
सागर। भाजपा की नई कार्यकारिणी की घोषणा ने जिले के सियासी गलियारों में चर्चाएं बढ़ा दी हैं। लोकल इलेक्शन (ननि चुनाव)के बागी को ओवलाइज करने से लेकर सांसद प्रतिनिधि के पद से हटाए गए कार्यकर्ता का नाम कार्यकारिणी सूची में है।
बहरहाल जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी की नियुक्ति के लगभग 400 दिनों के लंबे इंतजार के बाद रविवार को जब टीम की सूची सामने आई, तो उसमें शक्ति संतुलन के नए समीकरण साफ दिखाई दिए। इस पूरी कार्यकारिणी पर नजर डालें तो एक बात शीशे की तरह साफ है—सागर के वरिष्ठ विधायक शैलेंद्र जैन का इसमें जबरदस्त ‘वर्चस्व’ रहा है।
शैलेंद्र जैन का दबदबा, प्रदीप लारिया नंबर-2
पूरी सूची विधायक शैलेंद्र जैन की पसंद की स्पष्ट छाप छोड़ती है। संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर उनके करीबियों की संख्या सबसे अधिक है। उपाध्यक्ष पद पर जगन्नाथ गुरैया, मनीष चौबे, विक्रम सोनी और यश अग्रवाल जैसे नामों की मौजूदगी यह बताने के लिए काफी है कि जिले की संगठनात्मक राजनीति का केंद्र फिलहाल कहां है। महामंत्री पद पर चेतराम अहिरवार और मीडिया से लेकर आईटी सेल तक जैन समर्थकों का बोलबाला है। दूसरे नंबर पर नरयावली विधायक प्रदीप लारिया उभरे हैं। उन्होंने न केवल अपने विधानसभा क्षेत्र, बल्कि मकरोनिया और सदर जैसे शहरी क्षेत्रों में भी अपने समर्थकों को सेट करने में सफलता पाई है। चैनसिंह ठाकुर को महामंत्री बनवाकर और जयंती मौर्य व आफीसर यादव को मंत्री पद दिलाकर लारिया ने संगठन में अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखी है।
दोनों दिग्गज के समर्थकों को नहीं मिली तवज्जो
हैरानी की बात यह रही कि प्रदेश की राजनीति के दिग्गज और कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत (सुरखी) तथा पूर्व मंत्री व वरिष्ठ विधायक भूपेंद्र सिंह (खुरई) अपनी पसंद के महज तीन-तीन लोगों को ही इस टीम में जगह दिला पाए। गोविंद सिंह राजपूत के खेमे से शैलेंद्र श्रीवास्तव को उपाध्यक्ष और अर्जुन पटेल को मंत्री बनाया गया है। भूपेंद्र सिंह के कोटे से पुष्पेंद्र सिंह परिहार उपाध्यक्ष और हरीशंकर कुशवाहा मंत्री पद पाने में सफल रहे। सांसद डॉ. लता वानखेड़े की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही, उनके हिस्से में निकेश गुप्ता और संतोष ठाकुर के रूप में दो उपाध्यक्ष पद आए हैं। वहीं बीना से भी सीमित प्रतिनिधित्व रहा है, जिसमें एक नाम पार्टी की ‘अनऑफिशियल’ विधायक निर्मला सप्रे के खेमे का माना जा रहा है।
संगठन का विधानसभावार ‘चेक एंड बैलेंस’
कार्यकारिणी के गठन में एक खास पैटर्न देखा गया है ज्यादातर नेताओं को उनके अपने विधानसभा क्षेत्र तक ही सीमित रखा गया है। किसी नेता के कट्टर समर्थकों को दूसरे की विधानसभा में सक्रिय होने का मौका नहीं दिया गया है। हालांकि, दो नाम अपवाद हैं जिनके तार सीधे भोपाल और दिल्ली के बड़े नेताओं से जुड़े हैं। जैसे तृप्ति बाबू सिंह, इन्हें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री प्रह्लाद पटेल और सविता जिनेश साहू को केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक के कोटे से माना जा रहा है।
जिलाध्यक्ष की अपनी टीम में कटारे के बागी बोल
तिवारी ने अपनी कोर टीम में सुमित यादव (महामंत्री), विकास सांधेलिया (कोषाध्यक्ष), और देवेंद्र कटारे (कार्यालय मंत्री) को जगह दी है ताकि संगठन के रुटीन कार्यों पर उनकी पकड़ बनी रहे। हालांकि कटारे ने सूची जारी होते ही बगावती सुर बुलंद कर दिए। महामंत्री पद की आस लगाए देवेंद्र ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा कि, चाटूकारों की जीत हो गई। कुल मिलाकर, यह कार्यकारिणी आगामी चुनावों और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, लेकिन इसमें ‘सागर विधायक गुट’ बाजी मार ली है।
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01/03/2026



