विवि की ईसी आज: प्रभारी कुलपति प्रो. ठाकुर पर लगे हैं ‘पुत्र मोह’ में धांधली के आरोप

सागर। डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में बुधवार को आयोजित होने जा रही कार्य परिषद की बैठक हंगामेदार होने के आसार हैं। इस बैठक में विधि और प्रबंधन विभाग के कुल 9 संविदा पदों पर हुई नियुक्तियों के लिफाफे खुलने हैं और सफल अभ्यर्थियों के नामों पर मुहर लगनी है। लेकिन, इससे ठीक पहले चयन प्रक्रिया में प्रभारी कुलपति प्रो. वाई.एस. ठाकुर के पुत्र मेघवंत सिंह ठाकुर की उम्मीदवारी और चयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उस पर से इंटरव्यू पैनल में शामिल डीन प्रो. भागवत के कथित डिसेंट नोट की भी विवि के गलियारों में खूब चर्चा है। जानकारों का कहना है ईसी में ये “डिसेंट नोट” ईसी में साइलेंट बम का काम कर सकता है।
आरोप:पुत्र की नियुक्ति में नियम ताक पर रख दिए
शिकायतकर्ता डॉ. अभिषेक सराफ ने सीधे तौर पर बड़े स्तर पर धांधली का आरोप लगाया है। आरोप है कि प्रभारी कुलपति के पुत्र मेघवंत सिंह ठाकुर ने पीएचडी के साथ-साथ गेस्ट फैकल्टी के रूप में कार्य किया और उसी दौरान एक कंसल्टेंसी फर्म भी चलाई। मेघवंत ने कंसल्टेंसी से अपनी आय 12-13 लाख रुपये दर्शाई है, जिसके आधार पर उन्हें अनुबंधात्मक नियुक्ति के लिए योग्य माना गया। डॉ. सराफ का तर्क है कि यदि गेस्ट फैकल्टी की आय 6 लाख और कंसल्टेंसी की आय 13 लाख है, तो कुल आय 19 लाख होनी चाहिए, जबकि आईटीआर के आंकड़े मेल नहीं खा रहे हैं। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज और खुद का पैसा फर्म में जमा कराकर ‘अनुभव’ और ‘योग्यता’ गढ़ी गई है। प्रशासन से मांग की गई है कि इस कंसल्टेंसी का जीएसटी रजिस्ट्रेशन और क्लाइंट पेमेंट विवरण सार्वजनिक किया जाए।
डीन प्रो. भागवत का ‘डिसेंट नोट’ बम !
चर्चा है कि इस पूरे प्रकरण में स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के डीन प्रो. श्री भागवत ने पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त करने की सिफारिश की है। सूत्रों के मुताबिक, प्रो. भागवत ने विवि प्रशासन और शिक्षा मंत्रालय को भेजे गए अपने ‘असहमति( डिसेंट) नोट’ में कहा है कि स्क्रीनिंग कमेटी का गठन एआईसीटीई और यूजीसी के नियमों के विरुद्ध हुआ है। उन्होंने आपत्ति जताई है कि नियमित डीन को शुरुआत में प्रक्रिया से बाहर रखा गया और सोमवार को अचानक आमंत्रित किया गया। प्रो. भागवत ने आरोप लगाया कि पात्रता मानकों में भारी विसंगतियां हैं; कम योग्यता वाले और कुलपति से सीधे संबंध रखने वाले उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया, जबकि अधिक योग्य अभ्यर्थियों को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट रूप से हितों के टकराव की बात कहते हुए प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से दोबारा कराने की मांग की है। हालांकि जब प्रो. भागवत से उनके इस कथित असहमति नोट के बारे में सागरवाणी ने जानकारी ली तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
विवि प्रशासन के आधे-अधूरे जवाब
इस मामले में सागरवाणी ने विवि के पीआरओ से अभ्यर्थी डॉ. सराफ के आरोपों पर कुछ सवाल किए। जिनके उन्होंने आधे-अधूरे जवाब दिए। पीआरओ डॉ. विवेक जायसवाल का कहना है कि स्क्रीनिंग आईटीआर के आधार पर डोफा कार्यालय द्वारा की गई है। यदि दस्तावेज गलत पाए गए तो जिम्मेदारी आवेदक की होगी। वहीं, यह नियुक्ति भी माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। दूसरी ओर, प्रभारी कुलपति प्रो. ठाकुर से उनके पुत्र पर लगे आरोपों के संबंध में पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
24/03/2026/ Mob: 9425172417


