अपराध और अपराधी

शहीद के फर्जी वंशज बन कर दुकान लगाई, अब यूं खुली असलियत

                                               sagarvani.coml 9425172417
सागर । पहली फोटो में साफा पहने दिख रहा शख्स इन दिनों चर्चा में है। ध्रुवप्रताप सिंह बुंदेला नामक इसी शख्स को सागर पुलिस ने गत 18 सितंबर की रात सागर में देशी दारू के ठेके पर खड़ी फार्चुनर गाड़ी में 1 करोड़ 40 लाख रु नगदी के साथ पकड़ा है। पुलिस जांच में इस लड़के के वे सभी आका मुकर गए जिनके नाम इसने पुलिस को यह कहते हुए बताए कि यह रकम अमुक ‘भैया जी’ की है। जिनके नाम इसने बताए वे सभी इस युवक की फेसबुक की चित्रावली में इसके साथ विराजमान हैं। बहरहाल इन्कम टेक्स विभाग कार्रवाई कर रहा है, मामला दर्ज हो गया है। नोट क्लेम करने कोई नहीं आया है तो ध्रुव बुंदेला नामी इसी शख्स की बैंड बजेगी। विधि अनुसार यह रकम तो गई, साथ में पेनाल्टी के 28 लाख और सात वर्ष तक की सजा हो सकती है।… पर यह पोस्ट लिखने का मकसद कुछ दूसरा है जो इस शख्स के एक और फर्जीवाड़े से जुड़ा है!
 
कुछ महीने पहले यही शख्स स्वयं को 1842 के बुंदेला विद्रोह के नायक शहीद मधुकरशाह बुंदेला का वंशज बता कर, उनके समाधिस्थल पर आयोजित कार्यक्रम में सागर के विधायक और महापौर से खुद का सम्मान करा ले गया। इस से भी बड़ी विडंबना यह कि शहीद मधुकरशाह बुंदेला की गढ़ी नाराहट, जिला ललितपुर स्थित में निवास कर रहे उनके ओरिजनल वंशज विक्रमशाह बुंदेला इस कार्यक्रम में बिना साफा के भौंचक्के से खड़े हो कर ऐसा होते देखते रह गये। उन्होंने समारोह के आयोजकों से तो कुछ नहीं कहा लेकिन बाद में कुछ जानकारों को बताया कि इसका शहीद मधुकरशाह बुंदेला की वंश परंपरा से दूर दूर तक वास्ता नहीं है। नाराहट ग्राम से इसका इतना ही संबंध है कि इसके पिता भगवान सिंह बुंदेला यहां के सरस्वती शिशु मंदिर में कुछ समय के लिए पढ़ाते थे और उस दौरान उनका यह पुत्र ध्रुव बुंदेला किराए का मकान लेकर गांव में एक डेढ़ साल तक रहता था। हाल ही के नोट कांड की पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ध्रुवप्रताप बुंदेला मूलतः गुड़ा ककरुआ, महरौनी ब्लाक मड़ावरा जिला ललितपुर का मूल निवासी है। प्रभावशाली नेताओं और उनके पुत्रों के इर्द-गिर्द रहना इसका शौक है। राजनैतिक दल विशेष से इसे कोई लेना देना नहीं। कांग्रेस,भाजपा किसी भी दल से इसे परहेज नहीं। सूत्र बताते हैं कि खुद के व्यवसाय के नाम पर झांसी के किसी शिक्षण संस्थान में चाय समोसा की छोटी केंटीन है, लेकिन सत्ता के गलियारों में मंत्रियों और मंत्री पुत्रों के इर्द-गिर्द रहते हुए पिछले दो सालों से वीआईपी शैली में अपना जीवन यापन यह कर रहा है। सवाल उठता है कि एतिहासिक किरदार का वंशज बनने का आईडिया इसे कैसे आया। स्मरण करें कि दो तीन साल पहले फिल्म अभिनेता गोविंद नामदेव जी ने मधुकर शाह बुंदेला पर लिखी अपनी पुस्तक के मुंबई में हुए विमोचन समारोह में नाराहट से शहीद मधुकरशाह बुंदेला परिवार के वंशज मूल परिवार से विक्रमशाह बुंदेला को बुलाया था। अमिताभ बच्चन जी ने यह विमोचन किया और विक्रमशाह बुंदेला का सम्मान किया। कुछ समय बाद इसकी बधाई देने ध्रुव बुंदेला नामक यह युवक नाराहट में विक्रमशाह बुंदेला से मिला और उनके साथ फोटो खिंचा कर अपनी फेसबुक पोस्ट पर डाल ली। इसके बाद इसने सागर आकर खुद को शहीद परिवार का वंशज बता कर अपना परिचय देना शुरू कर दिया और यहां के कुछ नामी गिरामी फरिवारों से नाता जोड़ लिया। दिल्ली और भोपाल वाले अमुक “भैया जी” ने भी उसे सागर संभाग में फलानी बुंदेलखंड सेना नामक अपनी फेन फालोइंग बढ़वाने के नाम पर इसे शरण दे दी। तब से ये बंदूकों, फारचूनरों के साये में ‘स्वयंभू राजा’ बने घूम रहे हैं। इन राजा साहब की करीबी रिश्तेदारियां सागर पुलिस में आरक्षक लेबल पर हैं।… कर्म कैसे हैं सो सामने आ ही रहे हैं। इस कहानी से सबक यह है कि नेताओं को और उनसे भी ज्यादा नेता पुत्रों को अपने समर्थकों का कुनबा बढ़ाते हुए फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहिए अन्यथा उनके नाम से देशी दारू के ठेकों पर विधानसभा के टिकटों का वितरण और अफसरों के तबादलों की डीलें होने लगती हैं।
 
वरिष्ठ राजनैतिक विश्लेषक व पुराविद् डॉ. रजनीश जैन की फेसबुक वॉल से साभार

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!