सियासत
Trending

खुरई में सीएम डॉ यादव के ऐतिहासिक स्वागत से क्या बदलेंगे राजनीतिक समीकरण?

सागर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खुरई विधानसभा दौरे ने न केवल विकास की नई इबारत लिखी, बल्कि समूचे बुंदेलखंड की राजनीति में एक बड़ा संदेश भी दे दिया है। खुरई की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब और घंटों तक हुई पुष्पवर्षा देखकर मुख्यमंत्री स्वयं दंग रह गए। अभिभूत मुख्यमंत्री ने मंच से घोषणा की कि “खुरई वालों ने फूलों से होली और दिवाली एक साथ मना दी है, ऐसा स्वागत देखकर मन करता है कि सब भूलकर यहीं रह जाऊं।”
​राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बीते दो वर्षों के कार्यकाल में डॉ. यादव का इतना भव्य और ऐतिहासिक स्वागत केवल उनके गृह नगर उज्जैन में ही देखा गया है। खुरई का यह आयोजन शक्ति प्रदर्शन से कहीं अधिक ‘राजनीतिक मेल-मिलाप’ और ‘वर्चस्व की पुनर्स्थापना’ की निशानी बनकर उभरा है।

पिघली ‘कोल्ड एंड बोल्ड वार’ की बर्फ: एक मंच, एक संकेत

​इस आयोजन का सबसे बड़ा हाईलाइट कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पूर्व गृह मंत्री एवं स्थानीय विधायक भूपेंद्र सिंह के बीच के रिश्तों में दिखी नरमी रही। लंबे समय से जिले की राजनीति में दोनों दिग्गजों के बीच ‘कोल्ड एंड बोल्ड वार’ की चर्चाएं आम थीं। लेकिन मंच पर दृश्य बदला हुआ था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इशारे पर भूपेंद्र सिंह ने प्रोटोकॉल और आपसी कड़वाहट को दरकिनार करते हुए गोविंद सिंह राजपूत को मंच संबोधित करने का मौका दिया। चंद सेकंड के इस संक्षिप्त से घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। टीकाकारों का मानना है कि सीएम ने एक ही झटके में जिले के दो बड़े क्षत्रपों के बीच की खाई को पाटने का सफल प्रयास किया।

भूपेंद्र सिंह का ‘कमांडिंग’ अंदाज और विरोधियों को जवाब

​आयोजन को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि पिछले दो वर्षों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव का खुरई विधानसभा क्षेत्र और भूपेंद्र सिंह से एक दूरी बनाए रखना, उनके विरोधियों के लिए ‘फायदे का सौदा’ साबित हो रहा था। 48 घंटे पहले से नकारात्मक अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन आज के भव्य आयोजन ने उन तमाम चर्चाओं को ” डिस्टर्ब” कर दिया है। कार्यक्रम पूर्व मंत्री व . वरिष्ठ विधायक भूपेंद्र सिंह पूरी तरह ‘कमांड’ में था। उनकी सक्रियता और अनुशासन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब वे सीएम की उपलब्धियों पर बोल रहे थे, तभी पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे सीएम से कुछ  चर्चा करने लगे। भूपेंद्र सिंह ने बिना उनकी ओर देखे स्पष्ट लहजे में कहा, “बातचीत बाद में हो सकती है, मुख्यमंत्री अभी कहीं नहीं जा रहे।” इस टोक के बाद चौबे को अपनी सीट पर वापस लौटना पड़ा। यह घटनाक्रम बताने के लिए काफी था कि कार्यक्रम की कमान पूरी तरह भूपेंद्र सिंह के हाथों में थी।

छोटी गफलत और एकजुटता का बड़ा संदेश

​ कार्यक्रम के दौरान एक युवा एंकर की गफलत ने कुछ पल के लिए असहज स्थिति पैदा की। प्रोटोकॉल की चूक के चलते भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी और ग्रामीण अध्यक्ष रानी कुशवाहा का नाम स्वागत के लिए नहीं पुकारा गया। जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी ने कुछ पल प्रतीक्षा की और फिर स्थिति को भांपते हुए वे स्वयं सीएम का स्वागत करने पहुंच गए, जिनके पीछे श्रीमती कुशवाहा भी पहुंचीं। ​इन छोटी घटनाओं के बावजूद, आयोजन का सबसे सकारात्मक पहलू ‘भाजपा की पूर्ण एकजुटता’ रही। यह शायद पहला ऐसा मंच था जहाँ भाजपा के वरिष्ठतम विधायक एवं पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, शैलेंद्र जैन, प्रदीप लारिया, बृज बिहारी पटैरिया, वीरेंद्रसिंह लंबरदार  (बीना विधायक निर्मला सप्रे सहित, जो अभी तकनीकी रूप से भाजपाई नहीं हैं), सांसद डॉ. लता वानखेड़े, महापौर संगीता तिवारी, नगर निगम अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार समेत पूर्व जनप्रतिनिधि एक साथ नजर आए।

1000 करोड़ की सौगातें: विकास का ‘खुरई मॉडल’

​राजनीतिक संदेशों के साथ-साथ विकास की झड़ी भी लगी। मुख्यमंत्री ने लगभग 954 करोड़ रुपये की स्पष्ट राशि वाली घोषणाएं कीं, जो कुल मिलाकर 1000 करोड़ से ऊपर बैठती हैं। इनमें राहतगढ़-खुरई-खिमलासा 4-लेन मार्ग (500 करोड़), बीना नदी परियोजना (429 करोड़), खुरई में नवीन आईटीआई, एथलेटिक्स ट्रैक और कृषि महाविद्यालय भवन (25 करोड़) जैसी बड़ी योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा 312 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया गया।

10/01/2026

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!