
1.साहब बहादुर का विदाई या ……नाराजगी समारोह
सागर। सबमें बड़े अफसर ट्रांसफर पा गए। एक दिन पहले दीपाली होटल में ग्रांड विदाई पार्टी रखी गई। लेकिन साहब बहादुर को दूर- दूर तक ये उम्मीद नहीं थी कि उनके लेविल के तो ठीक दो- एक पायदान नीचे के अफसर इस पार्टी से दूरी बना लेंगे। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्दीधारियों के कप्तान तक पार्टी में नहीं पहुंचे। यही हाल इन सब में बड़े अफसर के इमिडेट बॉस का भी रहा। जिला उपभोक्ता फोरम के सामने स्थित उनके ऑफिस के भी दो- एक डिप्टी कलेक्टर रैंक समेत आईएएस भी नहीं पहुंचे। बताया जा रहा है कि राजस्व प्रकरणों संबंधी फाइलों को अपनी ही टेबुल पर जड़ कर देना इसकी वजह रही। इस ” विदाई कम नाराजगी जताओ” पार्टी का हाल इतने से समझा जा सकता है कि सब में बड़े साहब 8-9 बजे से सूट-बूट लगाकर ट्रकों खाली होते बंगले में बैठे रहे लेकिन गेस्ट हैं कि आ ही नहीं रहे थे। आखिर में रात 10 बजे साहब बहादुर नमूदार हुए और थोड़ा सा रंग पकड़ने के बाद इस पार्टी का दी एंड हो गया।
2. उन्होंने तंदूर गरम देख एक पराठा सेंक लिया था, लेकिन…
डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि की पिछले दिनों दिनों ईसी (कार्य-परिषद) की बैठक हुई। जिसमें तंदूर गरम देख मैंने भी एक पराठा सेंक लिया… की तर्ज पर प्रभारी कुलपति से लेकर एचओडी तक ने बेटे से लेकर चेले तक के संविदा टीचर के पद पर सिलेक्शन करा लिए। एक का दांव घला तो उन्होंने बीबी की पगार बढ़वा ली। विवि के सीक्रेट एजेन्ट्स का कहना है कि ईसी के अधिकांश ऐजेंडा मेला फाइड थे और हितग्राही मेम्बरान इसके लिए सधे-बधे थे इसलिए कोई कुछ नहीं बोला। लेकिन…. लेकिन कागज तो बोलते हैं। दरअसल एक सीनियर मोस्ट प्रोफसर ने तंदूर गर्म देख…. की तर्ज पर अपने ओल्ड पट्ठे का सिलेक्शन MBA में एडहॉक के लिए करा लिया था लेकिन जब पट्ठे की Phd देखी तो वह मैथामेटिक्स की निकली। बस यहीं “गणित” बिगड़ गया। ताजी इन्फार्मेशन ये है कि बुर्जुगियत की दहलीज पर कदम रख रहे गणित वाले पट्ठे को अब तक जुआइनिंग लेटर नहीं मिला है।
3.एलिज़ाबेथ को फिर पदम पुरस्कार मांगता !
इस साल के पद्म पुरस्कारों के आवेदन लिए ऑनलाइन आवेदन राष्ट्रीय पोर्टल पर शुरू हो चुके हैं 31 जुलाई,2026 तक रजिस्ट्रेशन और अनुशंसाएं दी जा सकती हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि सरकार पद्म पुरस्कारों को “जनता का पद्म” बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय पोर्टल ओपन कर सरकार ने इस प्रक्रिया को एक तरह से जनता के सर्वे आधारित “टेलैंट हंट” बना दिया है। सरकार ने नागरिकों से कहा है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी अनुशंसाएं भेजें ताकि पद्म पुरस्कारों के लिए वास्तविक प्रतिभाशाली लोगों की मिलजुलकर तलाश की जा सके।
लाठी घुमाने वाले भगवानदास रायकवार बने पद्मश्री, रसूखदारों के ‘वार रूम’ फेल!
