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जिले की शराब ठेकेदार फर्म की पार्टनर सोम डिस्टलरी के लाइसेंस निलंबित

फर्जी परमिट घोटाले में आबकारी उपनिरीक्षक हो चुकी है बर्खास्त

रिटायर अधिकारी-कर्मचारियों पर वसूली की तलवार लटकी

सागर। इंदौर के पांच साल पुराने शराब के बहुचर्चित फर्जी परमिट घोटाले में आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। अभिजीत अग्रवाल, आयुक्त आबकारी विभाग, ग्वालियर ने वर्ष 2021 में इंदौर के देपालपुर पुलिस थाने की कार्रवाई के बाद आए न्यायालयीन फैसले के बाद नामचीन शराब निर्माता सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज, रायसेन स्थित दो डिस्टलरी के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। बुधवार को आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। इधर इस कार्रवाई की आंच सागर जिले तक भी पहुंचने की चर्चा है! कारण ये है कि सोम डिस्टलरीज, यहां ‘रेडब्रिज’ नाम की लाइसेंसी ठेकेदार फर्म की मुख्य भागीदार है। बता दें कि आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आदेश में विभाग के ही कई वरिष्ठ अधिकारियों को इस सिंडिकेट का हिस्सा पाया गया था। 

हाईकोर्ट के स्टे का नहीं मिला सहारा

आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सोम डिस्टलरीज की सेहतगंज और रोजराचक (रायसेन) स्थित इकाइयों के विरुद्ध मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 31(1) के तहत सख्त कार्रवाई की गई है। शासन ने कंपनी के डी-1 (डिस्टलरी), एफ.एल.-9 (मसाला शराब), सी.एस.-1 (देशी मदिरा) और बी-3 सहित कुल 15 से अधिक श्रेणी के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं। हालांकि कंपनी ने हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ से सजा पर स्थगन लिया था, लेकिन महाधिवक्ता के विधिक अभिमत के बाद विभाग ने स्पष्ट किया कि ‘दोषसिद्धि’ अभी भी प्रभावी है, इसलिए लाइसेंस का संचालन जारी रखना कानूनन गलत है।

जांच में सैंकडों फर्जी परमिट मिले

यह पूरा मामला रायसेन स्थित सोम डिस्टलरीज की इकाइयों से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शराब परिवहन से जुड़ा है। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश, देपालपुर द्वारा प्रकरण क्रमांक 21/2021 में दिए गए निर्णय के अनुसार, आरोपियों ने ट्रक क्रमांक MP 09 HF 5185 और परमिट संख्या 10363 के नाम पर एक बड़ा जाल बुना था। जांच में सामने आया कि डिस्टलरी से अवैध लाभ कमाने के लिए हजारों की संख्या में कूट रचित (फर्जी) परमिट बुक तैयार की गई थीं।

 आबकारी अधिकारियों की भूमिका साबित

दस्तावेजों के अनुसार, इस आपराधिक षडयंत्र में आबकारी विभाग के अधिकारी और डिस्टलरी के कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे थे। पकड़े गए फर्जी परमिटों की संख्या और दोषी/संदिग्ध अधिकारियों के नाम इस प्रकार हैं- प्रीति गायकवाड़ (आबकारी उपनिरीक्षक): इनके नाम से 279 फर्जी परमिट का मामला सामने आया। शासन ने इन्हें सेवा से बर्खास्त (पदच्युत) कर दिया है। कैलाश चंद्र बंगाली (तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी): इनके कार्यकाल में 29 फर्जी परमिट बुक पकड़ी गईं। मदन सिंह पवार (सहायक जिला आबकारी अधिकारी): इनके पास से 5 फर्जी परमिट बुक बरामद हुईं। रामप्रसाद मिश्रा (आबकारी उपनिरीक्षक): इनके नाम पर 25 फर्जी परमिट का उल्लेख है। इनमें से बंगाली, पवार और मिश्रा सेवानिवृत्त हो चुके हैं, अतः इनके विरुद्ध विभागीय जांच का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसके अलावा, सोम डिस्टलरीज के प्रतिनिधि मोहन सिंह तोमर (676 परमिट), संजय गोहे (282 परमिट), वीरेंद्र भारद्वाज (272 परमिट), उमाशंकर शर्मा (75) और दिनकर सिंह (65) जीडी अरोरा को भी इस फर्जीवाड़े में सजा सुनाई गई थी।

सागर के भागीदारों के बीच हलचल मची

सागर जिले के शराब ठेकेदारों में इस खबर से हलचल मची हुई है। चूंकि सोम डिस्टलरीज यहाँ की प्रमुख लाइसेंसी फर्म ‘रेडब्रिज’ में पार्टनर है, इसलिए इस कार्रवाई का सीधा असर सागर के शराब कारोबार पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। शासन की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि रसूखदार डिस्टलरी संचालकों और भ्रष्ट अधिकारियों का गठजोड़ अब कानून के शिकंजे में है।

04/02/2026

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