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पूज्य सिंधी पंचायत: चुनाव प्रक्रिया शुरु, निवर्तमान अध्यक्ष का कार्यकाल सवालों के घेरे में

सिंधी समाज के इस चुनाव में महिलाओं को नहीं मिलता मताधिकार

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सागर। पूज्य सिंधी पंचायत, संत कंवरराम वार्ड के अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया शुरु हो गई है। 27अप्रैल को मतदान है। जिसमें सिंधु समुदाय के करीब 8 हजार मतदाता भाग लेंगे। रविवार को इस चुनाव प्रक्रिया पहला चरण नामांकन फार्म की बिक्री बंद होने के रूप में संपन्न हुआ। जानकारी के अनुसार 6 लोगों ने नामांकन फार्म खरीदे हैं। जिन्हें जमा करने की आखिरी तारीख 10 अप्रैल है। माना जा रहा है कि इसके बाद सिंधु समुदाय के इस चुनाव में कौन-कौन लोग दावेदारी कर रहे हैं, यह कुहासा हट जाएगा। इधर इस चुनाव प्रक्रिया को लेकर समुदाय के ही कुछ जागरुक लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि निवर्तमान अध्यक्ष भीष्म राजपूत, दोबारा इस पद पर आसीन होने के लिए तिकड़मबाजी कर रहे हैं। उदाहरण के लिए उन्होंने यकायक चुनाव लड़ने वालों की न्यूनतम आयु सीमा 50 वर्ष से 60 वर्ष कर दी। हालांकि समाज के जिम्मेदार लोगों ने आपत्ति ली तो उसे वापस 50 साल कर दिया गया। इसी तरह उन्होंने समाज के वरिष्ठ लोगों की सहमति के बगैर चुनाव कमेटी बना दी। इससे उसकी पारदर्शितापूर्ण कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया है। पूर्व के चुनाव में तत्कालीन अध्यक्ष के बजाए समाज के लोग कमेटी बनाते थे। ताकि चुनाव निर्विवाद व पारदर्शितापूर्ण हों।

8 हजार वोटर चुनेंगे अध्यक्ष महिलाओं को मताधिकार नहीं

पूज्य सिंधी समुदाय के इस चुनाव में नगर निगम सीमा, कैंट-सदर और मकरोनिया में रहने वाले सिंधी परिवार के 18 वर्ष से अधिक की उम्र वाले पुरुषों को वोट देने का अधिकार दिया गया है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में इस केटेगरी के करीब 8 हजार मतदाता हैं। एक जानकारी और ये है कि इस चुनाव में महिलाओं को मताधिकार नहीं दिया गया। ये बात और है कि पारिवारिक विवाद में यह पंचायत महिलाओं का पक्ष सुन उनके साथ न्याय करने के लिए जिम्मेदार है। सूत्रों का कहना है कि कुछ लोगों ने इस चुनाव में महिलाओं को भी मताधिकार देने की वकालत की। लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि जब महिलाओं को समानता से वोटिंग नहीं करने दे रहे तो फिर पुरुषों का मताधिकार भी सीमित कर केवल परिवार के मुखिया को यह जिम्मेदारी दे दी जाए। लेकिन पंचायत के निवर्तमान व पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया।

चुनावी प्रतिज्ञाओं पर खरे नहीं उतरे ”भीष्म”, निष्प्रभावी कार्यकाल!

सिंधु समुदाय के अंदरखानों के अनुसार निवर्तमान अध्यक्ष भीष्म राजपूत एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरने की जुगत में हैं। जिसकी शुरुआत उन्होंने चुनाव लड़ने की आयु सीमा बढ़ाने जैसा विवादित निर्णय और मनमाने ढंग से चुनाव कमेटी बनाकर कर दी है। इसके बावजूद वह इस चुनाव में जीत पाएंगे, ऐसा दावा पूरे विश्वास से नहीं किया जा सकता। इसके पीछे की मुख्य वजह ये है कि उनका यह करीब साढ़े तीन वर्षीय कार्यकाल लगभग निष्प्रभावी रहा। वर्ष 2021 में भीष्म में जो चुनावी प्रतिज्ञाएं की थीं। वह उन पर खरा नहीं उतरे। कई संवेदनशील मामलों में उनकी भूमिका खासी संदिग्ध रही।

सूदखोरों से परेशान शहर छोड़ भागे, युवा सट्टा खिलाते पकड़ाए

सिंधु समुदाय के कुछ लोगों का कहना है कि भीष्म ने अपने घोषणा-पत्र में समुदाय के उन लोगों की विशेष मदद करने का आश्वासन दिया था। जो अपने ही या अन्य समुदाय के लोगों के कर्ज के मकड़जाल में उलझे हुए हैं। लोगों का कहना है कि भीष्म ने ऐसे किसी भी मामले में खास रुचि नहीं ली। नतीजा ये हुआ कि शहर में फल व्यवसायी के रूप में एक अलग नाम व साख बनाने वाले फ्रूट किंग ज्ञानचंद कुकरेजा को पूरे परिवार समेत शहर से भागना पड़ा। बीते दिनों उसे चेक बाउंस के एक मामले में जेल की भी हवा खाना पड़ी। इसी तरह से सिविल लाइंस के नामचीन हर्ष किराना स्टोर्स के मालिक कमल हिंदूजा को भी सूदखोरों की प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। आखिर मेें वह भी एक प्लाट बिक्री घोटाले में इस समय सलाखों के पीछे है। इसके अलावा भीष्म ने अपने चुनाव घोषणा-पत्र में समुदाय के युवाओं को क्रिकेट सट्टे से दूर करने के प्रयास की बात कही थी। लेकिन वर्तमान में सच्चाई ये है कि संत कंवरराम वार्ड, सुभाषनगर, तुलसीनगर में ंिसंधु समुदाय के दर्जनों युवक क्रिकेट का सट्टा खिला रहे हैं। निवर्तमान अध्यक्ष इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाए।

पंचायत का लेखा-जोखा नहीं दिया वैवाहिक विवादों में संदिग्ध भूमिका

समुदाय के लोग निवर्तमान अध्यक्ष राजपूत पर अपने इस साढ़े तीन वर्षीय कार्यकाल में पूज्य सिंधी पंचायत की आय-व्यय का लेखा-जोखा एक बार भी सार्वजनिक नहीं किया। बता दें कि समाज के कुछ लोग पंचायत को गरीब लोगों की मदद के लिए हर साल एक निश्चित राशि देते हैं। इसके अलावा विवाह जैसे अवसरों पर भी पंचायत को दान राशि मिलती है। राजपूत पर एक आरोप यह भी लगाया जाता है कि वैवाहिक विवादों के निपटारे में उनकी भूमिका संदिग्ध रही है। जो समाज हित में नहीं मानी जा सकती। इधर इन सभी आरोप-प्रत्यारोपों को लेकर निवर्तमान अध्यक्ष का कहना है कि सूदखोरों से परेशानी, सट्टा, झगड़े जैसे मामलों में कोई मेरे पास नहीं आया। मैं भी घर बैठे कोई बुराई नहीं लेना चाहता। वैवाहिक विवादों में मेरी भूमिका सदैव निष्पक्ष रही है। पंचायत की आय का लेखा-जोखा समय-समय पर कार्यालय की दीवार पर चस्पा किया जाता है। 

06/04/2025

 

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