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सागर में बढ़ी डीजल-पेट्रोल की किल्लत ! एक तरफ सरकार दाम बढ़ा रही दूसरे तरफ पंपों पर नहीं मिला फ्यूल

डीलर बोले, बगैर किसी ठोस कारण के पेट्रोलियम कंपनियां रोक रहीं सप्लाई, जिले भर में पेट्रोल-डीजल का संकट गहराया, किसान और आम जनता बेहाल

सागर। एक तरफ केंद्र सरकार लगातार पेट्रोल और डीजल के रेट बढ़ाकर आम जनता की जेब पर बोझ डाल रही है, तो दूसरी तरफ तेल कंपनियां (HPCL, IOCL और BPCL) पंप डीलर्स को निर्बाध सप्लाई देने से लगातार बच रही हैं। कंपनियों की इस मनमानी का सीधा असर अब सागर शहर सहित पूरे जिले में दिखने लगा है। हालत यह हो गई है कि जिले के करीब 70 से 80 फीसदी पेट्रोल पंपों पर हर दूसरे-तीसरे दिन ‘ड्राय’ (ईंधन खत्म) होने की नौबत आ रही है। गनीमत सिर्फ इतनी है कि इस समय शहर समेत पूरे जिले का तापमान दिनभर 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के कारण लोग दोपहर में घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, जिससे फिलहाल ईंधन की खपत सामान्य से थोड़ी कम है। लेकिन जानकारों का मानना है कि जैसे ही पारा नीचे आएगा और आवाजाही बढ़ेगी, पंपों पर हालात और भी ज्यादा बदतर हो जाएंगे।

शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पंप हुए ड्राय

​सागर शहर और ग्रामीण अंचलों में ईंधन की किल्लत इस कदर बढ़ गई है कि वाहन चालकों को एक पंप से दूसरे पंप के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। शहर के मुख्य इलाकों और हाईवे पर स्थित कई प्रमुख पेट्रोल पंप पूरी तरह ड्राय हो चुके हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं। मेसर्स शारदा पेट्रोलियम (बाघराज वार्ड),तिरुपति पेट्रोल पंप (नई गल्ला मंडी),बालाजी पेट्रोल पंप (नई गल्ला मंडी),मकरोनिया चौराहा पर नरसिंहपुर रोड स्थित पेट्रोल पंप, ​ओम साईं राम पेट्रोल पंप (कर्रापुर)।इनके अलावा भी जिले के एक दर्जन से अधिक अन्य पंपों पर स्टॉक पूरी तरह नील हो चुका है। पहले जहां टैंकर्स आने के बाद तीन से चार दिन का स्टॉक रहता था, वहीं अब टैंकर खाली होने के एक ही दिन के भीतर पेट्रोल-डीजल समाप्त हो रहा है। 

खेती-किसानी का काम प्रभावित, बूंद-बूंद डीजल को तरस रहे किसान

​डीजल-पेट्रोल की इस अघोषित कटौती ने सबसे बड़ी मार ग्रामीण अंचलों और किसान वर्ग पर डाली है। इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों और खेतों की जुताई का काम जोरों पर है। ट्रैक्टर, थ्रेशर और सिंचाई के लिए पंपसेट चलाने के लिए किसानों को भारी मात्रा में डीजल की आवश्यकता होती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के पंपों पर ताले लटके होने के कारण किसान कूपन और केन (डिब्बे) लेकर भटकने को मजबूर हैं। ​कई गांवों से आए किसानों का कहना है कि उन्हें जुताई के लिए ट्रैक्टर चलाना है, लेकिन सुबह से लाइन में लगने के बाद भी दोपहर तक ‘नो स्टॉक’ का बोर्ड टांग दिया जाता है। डीजल न मिलने से खेतों की तैयारी पिछड़ रही है, जिससे मानसून आने पर बोवनी प्रभावित होने का खतरा मंडराने लगा है। वहीं, कालाबाजारी करने वाले लोग इस संकट का फायदा उठाकर किसानों को महंगे दामों में डीजल बेच रहे हैं।

दफ्तर जाने वाले और दिहाड़ी मजदूर भी परेशान

​शहरी क्षेत्र की बात करें तो आम नौकरीपेशा, कॉलेज के छात्र और रोजाना मजदूरी के लिए शहर आने वाले लोग इस किल्लत से बुरी तरह प्रभावित हैं। भीषण गर्मी में जब तापमान 45 डिग्री पार है, तब लोग आधा-आधा घंटे पेट्रोल के लिए कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। कई बार अपनी बारी आने से ठीक पहले पेट्रोल खत्म हो जाता है, जिससे लोगों का गुस्सा फूट रहा है।

अधिकारियों के पास ठोस जवाब नहीं, e-KYC और एडवांस पेमेंट का बहाना

​इस गंभीर संकट को लेकर जब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जिम्मेदारों से बात की गई, तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। हालांकि, जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दबी जुबान में बताया कि पेट्रोलियम कंपनियां इन दिनों अपने-अपने डीलर्स की ई-केवायसी की प्रक्रिया करा रही हैं, जिसकी वजह से सप्लाई चेन बाधित हुई है। इसके साथ ही एक बड़ी वजह कई डीलर्स के एडवांस पेमेंट की समस्या भी बताई जा रही है। पहले जहां बिना एडवांस के भी तेल मिल जाता था, वहीं अब एडवांस जमा होने के बाद भी कंपनियां समय पर सप्लाई नहीं भेज रही हैं, जिससे संकट लगातार गहराता जा रहा है।

कलेक्टर ईंधन की बिक्री की सीमा तय करें

​यदि समय रहते प्रशासन ने इस किल्लत पर काबू नहीं पाया, तो आने वाले दिनों में स्थिति विस्फोटक हो सकती है। ऐसे में जिला कलेक्टर को एक महत्वपूर्ण सुझाव यह दिया जा सकता है कि वे तुरंत हस्तक्षेप करते हुए बाइक, कार समेत सभी कमर्शियल (व्यावसायिक) वाहनों के लिए डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति प्रतिदिन के हिसाब से सीमित कर दें। वर्तमान में हो यह रहा है कि लोग पैनिक बाइंग कर रहे हैं और जितनी चाहे उतनी मात्रा में ईंधन ले जा रहे हैं। इस वजह से कतार में खड़े अन्य जरूरतमंद उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इसके साथ ही, कृषि कार्य की महत्ता को देखते हुए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के पंपों पर किसानों के लिए डीजल की अलग से व्यवस्था या कोटा तय किया जाना चाहिए, ताकि अन्नदाता को इस संकट के समय परेशान न होना पड़े। यदि प्रशासन प्रति वाहन तेल देने की एक अधिकतम सीमा तय कर दे, तो संकट के इस दौर में सभी उपभोक्ताओं को समान रूप से राहत मिल सकेगी।

खबर का फोटो स्रोत: सोशल मीडिया

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