सागर और बुंदेलखंड से इस बार पिछले साल से ज्यादा उम्मीदवार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। पिछले साल अपने अर्दली के बेटे से पद्म पुरस्कार की रेस में पराजित होने वाली उम्रदराज आत्ममुग्ध लोकल ऐलिजाबेथ इस बार भी पद्म का मोह संवरण नहीं कर पा रहीं। जीवन भर कांग्रेसियों और वामपंथियों का पोषण करने वाली एलिजाबेथ को उम्र के दिसंबर में भाजपा से उम्मीद है। जबकि जीवन भर ये क्वीन उनके खिलाफ थैलियों के मुंह खोले रहीं। जान लें कि पच्चीसेक साल पहले मुंबई को अपना नया ठिकाना बना चुकीं ये सेठानी पद्म की चाहत में सागर लौटी थीं। इस अवार्ड पर दावा ठोकने वे अपनी इंपोर्टेड शहजादी के साथ नमूदार हुई थीं। अवार्ड की लॉबिंग के लिए शहजादी भी तन-मन-धन से जुट गईं। “जहां जैसा दस्तूर वहां वैसी न्यौछावर” की नीति से ढेर सारे नेताओं से सिफारिशी खत दिखाए गए। कोई कमी नहीं रहे इसलिए अपने मुलुक की नेत्री और हम व्यवसायी नेताओं से पोर्टल पर सिफारिशी नामांकन भी कराए। क्वीन और उनकी इंपोर्टेड शहजादी ने लाबिंग के लिए दिल्ली नागपुर पार्लामेंट और नार्थ- साऊथ ब्लाक सब एक कर दिए थे। नेता नेत्रियों के साथ “किंग ऑफ़ गुड टाइम्स “ जैसों के “समाज “ लॉबीइंग “सेवा “ भी प्रदान की थी लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की टीम ओरिजनल और आर्टिफिशियल का भेद अच्छी तरह जानती है, सो कोठियों की चमक-दमक को खारिज करते हुए अखाड़े की मिट्टी में पसीना बहाने वाले बुंदेली मार्शल आर्ट के ध्वजवाहक भगवान दास रैंकवार के रूप में वास्तविक प्रतिभा को ढूंढ़ लिया गया। लगा कि सेठानी की “पर्चेज्ड” रिकमेंडेशने रद्दी का टुकड़ा बन कर रह गईं हैं। लेकिन सूत्र बताते हैं कि उनकी इंपोर्टेड शहजादी उन्हीं पुरानी सिफारिशी चिट्ठियों में कुछ और नई जोड़कर एक बार फिर पद्म की तलाश में निकल पड़ी हैं। इस बार उन मढ़ियों पर भी मत्था टेका जा रहा है जहां के दरवाजे पिछली दफा बंद मिले थे। बताते हैं कि अपने मुलुक की सागरवासी नेत्री ने देश- प्रदेश के पॉलिटिकल सूरमाओं से विनती की है कि इन्हें इस बार कुछ न कुछ अवार्ड तो दिला ही दें। चर्चा है कि बीड़ी के धुएं में पद्म सम्मान की तलाश के पीछे शहजादी की राजनैतिक मंशा है जिसे फिलवक्त उजागर नहीं किया जा रहा है।
4. जेल में जर्दा और कार्रवाई पर पर्दा !
केंद्रीय जेल सागर में पिछले दिनों हत्या के सजायाफ्ता बंदी की मां ने जेल प्रबंधन पर बेटे से मिलने की एवज में अवैध वसूली करने के आरोप लगाए थे। जवाब में जेल अधीक्षक मानवेंद्र सिंह परिहार ने स्पेशल डीजी (जेल) को सफाई दी कि उक्त बंदी जर्दे का सेवन करता मिला था इसलिए जेल मैन्युअल के अनुसार बंदी की मेल- मुलाकात एक माह के लिए प्रतिबंधित की गई हैं। सवाल ये है कि बंदी को तो दंडित कर दिया लेकिन जेल में जर्दा कौन लेकर आया था ? उसके लिए कौन सा स्टाफ जिम्मेदार है ?… इसकी जांच क्यों नहीं कराई। अगर कराई थी तो फिर संबंधित पर कार्रवाई को लेकर पर्देदारी क्यों बरती जा रही है।
5. कांग्रेस : बंगला-बगीचा मुक्त ! फिर किस का लिहाज
जिला एवं शहर कांग्रेस के मुख्य पदों पर पहुंचने के बाद कतिपय कांग्रेसी यही रोना रोते रहे कि जब तक पार्टी बंगला- बगीचा से मुक्त नहीं होगी। संघर्ष में धार नहीं आएगी…. तो सुन लीजिए कि कांग्रेस आखिरी बंगला से मुक्त हो चुकी है ! बीएस जैन फर्म के आखिरी टाइम-टू- टाइम सक्रिय कांग्रेसी, स्वदेश जैन (गुड्डू भैया) कई महीनों से कांग्रेस के शहर तो ठीक देश- प्रदेश तक के कार्यक्रमों में रुचि नहीं ले रहे हैं। वे कई महीनों से ट्रम्प के देश में प्रवास पर हैं। चूंकि अब कांग्रेस लगभग बंगला- बगीचा मुक्त हो गई है तो फिर ये फ्रेश- फ्रेश पदाधिकारी क्यों सत्ता पर हल्ला-बोल से बच रहे हैं। अब उन्हें कौन सी ऊपरी सेटिंग- गेटिंग का डर है या फिर ये मान लें कि खुद ही सत्ताधारियों से सेटिंग-गेटिंग…. जवाब जरूर दीजिएगा।
– नारदवाणी डेस्क…….9425172417



