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विवि ईसी: प्रभारी कुलपति के पुत्र के चयन पर मुहर, धुर विरोधी प्रोफेसर को घेरा

सागर। डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय की हालिया संपन्न 42वीं कार्यपरिषद की बैठक के मिनिट्स मंगलवार को सार्वजनिक हो गए। मिनिट्स में दर्ज ईसी की बैठक के ब्योरे ने उन तमाम चर्चाओं और आशंकाओं पर मुहर लगा दी है, जिन्हें ‘ सागरवाणी’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। ईसी में कुलपति प्रो. वाईएस ठाकुर के पुत्र डॉ. मेघवंत सिंह ठाकुर का व्यवसाय प्रबंधन विभाग (एमबीए) में संविदा शिक्षक के पद पर चयन सुनिश्चित कर दिया गया है। मिनिट्स के मुताबिक बैठक के दौरान अनुशासन और नैतिकता का खूब ताना-बाना बुना गया। जबकि यह बैठक विवि के गलियारों में प्रभारी कुलपति के अपनों को लाभ और विरोधियों को ‘सबक’ सिखाने का एजेंडा ठहराई गई। 

पुत्र मोह और ‘तथा कथित नैतिकता’ का प्रदर्शन

मिनिट्स के मुताबिक कार्यपरिषद की बैठक में जब सहायक प्राध्यापक (संविदा) की नियुक्तियों का एजेंडा आया, तो प्रभारी कुलपति प्रो. वाई.एस. ठाकुर ने अपने पुत्र डॉ. मेघवंत सिंह ठाकुर का नाम होने के कारण बैठक से बाहर जाकर नैतिकता की मिसाल पेश की! उनकी अनुपस्थिति में प्रो. देवाशीष बोस ने अध्यक्षता की और चयन समिति की उस सिफारिश को हरी झंडी दे दी, जिसमें कुलपति के सुपुत्र का चयन एमबीए विभाग के लिए किया गया था। हालांकि, विश्वविद्यालय के गलियारों में यह कटाक्ष आम है कि चयन प्रक्रिया के हर चरण में ‘पर्दे के पीछे’ की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी, जिसे प्रो. बोस व कार्यपरिषद ने केवल एक्ट बस किया है।

प्रो. भागवत के साथ ‘दोहरा मापदंड’ और ईसी की चुप्पी

बैठक का सबसे विवादास्पद पहलू व्यवसाय प्रबंधन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और अधिष्ठाता प्रो. श्री भागवत से जुड़ा रहा। हैरत की बात यह है कि पूरी कार्यपरिषद में इस तथ्य का एक बार भी जिक्र नहीं किया गया कि प्रो. भागवत को इस भर्ती की शुरुआत मे स्क्रूटिनी व स्क्रीनिंग के स्तर पर कतिपय आरोपों के चलते चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था। बाद में उन्हें ही साक्षात्कार समिति में शामिल कर लिया गया, जहाँ उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया के विरुद्ध अपनी असहमति दर्ज कराई थी। कार्यपरिषद के कार्यवृत्त में इस महत्वपूर्ण विरोध को महज एक लाइन में समेट दिया गया कि ‘प्रो. भागवत ने स्क्रूटिनी लिस्ट से असहमति जताई, हालांकि वे समिति के सदस्य थे।’ इस चुप्पी से साफ है कि प्रशासन ने उनके तर्कों को दरकिनार कर अपनों के चयन का मार्ग प्रशस्त किया।

निजी विवाद में प्रशासन की ‘अति-सक्रियता’

प्रभारी कुलपति प्रो. ठाकुर के धुर विरोधी माने जाने वाले प्रो. भागवत के विरुद्ध अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया है। कार्यपरिषद ने उनके विरुद्ध द्विविवाह के मामले में औपचारिक आरोप-पत्र जारी करने का निर्णय लिया है। विवि के प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि जब प्रो. भागवत और उनकी पत्नी का विवाद पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश के एक पारिवारिक न्यायालय में विचाराधीन है, तो विश्वविद्यालय प्रशासन किस अधिकार या आधार पर उनकी कथित प्रथम पत्नी को ‘न्याय’ दिलाने पर तुला हुआ है? जानकारों का कहना है कि यह मामला विश्वविद्यालय के अनुशासन से ज्यादा प्रभारी कुलपति के निजी ‘हित’ और प्रतिशोध की राजनीति से प्रेरित नजर आता है, जिसमें एक पुराने अदालती मामले को हथियार बनाकर आरोप-पत्र की नौबत तक लाया गया है।

इन नियुक्तियों और फैसलों पर भी हुई चर्चा

बैठक में अन्य प्रशासनिक नियुक्तियों को भी मंजूरी दी गई, जिनमें प्रो. रश्मि सिंह को भाषा स्कूल का नया अधिष्ठाता, प्रो. रत्नेश दास को विश्वविद्यालय का मुख्य नियंता (प्रॉक्टर) और प्रो. सुशील कुमार काशव को वार्डन परिषद का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा विधि विभाग में सत्यम सिन्हा, पूर्वा जैन और विक्रम सिंह दरबार की संविदा नियुक्तियों को भी मंजूरी दी गई।शिक्षकों के हितों से जुड़े मामलों में सहायक प्राध्यापक डॉ. आयुष गुप्ता और डॉ. सावन कुमारी की पिछली सेवाओं को पदोन्नति के लिए मान्य किया गया। वहीं, अमरकंटक विश्वविद्यालय में पदस्थ प्रो. आलोक श्रोत्रिय को उनकी सागर विवि की पुरानी सेवाओं के आधार पर पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ देने का निर्णय लिया गया।

भ्रष्टाचार और कानूनी पैनल का विस्तार

वाणिज्य विभाग के पूर्व प्रोफेसर जितेन्द्र कुमार जैन के विरुद्ध सीबीआई द्वारा दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्यपरिषद ने सतर्क रुख अपनाते हुए भारत सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता से कानूनी राय लेने का फैसला किया है। इसके साथ ही, उच्च न्यायालय जबलपुर में प्रभावी पैरवी के लिए अधिवक्ता पीयूष भटनागर को विश्वविद्यालय के पैनल में शामिल किया गया है। बैठक में प्रो. देवाशीष बोस, प्रो. आर.के. त्रिवेदी, प्रो. ए.पी. दुबे, प्रो. रश्मि सिंह, डॉ. प्रज्ञा एम. मेश्राम और डॉ. पी.के. सतपथी सदस्य के रूप में जबकि कुलसचिव डॉ. एस.पी. उपाध्याय ने सचिव की भूमिका निभाई थी।

31/03/2026

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