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एक ने अंचल को बीड़ीभांज बनाया तो दूसरे ने शिक्षा के नाम पर कॉन्क्रीट का जंगल खड़ा किया… अब दोनों को चाहिए पद्म सम्मान !

पद्म सम्मानों के लिए सागर में हो रही रोचक प्रतिस्पर्धा

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सागर। राष्ट्रीय पद्म सम्मानों के लिए केंद्र सरकार का राष्ट्रीय सम्मान पोर्टल आज बंद हो जाएगा। इस बार ओपन पोर्टल सिस्टम का प्रचार प्रसार होने से सागर और बुंदेलखंड से पद्मश्री, पद्मभूषण आदि के लिए आवेदकों में होड़ लगी है। सागर में भी पद्म सम्मानों के इच्छुक अभ्यर्थी गणों के बीच प्रतिस्पर्धा ने रोचक रूप ले लिया है जिसकी चर्चा आमजनों में भी होने लगी है। उल्लेखनीय है कि सागर में 90 के दशक में सागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मीनारायण दुबे ने पहली बार पद्म श्री हासिल करके राष्ट्रीय सम्मान अर्जित करने में सफलता प्राप्त की थी। इसके लगभग 35 साल बाद राई लोककला के गरिमापूर्ण कला पक्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए मृदंग वादक  रामसहाय पांडे को पद्म श्री की उपाधि से विभूषित किया गया था। श्री पांडेय का विगत दिनों निधन हो जाने से सागर में अब कोई पद्म पुरस्कार विजेता जीवित नहीं है। लेकिन स्व पांडे को पद्मश्री मिलने के बाद जिस तरह की सम्मान प्रतिष्ठा समाज के सभी वर्गों और मीडिया में मिली उसे देख कर सागर के विभिन्न तबकों की विभूतियों के मन में पद्म सम्मानों की ललक जाग गई है। इस वर्ष के आवेदकों में कुलपति सागर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. नीलिमा गुप्ता से लेकर बीड़ी उद्योगपति डॉ. श्रीमती मीना पिंपलापुरे, प्रतिष्ठित योगाचार्य  विष्णु आर्य, लोक गायक शिवरतन यादव, वरिष्ठ जनसंघ के समय के कुछ कार्यकर्ता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आदि शामिल हैं। मिली जानकारी के अनुसार सागर जिले से ही इस बार लगभग दस लोगों ने स्वयं या प्रस्तावकों की तरफ से राष्ट्रीय सम्मान पोर्टल पर आवेदन किया है। यह संख्या अंतिम तिथि 31 जुलाई से आगे बढ़ भी सकती है। ज्यादातर आवेदक सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों के अनुशंसा पत्र लिखवाने के लिए आतुर हैं जहां से जानकारी मीडिया और आम जनता तक पहुंच रही है। जिससे इस बार पद्म श्री जनचर्चा का विषय बन गया है। लोग आवेदकों की योग्यता और पहुंच पर चटखारे लेकर चर्चा कर रहे हैं। सागर में पद्म पुरस्कार के लिए प्रमुख रूप से दो अभ्यर्थियों को लेकर जनता में चर्चाएं हैं जिसने इस होड़ को योग बनाम रोग का रूप दे दिया है। योगाचार्य विष्णु आर्य सबसे सशक्त दावेदार हैं जो लगभग छह दशकों से जनता को निःशुल्क योगासन प्राणायाम सिखा रहे हैं। 85 साल की आयु में भी विष्णु आर्य ने योग प्रशिक्षण का कार्य नहीं छोड़ा है बल्कि अपने कार्य को योग निकेतन के नाम से प्रशिक्षण केंद्र खोल कर अपनी सेवा को संस्थागत रूप दे दिया है। श्री आर्य का जीवन जनसंघ, भाजपा और सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार में बीता है और आपातकाल जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी वे कांग्रेस सरकार के दमन से इसलिए सुरक्षित रह सके क्योंकि पूर्व मंत्री स्व विट्ठल भाई पटेल और पूर्व सांसद स्व डालचंद जैसे सभी तत्कालीन प्रभावशाली कांग्रेस नेता अपनी विपरीत विचार धारा वाले योग गुरु  विष्णु आर्य से योग की शिक्षा ले रहे थे। रोचक तथ्य यह है कि आज जब योगाचार्य विष्णु आर्य अपने जीवन भर की सेवाओं के लिए सरकार से पद्म सम्मान के रूप में मान्यता की मांग कर रहे हैं तब उनके सामने वे बीड़ी उद्योग पति श्रीमती मीना पिंपलापुरे प्रतिद्वंद्वी बन कर सामने हैं जिन्हें योग का प्रशिक्षण स्वयं योगाचार्य विष्णु आर्य ने ही दिया है। एक तरह से आयु में कुछ वर्ष अधिक होने के बाद भी श्रीमती पिंपलापुरे योग के क्षेत्र में योगाचार्य की शिष्या हैं। योगाचार्य आर्य को पद्म पुरस्कार के लिए लगभग सभी बड़े जनप्रतिनिधियों, विधायकों ने अनुशंसा पत्र दिए हैं।

