गेहूं घोटाला: ‘मिट्टी कांड’ में निलंबन का ‘पुरस्कार’, बहाल होकर मनचाही पोस्टिंग ले गए सहायक आपूर्ति अधिकारी !
45 दिन में खात्मा: फूड कंट्रोलर सिर्फ अटैच, प्रभारी एएसओ सस्पेंड के बाद बहाल; बड़ा सवाल आखिर गेहूं की जगह मिट्टी भरने वाला कौन

सागर। विगत 12 जून को सागर के श्री देव प्रभाकर वेयरहाउस में सरकारी खरीद के गेहूं की जगह मिट्टी की बोरियां जमा किए जाने का चर्चित फर्जीवाड़ा को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है। क्योंकि मामले में गाज गिरने के महज 45 दिन बाद, सस्पेंड किए गए तत्कालीन प्रभारी सहायक आपूर्ति अधिकारी निशांत पांडे को राज्य शासन ने न केवल बहाल कर दिया है, बल्कि उन्हें उनके गृहनगर मुरैना के ठीक पास भिंड जिले में पदस्थापना देकर ‘पुरस्कृत’ भी कर दिया है।आयुक्त, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय मध्य प्रदेश भोपाल द्वारा 23 जुलाई 2026 को जारी आदेश के तहत सागर कलेक्टर द्वारा 12 जून को जारी निलंबन आदेश को निरस्त करते हुए निशांत पांडे को बहाल कर भिंड जिले में पदस्थ किया गया है।
खाद्य विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म
राज्य शासन के इस अप्रत्याशित निर्णय से जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति शाखा में चर्चाओं का बाजार गरमा गया है। दबी जुबान में हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि गेहूं घोटाले में आखिर असली दोषी कौन था? जब वेयरहाउस में गेहूं की जगह बोरियों में मिट्टी भरी पाई गई थी, तब हड़कंप मचा था और विभागीय मंत्री व जिला प्रशासन ने दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन जमीनी हकीकत यह निकली कि तत्कालीन फूड कंट्रोलर ज्योतिसिंह बघेल के खिलाफ केवल इतनी ‘कार्रवाई’ हुई कि उन्हें भोपाल मुख्यालय अटैच कर दिया गया। वहीं, निलंबित किए गए जेएसओ निशांत पांडे भी डेढ़ महीने के भीतर मनचाही जगह पोस्टिंग पा गए।
कार्रवाई का ‘दिखावा’ और लीपापोती के सवाल
श्री देव प्रभाकर वेयरहाउस में गड़बड़ी पकड़ी गई थी, तब मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने चेतावनी दी थी कि “किसानों के हक पर डाका डालने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।” तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर समिति प्रबंधक, अध्यक्ष और संचालकों पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। लेकिन बड़ा प्रशासनिक सवाल यह उठता है कि क्या केवल निचले स्तर के कर्मचारियों या स्व-सहायता समूहों पर मामला दर्ज कराकर बड़े- मंझोले प्रशासनिक अफसरों को बचा लिया गया? यदि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों (फूड कंट्रोलर एवं जेएसओ) की कोई संलिप्तता या लापरवाही नहीं थी, तो शुरुआत में आनन-फानन में निलंबन और अटैचमेंट का क्यों रचा गया? और यदि लापरवाही थी, तो महज 45 दिनों में बिना किसी सार्वजनिक जांच रिपोर्ट के बहाली और मनपसंद जिले में तबादला किस ‘इनाम’ का क्या अर्थ निकाला जाए?
9425172417…..27/07/2026



