शराब दुकानों की नीलामी में ‘सब्जी मंडी’ जैसे हालात, 10 करोड़ की दुकान के लिए लगी 2 करोड़ रु. की बोली !

सागर। जिले में शराब दुकानों की नीलामी का दसवां और अंतिम चरण बेहद नाटकीय रहा। सरकार द्वारा न्यूनतम बोली लगाने की छूट मिलते ही ठेकेदारों ने दुकानों की कीमतों को अर्श से फर्श पर ला दिया। आलम यह था कि नीलामी प्रक्रिया किसी व्यावसायिक होड़ के बजाय सब्जी मंडी जैसी नजर आई, जहाँ करोड़ों की दुकानों के लिए कौड़ियों के दाम लगाए गए।
आरक्षित मूल्य से 40% तक कम मिली बोलियां
प्रशासन ने जिले की 14 शराब दुकानों के लिए करीब 150 करोड़ रु.का आरक्षित मूल्य तय किया था। लेकिन जब ऑनलाइन बोलियाँ खुलीं, तो सरकार के खाते में केवल 100 करोड़ रु. ही आते दिख रहे हैं। यानी दुकानों की कीमत आरक्षित मूल्य से 35-40 प्रतिशत तक कम लगाई गई है।सबसे चौंकाने वाला मामला कर्रापुर दुकान का रहा, जिसकी आरक्षित कीमत 10.35 करोड़ रु.थी, लेकिन ठेकेदारों ने इसकी बोली महज 1.99 करोड़ रु. लगाई। इसी तरह रेलवे स्टेशन के सामने स्थित प्राइम लोकेशन गुजराती बाजार की दुकान के लिए भी 10.35 करोड़ रु. के मुकाबले सिर्फ 4.55 करोड़ रु. की ही अंतिम बोली आई।
क्यों गिरे दाम? ठेकेदारों ने उठाए सवाल
ठेकेदारों का मानना है कि यह स्थिति आबकारी विभाग की अदूरदर्शिता के कारण बनी है। उनका कहना है कि मुनाफे वाले समूहों को तोड़कर पसंदीदा दुकानें पहले ही नीलाम कर दी गईं। ग्रुप टूटने के बाद कम बिक्री वाली दुकानों में किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। कीमतों का निर्धारण व्यावहारिक व्यावसायिक सोच के बजाय मनमाने ढंग से किया गया।
अब क्या करेगी सरकार?
फिलहाल आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले पर चुप्पी साध ली है। कम बोली वाले प्रस्तावों का ब्यौरा आबकारी आयुक्त और वाणिज्यिक कर विभाग को भेज दिया गया है। अब शासन को यह तय करना है कि क्या इन कम दरों पर दुकानों का आवंटन किया जाए, या फिर आबकारी विभाग खुद इनका संचालन कर दोबारा नीलामी आयोजित करे।
01/04/2026 …….9425172417



