बृजेश- महिमा चौरसिया की मौत के मामले के मुख्य आरोपी रंजन राय को उम्रकैद, आत्महत्या के दुष्प्रेरण के 6 आरोपी बरी

सागर। जिले के बहुचर्चित और सनसनीखेज बृजेश चौरसिया एवं उनकी पुत्री महिमा हत्याकांड में जिला अदालत ने शुक्रवार को अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना दिया है। जिला न्यायाधीश प्रशांत कुमार की अदालत ने मुख्य आरोपी, पश्चिम बंगाल निवासी रंजन राय को हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं 4 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, इस मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी अन्य 6 लोगों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
हत्या और सुसाइड की उलझी गुत्थी
सिविल लाइंस पुलिस की एफआईआर के मुताबिक, यह वारदात 16 जुलाई 2019 की रात की है। आरटीओ बाईपास रोड पर एक सेंट्रो कार लावारिस हालत में मिली थी। कार के भीतर बृजेश चौरसिया और उनकी पुत्री महिमा चौरसिया के शव बरामद हुए थे। जबकि पत्नी राधा चौरसिया बेसुध हालत में मिली थी। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि बृजेश ने अपनी बेटी की हत्या के बाद गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी रंजन राय ने बृजेश से हथियार दिलाने के नाम पर पैसे लिए थे और घटना वाले दिन वह उनके साथ ही था। रंजन राय ने ही महिमा चौरसिया की गोली मारकर हत्या की थी। अभियोजन पक्ष न्यायालय में यह साबित करने में सफल रहा कि रंजन राय ने ही जघन्य तरीके से बालिका की जान ली, जिसके बाद बृजेश ने खुदकुशी कर ली। एफएसएल जांच में ये साबित हुआ था कि इन पति-पत्नी व पुत्री ने कोल्ड ड्रिंक्स में नशीली दवा का सेवन किया था। जिस कार में ये लोग तफरी करने निकले थे वह, एक आरोपी राजेश मिश्रा की थी।
आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का था आरोप
घटना के समय पुलिस को बृजेश के पास से सात सुसाइड नोट मिले थे, जिनमें मनोज यादव, सुरेंद्र साहू, श्याम सुंदर सोनी, अनिल शुक्ला, राजेश मिश्रा, बृजेश केशरवानी और गौरव भारद्वाज पर प्रताड़ना और सूदखोरी के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि ‘आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण’ का आरोप इन पर सिद्ध नहीं होता है।अदालत में मृतक की पत्नी राधा चौरसिया ने बयान दिया कि बृजेश पर विभिन्न बैंकों का लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का कर्ज था और बैंक संपत्ति कुर्की के नोटिस भेज रहे थे। वहीं, मृतक के भाई राजेश ने स्वीकार किया कि बृजेश का करीब 600 लोगों से लेन-देन था। मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब गवाह मुन्नालाल ने खुलासा किया कि बृजेश ने उसे सुसाइड नोट का लिफाफा देते समय मौखिक रूप से कहा था कि “यदि कोई कर्ज वसूली के लिए परेशान करे, तो उसका नाम भी इसमें जोड़ देना।” इन बयानों के आधार पर कोर्ट ने मनोज यादव, सुरेंद्र साहू, श्याम सुंदर सोनी, अनिल शुक्ला और राजेश मिश्रा को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के आरोप से दोषमुक्त कर दिया।
दो आरोपियों का मामला हाईकोर्ट में है
इस मामले के दो अन्य आरोपी, बृजेश केशरवानी और गौरव भारद्वाज के संबंध में जिला अदालत ने कोई फैसला नहीं सुनाया है, क्योंकि उनका प्रकरण वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। करीब 6 साल तक चली इस लंबी कानूनी प्रक्रिया में आरोपी मनोज यादव और बृजेश केशरवानी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय घई ने पैरवी की।
नोट: फोटो Al जनरेटेड एवं प्रतीकात्मक है



