एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के एमडी के नाम पर ठगी, क्या कंपनी से लीक हो रहा है ग्राहकों का डेटा?

सागर। डिजिटल इंडिया के दौर में साइबर अपराधी अब सीधे बड़ी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों का नाम इस्तेमाल कर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला सागर जिले से सामने आया है, जहाँ एक पॉलिसी धारक से 1 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। इस घटना ने इंश्योरेंस कंपनी की डेटा सिक्योरिटी और कर्मचारियों की ईमानदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन बत्ती स्थित जीवी मेडिको विनोद कुमार जैन ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे आवेदन में बताया कि उनके पास ‘एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस’ की एक पॉलिसी (नंबर- 1461******) है। 23 अगस्त 2025 को उनके पास एक कॉल आया, जिसमें फोन करने वाले ने खुद का नाम प्रशांत त्रिपाठी बताया।
चौंकाने वाली बात यह है कि प्रशांत त्रिपाठी वर्तमान में इस कंपनी के एमडी हैं। जालसाज के पास पीड़ित की पॉलिसी की पूरी जानकारी थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि फ्रॉड करने वाला व्यक्ति या तो कंपनी का वर्तमान कर्मचारी है या कोई पूर्व कर्मचारी, जिसे ग्राहकों के गोपनीय डेटा तक सीधी पहुंच प्राप्त है। जालसाज ने खुद को कंपनी का अधिकारी बताकर पीड़ित को बकाया किस्त जमा करने का दबाव बनाया।
पीड़ित ने 25 अगस्त को 1,02,250 रुपये की राशि हृश्वस्नञ्ज के माध्यम से बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दी। इसके बाद आरोपी का मोबाइल बंद आने लगा।
कंपनी की भूमिका पर संदेह: 15 दिन बाद फिर आया कॉल
ठगी के करीब 15 दिन बाद, 9 सितंबर को पीड़ित के पास सुशील मंत्री नामक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को कंपनी का कर्मचारी बताया और फिर से किस्त जमा करने को कहा। जब पीड़ित ने हृश्वस्नञ्ज की जानकारी दी, तो बताया गया कि कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है। हैरानी की बात यह है कि जब पहली बार ठगी हुई, तब कंपनी को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? 15 दिन बाद दोबारा कॉल आना इस बात की ओर पुख्ता इशारा करता है कि कंपनी के भीतर बैठे लोग इस सिंडिकेट का हिस्सा हो सकते हैं।
मकरोनिया ऑफिस का गैर-जिम्मेदाराना रवैया
जब पीड़ित शिकायत लेकर सागर के मकरोनिया स्थित कंपनी की ब्रांच पहुंचे, तो वहां के स्टाफ और विवेक जैन नामक कर्मचारी ने मदद करने के बजाय पल्ला झाड़ लिया। कंपनी के अधिकारियों का यह कहना कि ‘हमारा ऑफिस इस तरह का लेन-देन नहीं करता, उनकी कस्टमर पॉलिसी पर सवालिया निशान लगाता है। आखिर एक ग्राहक अपनी समस्या लेकर स्थानीय ऑफिस नहीं जाएगा तो कहां जाएगा?
इस तरह के फ्रॉड से कैसे बचें
बीमा की किस्त हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, ऐप या अधिकृत पेमेंट गेटवे के माध्यम से ही भरें। किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए निजी खाते में ट्रांसफर न करें। कंपनी का कोई भी बड़ा अधिकारी (जैसे एमडी) व्यक्तिगत रूप से किस्त जमा करने के लिए फोन नहीं करता। यदि कोई खुद को कंपनी का कर्मचारी बताए, तो नजदीकी ब्रांच जाकर उसकी पुष्टि करें।पॉलिसी बंद होने या पेनल्टी लगने के नाम पर दबाव बनाने वालों से सावधान रहें। किसी भी वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें। www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। अपने नजदीकी थाने या साइबर सेल में लिखित आवेदन दें।
20/12/2025



