
सागर। प्रयागराज महाकुंभ 2025 की भीड़ में रुद्राक्ष की माला बेचती एक साधारण सी किशोरी जब सोशल मीडिया पर ‘वायरल’ हुई। तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह कहानी रील से निकलकर विवादों की रीयल लाइफ हेडलाइन बन जाएगी। हालिया रिलीज फिल्म ‘द केरला स्टोरी-2’ में भी ठीक ऐसा ही एक पात्र दिखाया गया है। जो एक राजस्थानी किशोरी है और सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता के चलते एक हिंदू नाम वाले मुस्लिम युवक के झांसे में आकर घर से भाग जाती है। फिल्म में उस किरदार का अंत बेहद दर्दनाक दिखाया गया है। जो आज की कड़वी सच्चाई को बयां करता है। अभी एक साल पहले ही सागर(मप्र) के रहली तहसील स्थित एक ईसाई मिशनरी आदिवासी हॉस्टल से जबलपुर की लड़की सुनीता ( परिवर्तित नाम) लापता हुई थी। जिसे बाद में पुलिस ने केरल में एक ईसाई युवक के साथ बरामद किया। वर्तमान में केरल राज्य हिंदू समुदाय की लड़कियों को मुस्लिम और ईसाई युवकों से विवाह के लिए एक ‘शेल्टर स्टेट’ (शरण स्थली) के रूप में उभर रहा है। यह पैटर्न अब समाज के लिए एक गहरी चिंता का विषय बन चुका है।
इसी पृष्ठभूमि के बीच महाकुंभ की ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा की कहानी ने एक नया मोड़ ले लिया है। कल तक जो लड़की अपनी सादगी और संघर्ष के लिए सहानुभूति बटोर रही थी। आज वह अपने धर्म परिवर्तन और फरमान नामक युवक से निकाह को लेकर चर्चा के केंद्र में है। मोनालिसा की इस शादी को लेकर ‘लव जिहाद’ से लेकर ‘द केरला स्टोरी-3’ तक के कयास लगाए जा रहे हैं। मामला इतना बढ़ गया कि इस जोड़े को सार्वजनिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी सफाई पेश करनी पड़ी। मोनालिसा का कहना है कि उनके घरवाले उनकी शादी बुआ के लड़के से करना चाहते थे। लेकिन उन्होंने अपनी मर्जी से फरमान को चुना। जिससे उनके पिता इस कदर खफा हुए कि वह शादी में शामिल तक नहीं हुए।
विवाद केवल मायके तक सीमित नहीं है। फरमान के पिता चौधरी जाफर अली ने भी इस रिश्ते पर सख्त आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह शादी उनकी मर्जी के बिना हुई है। और वह फरमान को अपने घर में कदम नहीं रखने देंगे। एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल के हवाले से मोनालिसा के ताऊ ने बताया कि उनका सपना कभी उसे वायरल करना नहीं था। उन्हें तो फिल्म निर्माताओं ने सुनहरे सपने दिखाए थे। छह महीने तक एक्टिंग और पढ़ाई का लालच देकर उसे बुलाया गया। लेकिन अंत में बजट न होने का बहाना बनाकर फिल्म ही रोक दी गई। परिवार का आरोप है कि इसी दौरान ‘अज्ञात’ नंबरों से फोन आने का सिलसिला शुरू हुआ। जिसने मोनालिसा की राह बदल दी।
मोनालिसा जिस घुमंतू समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। उसका इतिहास सदियों पुराना और बेहद दिलचस्प है। इस समुदाय का संबंध उस वैश्विक ‘रोमा’ या ‘जिप्सी’ समाज से जोड़ा जाता है। जिसकी जड़ें भारत के राजस्थान और पंजाब क्षेत्र में मानी जाती हैं। इतिहासकार बताते हैं कि 10वीं से 12वीं शताब्दी के बीच ये समूह बेहतर आजीविका और व्यापार की तलाश में पश्चिम की ओर निकल गए थे। आज यूरोप और अमेरिका तक फैले रोमा लोगों की भाषा में संस्कृत और राजस्थानी के शब्द साफ सुनाई देते हैं।
भारत के बंजारा, नट और कालबेलिया जैसे समुदायों की तरह ही इनका जीवन भी घुमंतू रहा है।
विद्वानों का मानना है कि ऐसे घुमंतू समाजों में बाहरी दुनिया के संपर्क में आने पर सामाजिक बदलाव बहुत तेजी से होते हैं। शायद यही लचीलापन मोनालिसा के जीवन में भी दिखा। लेकिन यहां सवाल केवल व्यक्तिगत पसंद का नहीं है। बल्कि उस ‘प्रोपेगेंडा’ का है जो भोली-भाली लड़कियों को सुनहरे भविष्य का झांसा देकर उनके मूल अस्तित्व से दूर ले जाता है। मोनालिसा ने भले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद को ‘कॉन्फिडेंट प्रोफेशनल’ दिखाया हो। लेकिन उनके परिवार की आंखों के आंसू और उनके ससुराल की बंद दहलीज कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।
आज मोनालिसा सुर्खियों में हैं। कभी म्यूजिक वीडियो के लिए तो कभी अपनी विवादित शादी के लिए। मगर समाज के सामने यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है कि क्या ‘वायरल’ होने की कीमत अपनी जड़ों और संस्कृति को त्यागकर चुकानी पड़ेगी? जिस तरह केरल जैसे राज्य इन संदिग्ध रिश्तों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन रहे हैं। वह आने वाले समय में सामाजिक ताने-बाने के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है। ‘द केरला स्टोरी’ जैसी फिल्में शायद इसी हकीकत से रूबरू कराने का एक जरिया हैं। ताकि अगली कोई ‘मोनालिसा’ किसी छलावे का शिकार न बने।
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