क्षत्रिय समाज को ढाल नहीं बनाना चाहता था, इसलिए अध्यक्ष नहीं बना: हीरासिंह
क्षत्रिय समाज के दोनों गुटों में बयानबाजी जारी, हीरासिंह गुट ने 17 अप्रैल को बैठक बुलाई, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापना को क्षत्रिय समाज में भांजी जा रही हैं आरोपों की तलवारें, बात दाल-बाफले की पार्टी से लेकर छत्रसाल की प्रतिमा के आगे लगे कचरे के ढेर तक पहुंची

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सागर। मुझे आज से बीस साल पहले क्षत्रिय समाज का अध्यक्ष बनाया जा रहा था। लेकिन मैंने मना कर दिया। क्योंकि मेरा मानना था कि किसी भी राजनीतिक परिवार के घर से अध्यक्ष बनाया जाता है तो भविष्य में वह समाज के बजाए स्वयं के हित में क्षत्रिय समाज को ढाल बनाने जैसे काम करेगा। आज समाज के कतिपय नेता यही काम कर रहे हैं जबकि हमारी समाज कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है। सब समझ रहे हैं कि उन्हें ढाल बनाकर कौन लोग राजनीति खेल रहे हैं। यह बयान जिला पंचायत अध्यक्ष हीरासिंह राजपूत ने दिया है। इधर उनके इस बयान से प्रतीत हो रहा है कि क्षत्रिय समाज के प्रभावशाली घरानों की राजनीतिक प्रतिद्वंदिता फिलहाल खत्म नहीं होगी। दोनों ओर से रोज बयानबाजी हो रही है। बता दें कि यह सारा विवाद शहर में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की प्रतिमा की स्थापना को लेकर उपजा है। जिपं अध्यक्ष राजपूत चाहते हैं कि यह मूर्ति केंद्रीय जेल की बाउंड्री के पास आईजी बंगले के सामने स्थापित हो। जबकि दूसरे गुट के नेता और क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष लखनसिंह बामोरा इस प्रतिमा को नगर निगम के सिटी स्टेडियम के बाहर स्थापित कराना चाहते हैं।
जेब से पैसे नहीं दिए, तीनों मंत्रियों की सहमति से सरकार ने राशि दी
राजपूत का कहना है कि क्षत्रिय समाज का अपना एक स्वाभिमान गौरवशाली और वीरता का इतिहास रहा है। क्षत्रिय समाज ने हमेशा अपना स्वाभिमान कायम रखा है। समाज के पहले भी अनेक अध्यक्ष जिनमें सौदान सिंह ठाकुर, बुंदेल सिंह बुंदेला, वीनू राणा, हरीराम सिंह जैसे वरिष्ठ जन अध्यक्ष रहे। वहीं फूलसिंह पण्डा, कृष्णासिंह महुआखेड़ा, राजेन्द्रसिंह मोकलपुर और एड.अनिलसिंह, साहबसिंह सागौनी जैसे लोगों ने समय-समय पर आपसी मनमुटाव, कुरीतियां, अशिक्षा आदि दूर करने जैसे प्रासंगिक कार्य किये गये, ताकि क्षत्रिय समाज का विकास और उत्थान हो सके। जहां तक वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की प्रतिमा के पैसे की बात है तो वह किसी व्यक्ति ने अपनी जेब से नहीं दिये। यह राशि सरकार ने दी। तब जिले से सरकार में तीन मंत्री थे। तीनों की सहमति से महाराणा की प्रतिमा के अलावा संत रविदासजी, कुशवाहा समाज के मंदिर के लिए एवं अटलबिहारी वाजपेयीजी की मूर्ति के लिए राशि प्रदेश सरकार ने दी। इसके लिए किसी एक व्यक्ति का श्रेय लेना सही नहीं है।
मूर्ति के आगे लगे कचरे के ढेर,दाल-बाफले के बहाने बुलाकर अध्यक्ष बने
राजपूत का कहना है कि महाराणा की प्रतिमा ऐसी जगह लगाई जानी चाहिए। जहां आने-जाने वाले लोग उनके दर्शन करें और शौर्य-पराक्रम को याद कर गौरान्वित महसूस करें। बुंदेलखंड केशरी महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा विजय टाकीज तिराहा के एक कोने में लगी है जहां कचरे के ढेर लगे रहते हैं। जिससे मूर्ति के दर्शन सालों नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि समाज इस बात से भी व्यथित है कि कतिपय नेताओं ने दाल-बाफले के बहाने अपने घर बगैर किसी के सलाह-मशविरे के अपने ही परिवार के सदस्य को समाज का अध्यक्ष घोषित कर दिया। अब यही लोग समाज के उत्थान को अनदेखा कर बयानबाजी कर रहे हैं। इससे समाज में रोष और विरोध पनप रहा है। इन बड़ी-बड़ी बातें करने वालों से पूछा जाना चाहिए कि क्षत्रिय समाज का भवन आज तक क्यों नहीं बना। समाज का कोई छात्रावास, कन्या क्यों नहीं हुआ। राजपूत ने समाज के लोगों से निवेदन किया है कि वे किसी राजनैतिक व्यक्ति के स्वार्थों की पूर्ति के लिए ढाल बनने बजाए स्वाभिमान के साथ समाज का उत्थान करने आगे आएं।
क्षत्रिय समाज की समिति का विस्तार
इधर जिला क्षत्रिय समाज सागर के संयोजक कृष्णासिंह महुआखेड़ा ने संचालन समिति में 70 नए सदस्य शामिल किए हैं। समिति की आगामी बैठक 17 अप्रैल को किला कोठी में बुलाई गई है। महुआखेड़ा के अनुसार इस बैठक में वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की प्रतिमा का स्थल का चयन, क्षत्रिय समाज के नवीन भवन निर्माण, सागर शहर के संस्थापक राजा ऊदन शाह की स्मृति में शहर के चारों तरफ प्रवेश द्वार समेत महाराणा प्रताप व महाराज छत्रसाल की जयंती के आयोजन आदि विषयों पर चर्चा की जाएगी। इधर समिति के नए सदस्यों में जिला पंचायत अध्यक्ष हीरासिंह राजपूत का भी नाम शामिल है। उनके अलावा फूलसिंह पड़ा, एड.चतुर्भुजसिंह राजपूत, कल्याणसिंह भापेल, पुष्पेंद्र सिंह भोलेराजा, पुष्पेंद्रसिंह मोनू भैया मोकलपुर आदि शामिल हैं।
13/04/2025