यहां बीड़ी उद्योग पति डॉ.श्रीमती मीना पिंपलापुरे की उपलब्धियों की बात करें तो उनकी मुख्य उपलब्धि बीड़ी उद्योग पति होना है। वे मध्यप्रदेश बीड़ी उद्योग संघ की अधिकृत अध्यक्ष होने के नाते बीड़ी उद्योगपतियों के हितों की रक्षा और बीड़ी कारोबार के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। सभी जानते हैं कि बीड़ी और तंबाकू का कारोबार कैंसर के प्रमुख कारणों में है तभी तो सरकार इन उत्पादों पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने की घोषणा लिखवाती है। ऐसे में आम नागरिकों का तर्क है कि आज यदि बीड़ी उद्योग पति को सरकार पद्म सम्मान की मान्यता दे देती है तो कल को शराब कारोबारी भी पद्म सम्मानों की मांग कलने लगेंगे। वैसे डॉ. श्रीमती मीना पिंपलापुरे ने महिलाओं के उत्थान के संबंध में जितने भी काम किये हैं वे बीड़ी उद्योगपतियों की चैरिटी के अंतर्गत करना आवश्यक होता है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अनेक स्थानीय नेताओं ने डॉ. पिंपलापुरे को अपने अनुशंसा पत्र दिए हैं। बताते हैं कि एक महिला जनप्रतिनिधि ने क्षेत्र वाद के आधार पर डा पिंपलापुरे का नाम प्रस्तावित भी किया है। डॉ. पिंपलापुरे और योगाचार्य दोनों ने ही समाज सेवा के संवर्ग में अपने आवेदन किए हैं। डॉ. हरी सिंह गौर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. नीलिमा गुप्ता ने भी पद्म सम्मान की अपेक्षा सरकार से की है। उनके आवेदन की संस्तुति केबिनेट मंत्री  गोविंदसिंह राजपूत ने की है। जन सामान्य से चर्चाओं में कुछ ऐसे नाम भी आए जिन्होंने अपनी पात्रता के बाद भी आवेदन उजागर नहीं किए हैं। इनमें प्रतिष्ठित साहित्यकार सेवा निवृत्त प्रोफेसर डॉ. सुरेश आचार्य, साहित्यकार डॉ. सुश्री शरद सिंह, शुद्ध समाजवादी विचारधारा के बचे हुए स्तंभ नेता रघु ठाकुर, उन्नत कृषक आकाश चौरसिया, कला एवं सास्कृतिक संस्था के माध्यम से सेवा करने वाले उमाकांत मिश्रा, वरिष्ठ चिकित्सक डा. जीएस चौबे, सीता राम रसोई के संचालक इंजिनियर प्रकाश चौबे,  सहित लगभग दस बड़े ऐसे नाम आम जनता से चर्चा में आए जिन्हें पद्म सम्मान मिलना चाहिए।

31/07/2025

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