अपराध और अपराधी

चांदामऊ अग्निकांड: संदेही फईम खान पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई, दुष्कर्म के आरोप में भेजा गया जेल

सागर। नरयावली थाना क्षेत्र के चांदामऊ गांव में हुए चर्चित और हृदयविदारक अग्निकांड मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस ने करीब 25 दिनों के लंबे इंतजार और जांच के बाद मुख्य संदेही फईम खान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि फईम की गिरफ्तारी आगजनी के मामले में नहीं, बल्कि मृत लड़कों की छोटी बहन द्वारा लगाए गए शारीरिक शोषण के आरोपों के आधार पर हुई है।

क्या था पूरा मामला ? 

​दिसंबर की शुरुआत में चांदामऊ गांव में एक घर में अचानक आग लगने से सनसनी फैल गई थी। इस भीषण आग में दो नाबालिग भाई बुरी तरह झुलस गए थे, जिन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनकी बड़ी बहन भी इस अग्निकांड में गंभीर रूप से घायल हुई थी। शुरुआत में इस घटना को एक दुर्घटना माना जा रहा था, लेकिन कुछ दिनों बाद घायल युवती और उसकी मां ने गांव के युवक फईम खान पर जानबूझकर आग लगाने का सनसनीखेज आरोप लगाया।

नई कार्रवाई और पॉक्सो एक्ट

​अग्निकांड की जांच के बीच, मृत भाइयों की छोटी बहन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि फईम खान ने उसे सागर के एक होटल में ले जाकर उसका शारीरिक शोषण किया और उसे धमकाता रहा। जिला महिला पुलिस थाना (सिविल लाइंस) में मामला दर्ज होने के बाद नाबालिग के मजिस्ट्रियल बयान कराए गए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने फईम खान को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।

अग्निदाह पर अब भी संशय

​हैरानी की बात यह है कि जिस आगजनी की घटना में दो मासूमों की जान गई, उस मामले में पुलिस ने फईम पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। बताया जा रहा है कि पुलिस को आगजनी में फईम की संलिप्तता के सीधे और पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं, जिसके कारण केवल दुष्कर्म के मामले में ही गिरफ्तारी की गई है।

पुलिस और हिंदूवादी संगठनों की भूमिका

हिंदूवादी संगठन: इस मामले को लेकर जिले के हिंदूवादी संगठन शुरू से ही हमलावर रहे हैं। संगठनों द्वारा पुलिस प्रशासन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किए गए। फईम की जेल रवानगी को ये संगठन अपनी नैतिक जीत के रूप में देख रहे हैं, हालांकि आगजनी मामले में धाराएं न जुड़ने से असंतोष बरकरार है।

पुलिस प्रशासन: पुलिस की कार्यप्रणाली इस मामले में काफी सधी हुई लेकिन धीमी नजर आई। 25 दिनों तक एफआईआर न होने से पुलिस की छवि पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन पॉक्सो एक्ट में कार्रवाई कर पुलिस ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने की कोशिश की है। साक्ष्य न मिलने के नाम पर आगजनी में ढील देना पुलिस के लिए आने वाले दिनों में चुनौती बन सकता है।

30/12/2025

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