धरे घूम रहे हैं। वजह यह है कि चालू महीने की शुरुआत में ही नगर निगम और जिला रजिस्ट्रार की संयुक्त टोली ने कांग्रेस के तीन-मंजिला दफ़्तर को फीते से नाप डाला। 30 साल पुरानी लीज का आफ़ताब ढल चुका है, और रिन्युअल की फाइल पर नगर निगम के बाबुओं की दस्तखत की स्याही सूख चुकी है। फाइल को धूल की परतों से निकालकर सीधे रजिस्ट्री दफ़्तर इसलिए भेजा गया है ताकि ज़मीन की बाज़ारू कीमत और स्टाम्प ड्यूटी का गणित लगाया जा सके। लेकिन भीतर खाने की ख़बर यह है कि नाप-जोख तो महज़ एक छलावा है! लीज का रिन्युअल अब कागज़ों से नहीं, बल्कि सत्ता के रुख से तय होगा। शहर के सियासी पंडितों का कहना है कि दफ़्तर की लीज की किस्मत का ताला अब तभी खुलेगा जब या तो नगर निगम में कांग्रेस का महापौर बैठेगा, या फिर भोपाल के वल्लभ भवन पर पंजे का जमाना आ जाएगा!
4 . सूखे नशे का ‘गीला’ कारोबार और सोती रही हमारी चतुर पुलिस!
शहर में जब-जब सूखे नशे का काला खेल चरम पर पहुंचता है, सागर पुलिस और उसकी तथाकथित ‘तीसरी आंख’ (गुप्तचर तंत्र) को मोतियाबिंद हो जाता है। ताजा मामला भोपाल एसटीएफ का है, जिसने शहर के कोतवाली और मोतीनगर इलाके से दो होनहारों को भोपाल में नशीले कफ़ सीरप की पैकिंग और कालाबाज़ारी करते धर दबोचा। मज़ेदार बात यह है कि इनमें से एक नशा-सेठ डेढ़ साल पहले भी रीवा पुलिस के हाथों हज़ारों बोतलों के साथ पकड़ा गया था, पर सागर पुलिस के लिए वह तब भी ‘निर्दोष बालक’ था और आज भी है। हद तो तब हो गई जब एसटीएफ ने ‘सुपुत्र’ को दबोचा, तो स्थानीय थाने के कुछ चालू -चंचल टाईप के सिपाही-हवलदार तुरंत हरकत में आए और ‘पिताजी’ से मिलकर ऑब्लाइज़ हो आए। माने वहां से आई एसटीएफ अपना काम कर गई और यहां की पुलिस बगैर नशे के ही बेहोश बनी रही!
5 . भूगोल के ‘मास्टर जी’ का वीकली शटल और रात वाली ‘अकादमिक’ क्लास!
डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के ‘पृथ्वी विज्ञान’ विभाग के एचओडी साहब ने गुरु-शिष्य परंपरा का ऐसा नया पाठ पढ़ाया है कि पूरे कैंपस में हलचल मची है। छह महिला शोधार्थियों सहित करीब डेढ़ दर्जन छात्रों ने साहब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एक छात्रा तो डीन और रजिस्ट्रार के सामने अपनी व्यथा सुनाते-सुनाते रो ही पड़ी आरोप हैं कि साहब रात के सन्नाटे में ‘विशेष अकादमिक फोन कॉल’ करते हैं, अकेले में डिनर और निजी मुलाकातों का दबाव बनाते हैं।सबूत के तौर पर कथित ऑडियो और चैट की कॉपियां भी आला अफसरों की मेज पर धरी जा चुकी हैं। पर खेल सिर्फ यहीं खत्म नहीं होता! साहब की ‘हाजिरी’ का अपना अलग ही भूगोल है। बिना किसी छुट्टी के, हर हफ्ते गुरुवार को जबलपुर-जयपुर एक्सप्रेस में उनकी बर्थ कन्फर्म रहती है। गुरुवार को गायब और सोमवार दोपहर सीधे विभाग में हाजिरी! अब विश्वविद्यालय प्रशासन सोच में है कि यह विभाग चल रहा है या फिर जयपुर-सागर के बीच कोई प्राइवेट ‘वीकली शटल’?
सागरवाणी…..9425172417



