कर्रापुर शराब दुकान नीलामी: सिर्फ 1 रुपये ने छीना सोम कंपनी से करोड़ों का कारोबार
रेलवे स्टेशन दुकान पर जंडेलसिंह एंड कंपनी का कब्जा

सागर। जिला आबकारी शाखा के गलियारों में पिछले 20 दिनों से चल रही दुकान नीलामी की माथापच्ची खत्म हो गई है। लेकिन इन शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया का अंतिम चरण किसी ‘थ्रिलर फिल्म’ से कम नहीं रहा, जहाँ भाग्य और रणनीति के मेल ने पुराने समीकरणों को ध्वस्त कर दिया। सबसे बड़ा उलटफेर कर्रापुर की प्रतिष्ठित शराब दुकान में देखने को मिला, जहां महज एक रुपए के अंतर से करोड़ों रुपए की बाजी पलट गई।
नीलामी में ‘एक रुपये’ का गजब ट्विस्ट
कर्रापुर शराब दुकान, जिसकी सरकारी आरक्षित कीमत 10 करोड़ रुपये तय थी, नीलामी के अंतिम दौर में चर्चा का केंद्र बनी रही। इस दुकान के लिए सोम कंपनी ने क्लोज बिड सिस्टम के तहत 4,06,99,999 रुपये की बोली लगाकर अपनी दावेदारी मजबूत की थी। शहर के दिग्गज ठेकेदार कुलदीप सिंह राठौर एंड कंपनी पहले ही 1.99 करोड़ पर अपनी बोली रोक चुके थे, जिससे यह माना जा रहा था कि सोम कंपनी आसानी से यह मैदान मार लेगी।
लेकिन जैसे ही कम्प्यूटर पर दूसरी क्लोज बिड को ओपन किया गया तो दूसरे ठेकेदार सौरभ आठिया की बोली 4,07,00,000 रुपये निकली। तकनीकी रूप से सोम कंपनी की तुलना में यह बोली मात्र एक रुपया अधिक थी। इसी मामूली अंतर ने सोम कंपनी के हाथों से करोड़ों का कारोबार छीन लिया और आठिया कर्रापुर के नए ठेकेदार बन गए।
रेलवे स्टेशन दुकान पर जंडेल सिंह काबिज
उलटफेर का सिलसिला यहीं नहीं रुका। रेलवे स्टेशन के सामने स्थित गुजराती बाजार की कंपोजिट शराब दुकान, जो लंबे समय से कुलदीप सिंह राठौर के प्रभाव में मानी जा रही थी, उनके हाथ से फिसल गई। जंडेल सिंह गुर्जर एंड कंपनी ने रणनीतिक बढ़त बनाते हुए 10.35 करोड़ की आरक्षित कीमत वाली दुकान के लिए 4.78 करोड़ रुपये (आर.पी. का लगभग 46%) की बोली लगाई। सरकार द्वारा इस अंतिम चरण में आरक्षित मूल्य में दी गई छूट का जंडेल सिंह ने भरपूर लाभ उठाया और शहर की इस प्राइम लोकेशन वाली दुकान पर कब्जा जमा लिया। इसके अलावा, जमुनिया (बंडा) का ठेका भी जंडेल सिंह के खाते में गया, जबकि मधुकरशाह वार्ड शर्मा एंड एसोसिएट्स और गढ़ाकोटा-1 ओमप्रकाश प्रजापति के नाम रही।
हाईकोर्ट से ‘सोम’ को मिली संजीवनी
एक तरफ जहाँ नीलामी में सोम कंपनी को एक रुपये की मात मिली, वहीं दूसरी तरफ जबलपुर हाईकोर्ट (WA 942/2026) से उन्हें बड़ी राहत मिली है। 15 अप्रैल 2026 को सुनाए गए फैसले में अदालत ने कंपनी के भविष्य के लिए रास्ते खोल दिए हैं।
1. रिन्यूअल की नई उम्मीद
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि विवादित लाइसेंस की अवधि 31 मार्च 2026 को ही समाप्त हो चुकी है, इसलिए निलंबन के पुराने मुद्दों का अब महत्व नहीं रह गया है। कोर्ट ने आबकारी कमिश्नर को निर्देशित किया है कि वे सोम कंपनी के नए लाइसेंस और रिन्यूअल के आवेदनों पर पुराने विवादों से प्रभावित हुए बिना, स्वतंत्र रूप से गुण-दोष के आधार पर विचार करें। यह कंपनी के लिए फिर से बाजार में लौटने का एक सुनहरा अवसर है।
2. 122 करोड़ के स्टॉक का संकट टला
कंपनी के पास वर्तमान में लगभग 122 करोड़ रुपये की शराब का स्टॉक जाम पड़ा था, जिससे सरकार को 79 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस स्टॉक को डिस्टिलरी ऑफिसर की देखरेख में 30 दिनों के भीतर अन्य लाइसेंसियों को ट्रांसफर किया जाए या सरकार स्वयं इसे अधिग्रहित करे। इस फैसले से कंपनी की फंसी हुई पूंजी बाजार में वापस आने का रास्ता साफ हो गया है।
– सागरवाणी,19 अप्रैल 2026
– 9425172417



