मकरोनिया समूह का टेंडर उस ठेकेदार को जो आखिरी महीने में लाइसेंस फीस भरने से चूका !
केसली में संजू शर्मा और शहर में संजू घोषी, आगासौद का 9 करोड़ का ठेका 17 करोड़ में नीलाम; पुराने चावल 'वेट एंड वॉच' की मुद्रा में


सागर। मध्य प्रदेश में आबकारी वर्ष 2026-27 के लिए शराब दुकानों की नीलामी का पहला फेज ठंडा- गुनगुना सा रहा। सागर जिले में शनिवार को हुई ऑन-ऑफलाइन टेंडर प्रक्रिया में जहाँ कुछ समूहों ने रिकॉर्ड तोड़ बोली लगाकर सबको चौंका दिया, वहीं जिले के ‘शराब सिंडिकेट’ के पुराने दिग्गजों की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 7 दिन में 31 ग्रुप नीलाम होना थे लेकिन 13 ही हो पाए। बचे हुए 18 ग्रुप के सरकार जल्द ही तारीख घोषित करेगी।
मकरोनिया ग्रुप चर्चा में ‘फटी पॉकेट वाले’ पर दांव
सोशल मीडिया और शराब कारोबारियों के गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा मकरोनिया समूह को लेकर है। इस ग्रुप के लिए जंडेल सिंह एंड कंपनी और बृजेश राय के बीच कांटे की टक्कर हुई। अंततः 29.06 करोड़ रुपये की भारी-भरकम बोली लगाकर बृजेश राय ने बाजी मार ली। लेकिन, जीत के साथ ही विवादों के बादल भी गहरा गए हैं। चर्चा है कि जो ठेकेदार दमोह के पथरिया ग्रुप की महज 18 करोड़ की लाइसेंस फीस भरने में इसी महीने चूक गया, वह 29 करोड़ का ग्रुप कैसे संभालेगा? कारोबारी जगत में यह सवाल तैर रहा है कि क्या आबकारी विभाग ने ठेकेदार . की फटी पॉकेट की अनदेखी की है? सोशल मीडिया पर लोग चुटकी ले रहे हैं कि “जेब भले फटे पर हौसला न घटे”
शहर में संजू और केसली में ‘शर्मा’ का परचम
जिले का हॉट केक माना जाने वाला आगासौद (बिल्थई ग्रुप) इस बार इतिहास रच गया। स्थानीय ठेकेदार प्रमोद तिवारी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए बेस प्राइज 9 करोड़ के मुकाबले 17.32 करोड़ की बोली लगा दी। वहीं, केसली ग्रुप पूर्व विधायक संजू शर्मा एंड कंपनी के पाले में गया है, जबकि शहर मुख्यालय के वल्लभनगर ग्रुप पर संजू घोषी एंड कंपनी ने कब्जा जमाया है। मंडी बामोरा समूह विदिशा के ठेकेदार जसवंत सिंह को मिला है।
मैदान से पुराने चावल गायब आखिर क्यों?
शराब ठेकेदारी में सागर के पुराने चावल— सतीश साहू, कमलेश बघेल और सोम एंड केएसआर, जंडेल सिंह गुर्जर जैसे नामचीन समूह इस बार मैदान से लगभग गायब हैं। जानकार इसे ‘रणनीतिक खामोशी’ मान रहे हैं। ऐसा लगता है कि ये धुरंधर, सरकार द्वारा लाइसेंस फीस में की गई 20% की बढ़ोतरी के कम होने का इंतजार कर रहे हैं। वे ‘वेट एंड वॉच’ की मुद्रा में हैं, ताकि अगले चरणों में कम कीमत पर दुकानें हथिया सकें। शराब ठेकों की यह बेरुखी सिर्फ सागर तक सीमित नहीं है। प्रदेश की राजधानी भोपाल में तो सन्नाटा ऐसा है कि एक भी ठेकेदार ने टेंडर नहीं डाला। दमोह और टीकमगढ़ का हाल भी कमोबेश यही है। इसके उलट छतरपुर में ठेकेदारों की भीड़ है।
सरकार के सामने 382 करोड़ की चुनौती
सागर जिले में पहले फेज के बाद आबकारी विभाग के खातों और आंकड़ों की तस्वीर खास नहीं है। जिले के कुल 31 समूहों के लिए शुरू हुई इस प्रक्रिया में अब तक केवल 13 समूह ही नीलाम हुए हैं, जिसका सीधा मतलब है कि एक-तिहाई हिस्से पर ही मुहर लग पाई है। शेष 18 समूहों के लिए अब भी प्रशासन को नए सिरे से पसीना बहाना होगा। वित्तीय आंकड़े नजर डालें तो सरकार ने सागर जिले के लिए 632 करोड़ रुपये का वित्तीय लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन सात दिनों की इस लंबी जद्दोजहद के बाद अब तक मात्र 250 करोड़ रुपये की प्राप्ति ही सुनिश्चित हो सकी है। विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बाकी बचे 382 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को हासिल करने की है। आगामी चरणों में क्या प्रशासन नियमों में लचीलापन लाता है या फिर ‘वेट एंड वॉच’ की मुद्रा में बैठे पुराने धुरंधर अपनी शर्तों पर मैदान में लौटते हैं।
9425172417/ 07 मार्च 2026



