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बहन ने अपनी  सजा कम कराने अपील की, पुलिस जेल से भागे भाई को राजस्थान से दबोच लाई

मुजरिम राशिद पहचान छिपाने के लिए राजस्थान में मुकेश बाल्मिकी बन गया था

सागर। गोपालगंज थाने की पुलिस टीम जयपुर से एक सजायाफ्ता मुजरिम राशिद ( 42) निवासी शनीचरी वार्ड को 15 साल बाद राजस्थान के जयपुर शहर से दबोच लाई है। मुस्लिम समुदाय के इस युवक इतने अरसे बाद पकड़ने के पीछे की जो कहानी सामने आई है। वह अपने आप में बड़ी ही दिलचस्प है। जिसका खुलासा आगे किया जाएगा। फिलहाल यह जान लें कि ये पूरा मामला क्या है। दरअसल साल 2009 में पदमाकर पुलिस चौकी (वर्तमान में मकरोनिया थाना) क्षेत्र में एक अजा वर्ग के व्यक्ति की हत्या हो गई थी। उसके पीछे की कहानी यह है कि अजा वर्ग का यह व्यक्ति अपना मकान बनवा रहा था। जिसको लेकर उसका पड़ोस में रहने वाली परवीन बी नाम की महिला से विवाद चल रहा था। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच बहसबाजी ज्यादा बढ़ी तो परवीन ने अपने भाई राशिद और जाहिद को फोन कर बुला लिया। ये दोनों भाई अपने साथ तीन अन्य मित्रों को भी ले गए। तत्कालीन एफआईआर के अनुसार दोनों पक्षों के बीच हुई मारपीट में अजा वर्ग का व्यक्ति छत से नीचे गिर गया। उपचार के दौरान चंद दिन बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस ने यह मामला कोर्ट में पेश किया। कुछ समय बाद न्यायालय ने दोनों भाई व उनकी बहन परवीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं उनके तीनों मित्र बरी हो गए। सजा के बाद ये तीनों जेल गए। जिसमें कुछ समय बाद परवीन को जमानत मिल गई।

एक भाई अस्पताल से और दूसरा पैरोल से भागा

सजा के दौरान कथित तौर पर बीमार पड़ने पर राशिद को जिला अस्पताल में उपचार के लिए 11 दिसंबर 2011 को भर्ती कराया गया। लेकिन यह शातिर युवक अगले ही दिन जेल प्रहरियों को नशीला पदार्थ देकर अस्पताल से फरार हो गया। इसी अवधि में राशिद का भाई जाहिद पैरोल था। जैसे ही उसे राशिद के भागने की खबर मिली तो वह भी पैरोल अवधि पूरी होने के बाद जेल नहीं लौटा यानी वह भी फरार हो गया। इधर गोपालगंज पुलिस थाने में दोनों भाईयों के जेल से भागने की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई जो साल-दर-साल ठंडे बस्ते में जाती रही।

सजा कम करानेे की अपील के फेर में भाई हत्थे चढ़ा

अब इस घटनाक्रम का वह इंटरेस्टिंग पार्ट। जिसकी वजह से 15 साल से फरार यह मुजरिम, फिर से सलाखों के पीछे पहुंच गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार साल 2014 में सजायाफ्ता परवीन ने मप्र हाईकोर्ट जबलपुर में एक अपील दाखिल की थी। जिसमें उसने अपनी सजा कम करने की मांग की थी। शुरुआती कुछ साल तक तो इस पर उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। इसके बाद लंबी तारीखें मिलने लगीं। वहीं बीते साल सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली ने देश भर की अदालतों को निर्देश जारी किए कि लंबे समय से विचाराधीन अपीलों पर त्वरित सुनवाई कर उनका निराकरण किया जाए। इसी तारतम्य में इस मामले के सजायाफ्ता आरोपियों को तलब किया। लेकिन अदालत में परवीन को छोड़ उसके दोनों भाइ हाजिर नहीं हुए। हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि अन्य दो मुजरिम यानी राशिद और जाहिद जेल से फरार हैं। तब हाईकोर्ट ने सागर एसपी को इन दोनों को हाजिर करने के आदेश दिए ताकि परवीन की अपील पर सुनवाई की जा सके। इधर जैसे ही पुलिस पर दबाव बना तो इन दोनों की खोजबीन के लिए सर्च अभियान शुरु किया गया।

राजस्थान में कभी ठेकेदार तो कभी ड्राइवर बन छिपा रहा

पुलिस ने जैसे ही खोजबीन के लिए राशिद और जाहिद के परिवारजन से संपर्क किया तो उन्होंने इन लोगों के बारे में कोई भी जानकारी होने से इनकार कर दिया। लेकिन पुलिस ने फिर मुखबिर तंत्र के जरिए वह नंबर हासिल कर लिया। जिससे पुलिस को यह संदेह हो गया कि इनमेें से राशिद राजस्थान के जयपुर शहर की एक मुस्लिम बाहुल्य कुंडा बस्ती, ट्रांसपोर्ट नगर में छिपा हुआ है। इस सूचना के आधार पर गोपालगंज से सीनियर एसआई नीरज जैन, हेड कांस्टेबिल दीपक व्यास और पुलिस लाइन से कांस्टेबिल आशीषसिंह और मनीष तिवारी की टीम जयपुर रवाना हुई। उसकी खोजबीन के लिए टीम के कुछ सदस्यों ने अपनी वेश-भूषा मुस्लिमों की तरह रख ली ताकि वह स्थानीय लोगों से घुलमिलकर राशिद की खोजबीन कर सकें। करीब चार दिन की मेहनत के बाद इन लोगों ने राशिद को ढृूंढ लिया। मालूम चला कि वह यहां खुद को मुकेश बाल्मिकी बताकर रह रहा है। वह यहां ड्राइवरी से लेकर केटरिंग सर्विस की ठेकेदार जैसे काम कर रहा था। इधर पुलिस ने जैसे ही उसे दबोचा तो वह खुद को मुकेश बताने लगा। लेकिन जब उसकी खाना तलाशी ली तो उसकी जेब से नमाज के वक्त पहनी जाने वाली टोपी निकल आई। इसके बाद भी वह खुद को राशिद मानने से इनकार करता रहा। तब पुलिस ने वहीं के एक मौलवी की मौजूदगी में उसके कपड़े निकलवाकर खतना की जांच कराई तो वह टूट गया और उसने कुबूल कर लिया कि वह ही राशिद है। पूछताछ में उसने बताया कि तीन साल पहले तक जाहिद मेरे संपर्क में था। लेकिन उसके बाद से उसका कोई पता नहीं है। यहां बता दें कि यह दोनों ही सजायाफ्ता युवक, पुलिसकर्मियों के करीबी रिश्तेदार हैं। बहन परवीन के पति पुलिस मेंं एएसआई के पद से रिटायर हुए हैं। वहीं अन्य रिश्तेदार पुलिस लाइन समेत अन्य जगहों पर कार्यरत हैं।

17/03/2026

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