टाइगर स्टेट में ‘सिस्टम’ लाचार: 5 दिन बाद न मृत बाघ की और न जिम्मेदार की पहचान !

सागर। मध्य प्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ का गौरव तो हासिल है, लेकिन सागर के ढाना (हिलगन गांव) में एक युवा बाघ की मौत ने वन विभाग की सुरक्षा और मुस्तैदी की कलई खोलकर रख दी है। बाघ का शव मिले 5 दिन बीत चुके हैं, लेकिन न तो इस बेजुबान की पहचान पुख्ता हो पाई है और न ही उसकी जान लेने वाले ‘शिकारी’ पकड़े गए हैं।
करंट की चपेट में ‘किंग’, लेकिन जिम्मेदार कौन?
हिलगन गांव के पास जिस तरह एक युवा बाघ की जान गई, उसने वन्यजीव प्रेमियों को चिंता में डाला है। विभागीय सूत्र पुष्टि कर रहे हैं कि गांव के करीब आधा दर्जन लोगों से पूछताछ चल रही है। जांच इस बात पर टिकी है कि खेतों में बिछाया गया मौत का जाल (करंट) आखिर किसका था और उसका मकसद क्या था? दक्षिण वन मंडल के डीएफओ वरुण यादव का कहना है कि ‘प्राइमरी अफेंस रिपोर्ट’ दर्ज कर ली गई है। 
पहेली बनी बाघ की पहचान: कहाँ का था ‘मेहमान’?
विभागीय सुस्ती का आलम यह है कि 5 दिन बाद भी यह साफ नहीं है कि मृत बाघ किस इलाके का था। वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (VRDTR) के रिकॉर्ड से बाघ की धारियों का मिलान नहीं हुआ है। बाघ के फोटो रातापानी और पन्ना टाइगर रिजर्व भी भेजे गए हैं, लेकिन वहां से भी कोई ‘ठोस’ जवाब नहीं मिला है। आखिरी उम्मीद देहरादून स्थित डेटा सेंटर पर है, जहाँ देश भर के बाघों की ‘स्ट्राइप्स’ (धारियों) का रिकॉर्ड रहता है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह इंसानों के फिंगरप्रिंट अलग होते हैं, वैसे ही हर बाघ की धारियां अद्वितीय होती हैं। लेकिन तकनीक के इस युग में भी एक मृत बाघ की शिनाख्त में 5 दिन लग जाना विभाग की ‘कछुआ चाल’ को दर्शाता है। बहरहाल ये बाघ VRDTR का नहीं था, तो क्या वह पन्ना या किसी अन्य गलियारे से भटक कर यहाँ आया था? और अगर ऐसा था, तो उसकी मूवमेंट पर नजर क्यों नहीं रखी गई? करंट फैलाकर शिकार करने की यह प्रवृत्ति बताती है कि जंगलों के किनारे बसे गांवों में अब भी निगरानी शून्य है।
31/12/2025



