महिला सरपंच ने जनपद कर्मियों संग किया 1करोड़ रु. का गबन ! बेटा देखता था कामकाज
कोरोना काल में मनरेगा के मद में मिली राशि से नहीं बनवाएं तालाब, कुएं, मैदान और श्मशान घाट, सरपंच समेत सात लोगों पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार

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सागर। राहतगढ़ ब्लॉक की सेमराहाट ग्राम पंचायत में 1 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के गबन का मामला सामने आया है। दो साल चली जांच के बाद कलेक्टर संदीप जीआर और जिला पंचायत सीईओ विवेक केवी ने तत्कालीन महिला सरपंच श्यामरानी अहिरवार समेत तत्कालीन पंचायत सचिव, एसडीओ, सब-इंजीनियर को गबन की राशि जमा करने के आदेश दिए हैं। अन्यथा उन्हें 30 दिन की सिविल जेल होगी। तत्कालीन सरपंच श्यामरानी के खिलाफ साल 2023 में नवनिर्वाचित सरपंच राधा ठाकुर ने राहतगढ़ जनपद पंचायत सीईओ से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पंचायत के पोर्टल में वे कोई काम नहीं दिख रहे। जिनके लिए तत्कालीन सरपंच श्यामरानी के द्वारा राशि निकाली गई। उदाहरण के लिए गांव में निर्मल नीर कूप, खेल मैदान, नवीन तालाब, सड़क, श्मशान के नाम पर लाखों रुपए की राशि तो निकली लेकिन यह काम गांव में कहीं भी मौजूद नहीं हैं।
कोरोना काल की आर्थिक मदद का किया गबन!
वर्तमान सरपंच के पति सुरेंद्रसिंह ठाकुर के अनुसार अधिकांश राशि का गबन वर्ष 2020-2023 के दौरान उस समय किया गया जब देश में कोरोना की लहर थी। केंद्र सरकार ने मनरेगा के मद में गांव के लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से कई कामों के लिए राशि आवंटित की थी। जिसमें इन लोगों ने गड़बड़ी की। जिला पंचायत सीईओ ने इस मामले में तत्कालीन सरपंच श्यामरानी, सचिव प्रमोद साहू और सब-इंजीनियर कंचन चौधरी के खिलाफ 25.48 लाख -25.48 लाख रुपए की रिकवरी के आदेश दिए हैं। इनके अलावा तत्कालीन सब-इंजीनियर जीशान कुरैशी के विरुद्ध 3.94 लाख,तत्कालीन प्रभारी एसडीओ एसके प्रजापति से 17.39 लाख रु., राजेश्वर सूर्यवंशी से 5.26 लाख रु. और बीएस यादव पर 2.83 लाख रु. की रिकवरी निकाली है। तत्कालीन एसडीओ प्रजापति, सूर्यवंशी और यादव से वसूली के लिए जिपं सीईओ प्राधिकृत नहीं हैं। इसलिए उन्होंने इस संबंध में कलेक्टर को कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा था। कलेक्टर कार्यालय से इस संबंध इन तीनों के खिलाफ वसूली नोटिस जारी हो गए हैं।
अब तक एफआईआर नहीं, आरोपी कोर्ट जाने की तैयारी में
एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि के गबन के मामले में प्रशासन ठोस कार्रवाई के मूड में नहीं है। यह आरोप गांव की सरपंच राधा ठाकुर के पति सुरेंद्रसिंह ने लगाया है। उनका कहना है कि इन सभी लोगों को अप्रैल व इसी महीने नोटिस जारी हो चुके हैं। लेकिन प्रशासन ने अब तक इन लोगों के खिलाफ एफआईआर नहीं कराई है। जबकि इस संबंध में मैं, स्वयं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की पीएस दीपाली रस्तोगी से मार्च 2025 मिला था। उन्होंने कमिश्नर, मनरेगा को संबंधितों के विरुद्ध एफआईआर कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन दो महीने गुजरने के बावजूद अब तक इन लोगों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई।
21/05/2025



