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राजघाट का जलस्तर पिछले साल से 01 मीटर नीचेे, फिलहाल जलसंकट के आसार नहीं

मौसम में गरमाहट बढ़ने के बाद राजघाट डेम का जलस्तर 510.85 मीटर पर आया

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सागर। गर्मी का दौर शुरु होते ही शहर के पेयजल स्रोत राजघाट डेम में पानी के भराव का स्तर 510.85 मीटर पर आ गया है। जो पिछले साल इसी दिन के मुकाबले 01 मीटर कम है। इसके बावजूद शहरवासियों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। अगले 70 दिन यानी मानसून के आने तक जल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। पिछले साल राजघाट में 06 अप्रैल 2023 को जलस्तर 511.85 मीटर था। यहां बता दें कि पिछले साल अप्रैल-मई में बेमौसम बारिश हुई थी। जिसके चलते राजघाट का जलस्तर ऐतिहासिक रूप से बढ़ गया था। इसलिए पिछले साल के आंकड़े से इस साल के जलस्तर की तुलना करना भी ठीक नहीं है।

प्रचंड गर्मी भी पड़ेगी, तब भी जलस्तर मेन्टेन रहेगा

नगर निगम में वाटर सप्लाई एवं राजघाट परियोजना से जुड़े जानकारों का कहना है कि मौसम का पारा 40-42डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंच जाए। तब भी 15 जून तक डेम में पानी के भंडारण का स्तर 508 मीटर तक ही आ पाएगा।वर्तमान में राजघाट में 510.85  एमएसएल पानी है। प्रतिदिन बांध से 60 एमएलडी पानी सप्लाई की जाती है। इस हिसाब से प्रतिदिन ढाई से तीन सेंटीमीटर बांध का जलस्तर घट रहा है।

 पानी खींचने दो सम्पवेल लगाए जा सकते हैं

इधर निगम के एक दूसरे धड़े की माने तो जून महीने में बांध का जल स्तर 507 एमएसडी पर पहुंचने के बाद जल सप्लाई में परेशानी आने लगती है। राजघाट बांध से शहर सहित उपनगरीय क्षेत्र मकरोनिया और कैंट क्षेत्र के करीब 40 हजार घरों को पीने के लिए पानी की सप्लाई की जाती है। इसके लिए नगर निगम द्वारा राजघाट बांध से सम्पवेल में पानी खींचने के लिए स्थायी तौर पर दो पंप लगाना पड़ सकते हैं।

और इधर थम नहीं रही शहर में पानी की बर्बादी

राजघाट बांध में तेजी से जलस्तर गिरने के बाद भी शहर में पानी की बर्बादी अब भी नहीं थम रही है। जगह-जगह बिना टोंटी वाले नलों व लीकेज से हजारों गैलन पानी व्यर्थ बह रहा है। साफ पानी के व्यर्थ बहने से नगर निगम को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है तो वहीं यह लापरवाही शहर के सभी लोगों के लिए गर्मी के समय संकट बन जाती है। दो दिन पहले ही टाटा कंपनी की चूक के चलते पथरिया जाट में पाइपलाइन फट गई। जिसके चलते लाखों गैलन पानी बह गया। इस मामले में नगर निगम के जलप्रदाय शाखा के एई रामाधार तिवारी का कहना है कि, गर्मियों के मौसम में पानी की एक-एक बूंद कीमती है। किसी भी स्तर पर बरबादी सही नहीं है। पाइपलाइन फटने के मामले में टाटा कंपनी को नोटिस दिया जा रहा है। बता दें कि अभी भूतेश्वर रोड, शनीचरी, तिलकगंज, सिविल लाइन, सूबेदार वार्ड, परकोटा, तुलसीनगर, भगवानगंज आदि क्षेत्रों में नल आने के दौरान बड़ी संख्या में पानी व्यर्थ ही बहता रहता है।

07/04/2024

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