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फॉलोअप: केसली की थोकबंद जमीन खरीदी पर कलेक्टर की रोक, खरीदार के नाम पर अभी भी रहस्य

सागर। जिले की केसली तहसील के 5 गांव में अज्ञात व्यक्ति या कंपनी द्वारा थोकबंद जमीन की खरीदी के मामले में कलेक्टर संदीप जीआर ने प्रभावी एक्शन लिया है। मंगलवार को उन्होंने जिला पंजीयक सागर को निर्देश दिए कि उक्त गांवों की संबंधित खसरों की जमीन की रजिस्ट्री जिला प्रशासन के संज्ञान में लाए बगैर नहीं की जाए। माना जा रहा है कि कलेक्टर ने यह निर्णय किसानों को संभावित ठगी से बचाने और शासन द्वारा प्रदत्त सरकारी पट्टे खुर्द-बुर्द होने से रोकने के लिए लिया है। सूत्रों के अनुसार इन गांवों में अलग-अलग किसानों के पास करीब 20 एकड़ सरकारी पट्टे की भूमि है। दूसरी ओर अभी तक यह मालूम नहीं चल सका है कि इन जमीनों की खरीदी कौन कर रहा है। हालांकि इसके लिए किसानों का अजीबो-गरीब रवैया भी जिम्मेदार है। जो दो तरह के दावे कर रहे हैं। कुछ किसान वे हैं जिनका साफ तौर पर कहना है कि हम लोगों ने किसी भी से अपनी जमीन बेचने का एग्रीमेंट नहीं किया है। वहीं कुछ किसान वे भी हैं जो मौखिक रूप से स्वीकार कर रहे हैं कि कुछेक साल पहले भोपाल के एक शख्स ललता शर्मा के जरिए जमीन बेचने के एग्रीमेंट किए थे। लेकिन उनके पास दस्तावेज के रूप में कुछ नहीं है। नतीजतन यह खुलासा नहीं हो पा रहा है कि उक्त जमीनें कौन खरीदना चाहता है। स्थानीय तहसीलदार प्रेमनारायणसिंह का कहना है कि कुछ किसान भोपाल गए थे और जमीन खरीदी के इश्तहार के जरिए दावा-आपत्ति मांगने वाले एड. मनीष रावतिया से मिले। उन्हें एड. रावतिया ने जवाब दिया है कि अगर आप लोगोंं का जमीन खरीदी संबंधी कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ है तो इस तथ्य को आपत्ति के रूप में स्वीकार करते हुए आप लोगों से कोई लेन-देन नहीं किया जाएगा। किसानों ने यह इश्तहार छपवाने वाले का नाम जानना चाहा तो एड. रावतिया ने व्यवसायिक प्रतिबद्धता का वास्ता देकर बताने से इनकार कर दिया।

अखबार में दावे-आपत्ति की सूचना से मिली जानकारी

बीते गुुरुवार को एक हिंदी दैनिक में करीब-करीब फुल पेज साइज में आम सूचना का प्रकाशन किया गया था। जिसे पढ़ने के बाद किसान सकते में आ गए थे। सूचना के अनुसार देवरी विस क्षेत्र की केसली तहसील के चक्कबिलेखी, सेमरा, ईदलपुर, खेरी और झिरिया गांवों के सैकड़ों किसानों से करीब 470 एकड़ जमीन खरीदी का अनुबंध किया गया था। अभी तक की जानकारी के अनुसार इस विज्ञापन का प्रकाशन किसी अज्ञात खरीदार ने भोपाल से कराया था। जिसमें किसानों के नाम, उनकी जमीन का रकबा और खसरा नंबर का उल्लेख था। सूचना के जरिए इन सभी से 30 दिन के भीतर उक्त खरीद पर दावा-आपत्ति मांगे गए थे।

12 साल पहले भोपाल के दलाल ने किसी कंपनी के लिए सौदे किए थे

तहसील कार्यालय में शिकायत करने आए किसान धनीराम, शिवराज, विक्रम आदि ने बताया कि हम लोगों को मालूम ही नहीं है कि हमारी जमीन कौन खरीद हैै और इसके लिए सहमति किसने दी। साथ ही उन्होंने बताया कि करीब 10-12 साल पहले भोपाल का एक जमीन दलाल ललिताप्रसाद शर्मा यहां सक्रिय था। उसने किसी कंपनी के नाम पर जमीन बेचने के लिए कुछ किसानों को राजी किया था। इसके बाद से वह गायब है। किसान राधेश्याम यादव ने बताया कि क्षेत्र में अज्ञात लोगों का गिरोह सक्रिय है जो हम लोगों के आधार नंबर, जमीनों के खसरा की नकल आदि निकालकर फर्जीवाड़ा कराने वालों को उपलब्ध करा रहा है। मुमकिन है कि यह काम इसी गिरोह की मदद से किया गया हो। 

 

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