रजिस्ट्रार ने एफआईआर की ऐसी जल्दबाजी स्वयं की नियुक्ति वाली फाइल गुमने में क्यों नहीं दिखाई
विवि प्रशासन नेे नि:शक्त विद्यार्थियों के खिलाफ नहीं की पुलिस कार्रवाई, उत्पात के आरोपियों को सोमवार को प्रॉक्टोरियल बोर्ड कर सकता है तलब

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सागर। डेढ़ दर्जन से अधिक विद्यार्थियों के खिलाफ बलवा, तोड़-फोड़, एकराय होकर हमला करने जैसे गंभीर आरोपों के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज कराने से विवि प्रशासन का दोहरा चरित्र उजागर हुआ है। एक तरफ विवि के प्रभारी कुल-सचिव सत्यप्रकाश उपाध्याय कतिपय विद्यार्थियों द्वारा हंगामा और तथाकथित पत्थरबाजी के खिलाफ दौड़े-दौड़े सिविल लाइंस थाने पहुंच गए और रिपोर्ट करा दी। वहीं दूसरी ओर स्वयं की नियुक्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइल के मामले में अब तक एफआईआर नहीं करा पाए हैं। थाने में आवेदन देकर खाना पूर्ति कर ली। बता दें कि एक महीना पहले प्रभारी कुल-सचिव उपाध्याय ने सिविल लाइंस थाने में एक आवेदन दिया था। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मेरी नियुक्ति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण फाइल समेत अन्य दस्तावेज पूर्व कुल-सचिव आरके प्रधान के पास है। यह फाइल विवि की संपत्ति है, जिसे वह लौटा नहीं रहे। इसलिए पुलिस उनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करें।
पुलिस ने बयान देने थाने बुलाया तो चुप्पी साध ली
सिविल लाइन थाने ने इस आवेदन पर उपाध्याय को बयान देेने थाने बुलाया। मोबाइल पर कॉल करने के बाद उन्हें लिखित में भी सूचना दी गई। लेकिन वह नहीं आए। तब से यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। आवेदन में उपाध्याय ने कहा था कि विवि से सेवाएं समाप्त होने के बाद पूर्व कुल सचिव प्रधान ने लिखित जवाब दिया था कि विवि की कुछ फाइलें, दस्तावेज उनके पास हैं। दूसरी ओर प्रधान ने मीडिया द्वारा सवाल पूछने पर विवि प्रशासन के इस दावे का सिरे से खंडन किया था कि उनके पास एसपी उपाध्याय की नियुक्ति समेत अन्य कोई फाइल, दस्तावेज हैं।
कुल-सचिव की नियुक्ति को लेकर उठते रहे हैं सवाल
प्रभारी कुल सचिव उपाध्याय की नियुक्ति हमेशा सवालों के घेरे में रही है। उनकी इस नियुक्ति में धांधली का आरोप लगाते हुए विवि के ही एक पूर्व छात्र मनीष बोहरे ने प्रधानमंत्री कार्यालय नई दिल्ली से लेकर महामहिम राष्ट्रपति तक शिकायत की थी। जिसके बाद बीते महीनों में कुलपति डॉ. नीलिमा गुप्ता ने कुल-सचिव की भर्ती संबंधी फाइल तलब की। लेकिन वह नहीं मिली। प्रभारी कुल-सचिव ने जवाब दिया कि मेरी भर्ती संबंधी फाइल तत्कालीन कुल सचिव प्रधान के पास है। उन्होंने अपना जवाब पुख्ता करने के लिए इस संबंध में सिविल लाइंस थाने में एक आवेदन भी दे दिया। चर्चा है कि अगर यह पूरी फाइल मिल जाए तो विवि की भर्ती प्रक्रिया पर कई बड़े सवाल खड़े हो सकते है। फाइल क्यों नहीं मिल रही। इससे किसे फायदा है।
नि:शक्त विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज नहीं कराई एफआईआर
विवि प्रशासन ने दो दिन पुराने घटनाक्रम में नि:शक्त विद्यार्थियों के बारे में पुलिस को कोई शिकायत नहीं दी है। विवि के पीआरओ डॉ. विवेक जायसवाल का कहना था कि नि:शक्त विद्यार्थियों ने कोई हंगामा नहीं किया। वे शांतिपूर्वक अपनी बात रख रहे थे। लेकिन इन विद्यार्थियों की आड़ में कतिपय अन्य छात्रों ने विवि के अधिकारियों के बारे में अर्नगल टीका-टिप्पणी की। कुलपति की कार पर पथराव किया। इसलिए उनके खिलाफ रिपोर्ट कराई गई। इधर इस पूरे मामले में सोमवार को प्रॉक्टोरियल बोर्ड एफआईआर में नामजद विद्यार्थियों को तलब कर सकता है। 18/03/2024



