चौपाल/चौराहा
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नारदवाणी: क्रिकेट तो ठीक, सटोरियों से भी प्रेम !

सागर। पुलिस के जिले में सम्मे बड़े साहब उर्फ कप्तान सर का क्रिकेट प्रेम जग जाहिर है। साहब खुश रहें इसलिए अधीनस्थ उनके सामने जब मौका मिले क्रिकेट की चर्चा लेकर बैठ जाते हैं। पुलिस में चल रही क्रिकेट और खालिस क्रिकेट का असर यूं है कि पूरा T-20 वर्ल्ड कप खत्म होने को है लेकिन जिले भर में एक भी क्रिकेट सटोरिया पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। पूछता है सागर कि क्रिकेट तो ठीक है, क्या सटोरियों से भी प्रेम है ?
वरिष्ठतम को फिर सम्मान देकर बहलाया !
चार दिन पहले मुख्यमंत्री सागर आए। वे वरिष्ठम विधायक द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक मेले में दौड़ते-भागते आए और उसी स्पीड से लौट गए। आयोजक के समर्थकों को उम्मीद थी कि सीएम कुछ ऐसा बोलेंगे। जिसके तार मंत्रिमंडल विस्तार से जुड़ें। लेकिन सीएम बड़ी होशियारी से वरिष्ठतम की तारीफ कर निकल गए। उनकी ही देखा-देखी डिप्टी सीएम और स्कूली मंत्री ने भी वरिष्ठतम की तारीफ में कसीदे पढ़ दिए। चर्चा है कि सीएम, वरिष्ठतम को इसी स्टाइल में बीते दो साल से बहला रहे हैं। वे नरसिंहपुर और इंदौर के बाद सागर में कोई नया मोर्चा नहीं खोलना चाहते इसलिए कभी वरिष्ठतम को कृषि विभाग की मीटिंग में ससम्मान बुला लेते हैं तो कभी सागर जिले के दूसरे कद्दावर नेता के धार्मिक आयोजन को इग्नोर कर वरिष्ठतम को ओवेलाइज कर देते हैं।
सफाई सुपरवाइजर फिर पड़ा भारी!
बुंदेलखंड मेडिकल के मुखिया दूसरी बार एक सफाई सुपरवाइजर से मात खा गए। चर्चा है कि दशक भर से कॉलेज में जमे इस सुपरवाइजर को दसेक दिन पहले मुखिया ने हटाने की कोशिश की। सफाई ठेकेदार कंपनी ने सुपरवाइजर का टर्मिनेशन लेटर भी ईश्यु कर दिया। लेकिन सुपरवाइजर ने तुरंत मजदूर संघ के पदाधिकारी होने के बाद अफसरों के फोन घनघनाएं। कुछ देर बाद मुखिया के दफ्तर का फोन बजा और सुपरवाइजर की रुखसती ठंडे बस्ते में चली गई। बताते चलें कि सुपरवाइजर की वर्किंग को लेकर मुखिया लंबे समय से नाखुश हैं। कारण क्या है? ये कभी सामने नहीं आया। इतना जरूर है कि पिछले दिनों महाशिवरात्रि के आयोजन से पहले मुखिया और सुपरवाइजर एंड कंपनी आमने-सामने आए थे। जिसमें मुखिया की मात हुई थी।
थाना टीआई नहीं हेड कांस्टेबल चला रहा!
एक पुलिस थाना जिसके अंतर्गत कलेक्टोरेट- जिला न्यायालय वगैरह-वगैरह आते हैं। उसका संचालन आजकल एक हेड कांस्टेबल कर रहा है। पुलिस थानों की वर्किंग को जो समझते हैं वे इस स्थिति को भली-भांति समझ सकते है। कुछ दिन पहले इस थाने में वर्षों से चाय-पानी लाने जैसे काम करने वाले एक युवक की मां को एक उजड्ड युवक ने बुरी तरह से पीटा। युवक को उम्मीद थी कि थाने से न्याय होगा लेकिन हेड कांस्टेबल व अन्य ने टीआई को ऐसा गुरु ज्ञान दिया कि पीटने वाला थाने से ही मुचलका पर निकल गया। जबकि पिटने वाली महिला पर हुए हमले को मेडिकोलीगल के एंगिल से देखें तो हमलावर पर गंभीर धाराओं में कार्रवाई होना थी लेकिन ” मैनेजमेंट” की वजह से थाने के अर्दली को ही इंसाफ नहीं मिला।
गीले हुए बिना सत्ता की हरियाली चाहिए !
10 दिन पहले तीन बत्ती स्थित शहर कांग्रेस कार्यालय के बाहर भाजपा ने राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किया। काउंटर करने कार्यालय के नीचे कांग्रेसी जमा हो गए। पुलिस प्रशासन ने दोनों पक्षों को कंट्रोल करने पानी की बौछारें मारी। भाजपाई-कांग्रेसी,  तर-बतर हो गए। गौर करने वाली बात ये है कि चुनावी टिकट की उत्कंठ इच्छा रखने वाले कांग्रेसी, पानी की बौछारों से दूर बने रहे। उनके सफेद-धवल कुर्ता और बुशर्ट पर एक छींटा भी नहीं घला। देखने वालों का कहना था कि बगैर गीले हुए ये लोग सत्ता की हरियाली का सपना कैसे पाले हैं। बताते चलें कि इन सूखे कांग्रेसियों में वे सब लोग शामिल थे। जो पार्टी के जिला से लेकर प्रदेश के अहम पदों पर रह चुके हैं।
02/03/2026
9425172417

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