प्राइवेट बसों को “सरकारी” बनाने का प्लान ! प्रदेश भर में थम सकते हैं पहिए
सरकारी सुगम बस सेवा पर "ब्रेक"की तैयारी!

रविवार को सागर में जुटेंगे प्रदेश भर के बस ऑपरेटर
सागर। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आगामी अप्रैल माह से ‘मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा’ शुरू करने की कवायद ने प्रदेश के निजी बस ऑपरेटरों के बीच हड़कंप है। प्राइवेट बसों के सरकारी नियंत्रण में जाने के विरोध में रविवार को सागर के केरबना रोड स्थित एक होटल में प्रदेशव्यापी बैठक बुलाई गई है। मप्र बस एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित इस महामंथन में प्रदेश के सभी 55 जिलों के ऑपरेटर हिस्सा ले रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार के नए मॉडल के विरुद्ध एकजुट होकर रणनीति तैयार करना है।
क्या है सरकार की योजना और ऑपरेटर्स का डर?
सरकार दो दशक बाद सड़कों पर सरकारी नियंत्रण वाली बसें उतारने की तैयारी में है। पब्लिक- प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत बसों का स्वामित्व और संचालन तो निजी ऑपरेटरों के पास रहेगा, लेकिन उनकी लगाम सरकारी नोडल एजेंसियों के हाथ में होगी। एसोसिएशन के कार्यकारी प्रांतीय अध्यक्ष संतोष पांडेय का कहना है कि सरकार ऑपरेटर्स की व्यावहारिक और आर्थिक समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।जैसे कि इस मॉडल में डीजल, ड्राइवर और क्लीनर का खर्च ऑपरेटर उठाएंगे, जबकि टिकट की आय सरकारी एजेंसी के पास जमा होगी। ऑपरेटरों का सवाल है कि पूरे महीने बिना किसी आय के वे डीजल का भारी-भरकम खर्च कैसे वहन करेंगे? वहीं ऑपरेटर्स को डर है कि संचालन एजेंसियां फिटनेस या अन्य कमियां निकालकर कभी भी बसों का संचालन बंद करा सकती हैं।
बड़े घरानों को रास्ता देने का संदेह
बस मालिकों को अंदेशा है कि यह योजना केवल एक प्रयोग है, जिसके बाद सरकार पूरे प्रदेश का परिवहन ढांचा देश के बड़े कॉर्पोरेट ऑपरेटर्स को सौंप देगी। अध्यक्ष पांडेय ने बताया कि मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और कमिश्नर से मुलाकात के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। सागर की इस बैठक में प्राप्त सुझावों और शिकायतों का ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा जाएगा। यदि सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो प्रदेश भर के बस ऑपरेटर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे, जिससे राज्य की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।
सरकार का सुलभ और सस्ती यात्रा का दावा
आंदोलन के मूड में आए प्राइवेस बस ऑपरेटर्स से इतर राज्य सरकार प्रस्तावित नई व्यवस्था को यात्री सुविधा में क्रांतिकारी बदलाव मान रही है। जानकारी के अनुसार प्रदेश को सात जोन में बांटा जाएगा और कमाई का 95 प्रतिशत हिस्सा ऑपरेटरों को ही मिलेगा। बसों में जीपीएस, लाइव लोकेशन और ऑनलाइन बुकिंग जैसी सुविधाएं होंगी। सभी बसें एक ही रंग (संभावित सफेद और नारंगी) में नजर आएंगी ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर हो सके।
-9425172417
21/02/2026



