नाबालिग को आत्महत्या करने को मजबूर करने वाले की पहचान के लिए पुलिस लेगी मोहल्ला- पड़ोस के लोगों के ब्लड सेम्पिल
पोस्टमार्टम में पता चला था कि नाबालिग का हुआ था रेप

डीएनए-सीडीआर से खुलेगा मौत का राज
सागर। मोतीनगर थाना क्षेत्र में जून 2024 में हुई एक नाबालिग की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस अब विज्ञान और तकनीक के जरिए जांच करने ने जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद से ही पुलिस आरोपी की तलाश में है, लेकिन परिजनों द्वारा सामाजिक लोक-लाज के डर से जांच में सहयोग न करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। परिजन जांच बंद करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कानून की मर्यादा और मृतका को न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता के साथ टीआई जसवंत सिंह राजपूत ने जांच का रुख वैज्ञानिक दिशा में मोड़ दिया है।
जांच के वैज्ञानिक और तकनीकी पहलू
प्रारंभिक जांच के अनुसार मृतका अपना मोबाइल नहीं रखती थी, इसलिए शुरुआती जांच में कठिनाई आई। अब पुलिस उसकी मां के मोबाइल की सीडीआर ( कॉल डिटेल रिकॉर्ड) खंगाल रही है, जिसका इस्तेमाल नाबालिग कभी-कभी करती थी। इसके अलावा, पुलिस ने अब संदिग्ध रिश्तेदारों और आसपास के लोगों के डीएनए परीक्षण की तैयारी की है, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधी की पहचान पुख्ता की जा सके।
जांच के लिए मनोवैज्ञानिक उपाय भी अपनाएंगे
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस कुछ और तरीके भी अपना सकती है। जैसे संदिग्धों के व्यवहार का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करना। घटनास्थल से मिले पुराने साक्ष्यों का आधुनिक लैब में पुन: परीक्षण। मृतका की सहेलियों के सोशल मीडिया चैट और कॉल हिस्ट्री की जांच, जिससे किसी गुप्त संबंध या दबाव का सुराग मिल सके।
परिजन कुछ भी कहें, जांच कम्पलीट करना जरूरी
परिजनों के विरोध और सामाजिक दबाव के बावजूद, सागर पुलिस का यह कदम सराहनीय है। टीआई राजपूत का यह स्पष्ट कहना कि “कानून अपना काम करेगा”, पुलिस की उस अटूट कर्तव्य निष्ठा को दर्शाता है जहाँ सहानुभूति और भावनाएं, न्याय के मार्ग में बाधा नहीं बनतीं। बता दें कि इस तरह के मामलों में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस भी किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। इसलिए इस प्रकरण की डेढ़ साल बाद ली विधिवत ढंग से जांच की जा रही है।



