सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कलेक्टर-एसपी ने आदिवासी महिला को दिलाया जमीन का कब्जा
मालथौन में पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने की कार्रवाई

सागर। जिले की मालथौन तहसील मुख्यालय पर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए एक आदिवासी महिला को उसकी बेदखल की गई जमीन पर पुनः कब्जा दिलाने की कार्रवाई की है। मालथौन के ग्राम अंडेला (चक्क बघोनिया) मौजा स्थित खसरा नंबर 70 से जुड़े इस मामले में स्व. सीताराम आदिवासी की बेटी मालती आदिवासी को उसके पिता की मृत्यु के बाद तीन एकड़ जमीन विरासत में मिली थी। लेकिन सागर जिला ग्रामीण कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष कल्पात्री सिंह के पति गोविंद सिंह मालथौन ने अनधिकृत रूप से इस जमीन पर कब्जा कर लिया था। पीड़िता द्वारा विरोध करने पर उसे गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां देकर लगातार प्रताड़ित किया गया। पूर्व में तहसीलदार द्वारा कागजों पर कब्जा दिलाने के बावजूद दबंगई के बल पर मालती को अपनी ही जमीन पर खेती करने से वंचित रखा गया था, जिसके बाद मालथौन थाने में आरोपी गोविंद सिंह के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं सहित एससी-एसटी एक्ट के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर अदालत ने पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके अनुपालन में मंगलवार को प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। कार्रवाई की गंभीरता और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए सागर कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल एवं पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया की मौजूदगी में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में जमीन का भौतिक कब्जा मालती आदिवासी को सौंपने की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी कार्रवाई के दौरान अलर्ट मोड पर रहा। मालथौन क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जे का यह कोई पहला मामला नहीं है। बीते वर्ष भी विधायक एवं पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की पहल पर क्षेत्र के कुछ गांवों के आदिवासी किसानों की करीब 125 एकड़ जमीन को रानू सिंघई नामक व्यक्ति के कब्जे से मुक्त कराया गया था। आरोपी रानू ने बहुत मामूली कर्ज और बटाई पर खेती करने का झांसा देकर आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा हथिया लिया था, जिसके खिलाफ पुलिस ने आपराधिक मामले दर्ज किए थे।



