
नारदवाणी डेस्क। सागर
वे डॉक्टर बनाने वाले सरकारी संस्थान के प्रमुख हैं। बताते हैं कि उनकी नियुक्ति “संघ” के कोटे से हुई थी। उसी तारतम्य में वे संघ की बैठक, प्रशिक्षण, कार्यक्रम में जाते रहते हैं। वहां जब कभी संबोधन की बात आती है तो उनके मुख से बड़े आदर के साथ आप बंधु, मातृशक्ति, भगिनी…. ही निकलता है। लेकिन जब वे संस्थान में लौटते हैं तो सामने आए स्टाफ के सामने भी इन्हीं रिश्ते-नातों का जिक्र करते हैं लेकिन शब्द बदल जाते हैं। वे बोलते हैं तुम, तुम्हारी, मां, बहिन…! खैर, उनके इस बोल- बर्ताव के अलग- अलग असर सामने आए हैं। करीबियों का कहना है कि मरीज- अटेंडर से जुड़े मामलों में जिम्मेदार के मुंह पर मां- बहिन को याद करना कारगर साबित हुआ है। काम की गुणवत्ता सुधरी है। वैसे भी सामने वालों को इसी तरह के इलाज की जरूरत थी। लेकिन बॉस को यह फार्मूला हर जगह नहीं आजमाना चाहिए। इसका साइड इफेक्ट ये पड़ रहा है कि अच्छा काम करने वाले भी अपनी मां- बहिन …. के डर से समस्या बताने या समाधान बताने से डरने लगे हैं।
बीड़ी कारोबारियों को “धुर” बनाता दिल्ली का ठग !
मप्र में बीड़ी उद्योग को फिर से जिंदा करने की सरकार की मुहिम के बीच दिल्ली का एक लाबिस्ट उद्योगपतियों की चर्चा के केंद्र में है। झूठा श्रेय लेने के लिए एक टांग पर खड़े रहने वाला पंजाबी मूल का यह ठग चरित्र शख्स दावे ट्रंप की तरह करता है, लाबिंग में खुद को एपस्टीन का बाप समझता है और है वस्तुत: ऐसा शातिर ठग जो अमरबेल की तरह बीड़ी उद्योग पतियों के धंधे और धन दोनों हड़प रहा है। बीड़ी उद्योग पतियों से लाबिंग के नाम पर कलेक्शन करने वाले इस शख्स के ज्यादातर दावे झूठे निकलते हैं लेकिन यह अपनी लच्छेदार बातों में राज्यसभा, लोकसभा से लेकर विधानसभा तक के हर दर्जे के नेताओं, नेत्रियों व्यवसायियों और अफसरों को झांसा देने में सफल हो जाता है। इसकी कुछ हरकतों की बानगी देखिए। सागर व प्रदेश के तेंदूपत्ता पर स्थानीय बीड़ी कारोबारियों को रियायत देने का निर्णय कराने में सागर जिले के स्थानीय नेताओं ने राज्यपाल व मुख्यमंत्री से भेंट की। लेकिन उद्योगपतियों के बीच प्रोपेगंडा कर दिल्ली के इस ठग लाबिस्ट ने झंडे अपने गाड़ लिए। इसने दावा किया कि बीड़ी उत्पाद पर जीएसटी 40% रहेगा लेकिन यह दावा झूठा निकला। जब इसने नया पैंतरा फेंका कि मेरी बात सुनकर ही जीएसटी 40% से घटा कर 18% कर दिया। यह शख्स बीड़ी कारोबारियों के बीच दावे करता रहा कि वह बीड़ी पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क घटवाएगा लेकिन इसका ये दावा भी झूठा निकला। जबकि तंबाकू उत्पादक किसान संघों ने अपनी एक्साइज ड्यूटी शून्य कराने में सफलता हासिल कर ली। इस ठग की श्रेय लूटने की आदत आज की नहीं है । कोरोना काल में मध्य प्रदेश में बीड़ी निर्माण को रोज़गार देने हेतु चालू कराने का निर्णय जो कई जन प्रतिनिधियों ने लिया उसका भी श्रेय इसको चाहिए था । सागर के बीड़ी कारोबारियों को चूना लगाने की साजिश, इसका ताजा कारनामा है। जिसमें यह शख्स न्यायालय के आदेश से सागर के बीड़ी कारोबारियों से गलत तरीके से वसूले गए करोड़ों के कृषि उपज मंडी शुल्क को ब्याज सहित वापस दिलाए के आदेश के क्रियान्वयन में मंडी और बैंक से सांठगांठ करके खुद हड़पने की कोशिश में लगा है। हैरत की बात है कि पंजाबी मूल का यह शातिर ठग सागर के महाराष्ट्रीयन बीड़ी वालों को तो पहले से ही अपने मायाजाल में फंसाए बैठा है लेकिन अब गुजराती और जैन भी इसकी ठग विद्या में फंसते नजर आ रहे हैं ।
साहब बहादुर ने सीएम के बोलने पर दिया ओटीपी !
वे जिले के सबसे ताकतवर अफसर हैं। उनके पास सरकार ने अपनी ज्यादातर शक्तियां दे रखी हैं। उन्हीं में से एक है जमीन के रिकॉर्ड में सुधार करने शक्ति। मालूम हुआ है कि अफसर अपनी इस ताकत का इस्तेमाल ही नहीं करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए बीते महीने जिले के एक पूर्व विधायक की जायदाद की दुरुस्ती का मामला साहब के पास पहुंचा। पूर्व विधायक ने अपनी पूरी एप्रोच लगा दी कि साहब अपना वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) अधीनस्थ अफसर को दे दें ताकि सुधार हो जाए। लेकिन साहब बहादुर ने कोई तवज्जो नहीं दी। बताते हैं कि इस मामले में सूबे के वजीर-ए-आला डॉ. यादव को बोलना पड़ा। तब कहीं ….. बहादुर ने रात को दफ्तर खुलवा कर दुरुस्ती कराई।
दोनों ही सिलेक्शन नेपोटिजम कोटे से मानिए !
वे सबसे बड़े शिक्षण संस्थान के काम चलाऊ मुखिया हैं। इन दिनों शिक्षकों के संविदा पदों पर नियुक्ति में नेपोटिज्म के कारण चर्चा में हैं। बताया जा रहा कि उनके मूल विभाग में बेटे के अलावा एक महिला शिक्षक का संविदा आधार पर सिलेक्शन तय है ! संस्थान के गलियारों में चर्चा है कि नेपोटिज्म को लोग अक्सर पुत्र, पुत्री, भाई- बहन वगैरह-वगैरह से जोड़ देते हैं। लेकिन हमारे संस्थान के “कामचलाऊ प्रमुख जी ” में इसका दायरा बड़ा कर रखा है। एक बात बताते चलें कि, पिछले दिनों कामचलाऊ जी ने संस्थान के संस्थापक की सिविल लाइन स्थित विरासत में रहवास के लिए एड़ी-चोटी लगाई थी। लेकिन काम नहीं बना तो उन्होंने विरासत के बाहर अपना नाम और नीचे कामचलाऊ मतलब कार्यवाहक…. लिखकर संतोष कर लिया।
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