पीएम मोदी का 10 साल पुराना वीडियो शेयर, विवि के हजार करोड़ रु. के घोटाले पर कसा था तंज
व्हिसल ब्लोअर ने शेयर किए भाषण और नए-पुराने घोटालों की फेहरिस्त

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सागर। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सागर आ रहे हैं। उनके इस दौरे को लेकर एक ओर भाजपा तैयारियों में जुटी है। वहीं दूसरी ओर पुलिस-प्रशासन मुस्तैद है। इसी दौर में डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि में एक वीडियो क्लिप खूब शेयर किया जा रहा है।
यह वीडियो क्लिप वर्ष 2014 का है। जब प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने कजलीवन मैदान के मंच से सागर विवि में 01 हजार करोड़ रुपए के घोटाले को लेकर तत्काली कांग्रेसनीत यूपीए सरकार पर तंज कसा था। वीडियो वायरल करने वाले खेमा का कहना है कि ऐसा लगता है कि मोदी उस दिन केवल भाषणबाजी कर के गए थे, क्योंकि बीते 10 साल में इस घोटाले को अंजाम देने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बल्कि घोटाले की रकम जरूर 01 हजार करोड़ से 05 हजार करोड़ रुपए पर पहुंच गई। बहरहाल इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदीजी यह बोलते दिखाई दे रहे हैं कि, कांग्रेस के सी का मतलब करप्सन, भ्रष्टाचार। ये कांग्रेस का दूसरा नाम हो गया है। मुझे किसी ने बताया कि यहां की सागर यूनिवर्सिटी, जो सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनी। कोई कहता है कि एक अंग्रेजी अखबार डिटेल रिपोर्ट छापी है। और कहते हैं कि 1000 करोड़ रुपए का घपला हो गया। भाइयो-बहनों ये हजार करोड़ रुपए किसके हैं। किसके हैं…? जनता-जनार्दन के हैं……… क्या उसको लूटने का अधिकार दे देंगे। अगर एक यूनिवर्सिटी में इतना घपला होता है तो हिंदुस्तान में कहां-कहां घपला होता होगा।
भाषणबाजी से सरकार भले बदल गई, भ्रष्टाचार कभी बंद नहीं हुआ
इस वीडियो को शेयर करने वाले सीबीआई के व्स्हिल ब्लोअर अरविंद भट्ट का कहना है कि, मोदी जी ने 10 साल पहले ऐसा ओजमय भाषण दिया था कि तभी तय हो गया था कि वे प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। इसके साथ ही विवि प्रेमियों में यह आस बंध गई थी कि विवि में होने वाले घपलों की त्वरित जांच होगी। दोषियों में कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके भाषणों से दादा लक्ष्मीनारायण यादव चुनाव जीत गए। मोदीजी प्रधानमंत्री बन गए लेकिन भ्रष्टाचार कभी बंद नहीं हुआ। हद तो यह है कि विवि के एक पूर्व कुलपति डॉ. एनएस गजभिए को सीबीआई द्वारा गिरफ्तार कर ३ महीने तक न्याययिक हिरासत में रखने का भी कोई असर नहीं पड़ा। तत्कालीन कुलपति डॉ. एनएस गजभिए की सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के सिवाए कुछ नहीं हुआ।
इन गड़बड़ी-घोटालों के आरोपों का विवि प्रशासन नहीं देता जवाब: भट्ट
– 2009 में केंद्रीय विवि बनने के बाद तत्कालीन कुलपति डॉ. गजभिए ने 82 शिक्षकों की रिक्तियों के विरुद्ध 176 पद पर नियुक्तियां की गईं।
– जबलपुर उच्च न्यायालय द्वारा एक रिट पिटीशन के संबंध में 08 मार्च 2018 को जारी निर्देशों का पालन आज तक नहीं किया गया।
– विवि के विजिटर यानी महामहिम राष्टï्रपति द्वारा गठित जांच कमेटी की रपट पर आज तक विवि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की। जबकि यह रपट कमेटी ने वर्ष 2021 में ही विवि प्रशासन को सौंप दी थी।
– वर्ष 2010, 2012 में उपकुलसचिव, सहायक कुलसचिव के पद पर अपात्र होने के बावजूद कतिपय लोगों को नियुक्त किया गया। अपात्रता जाहिर होने पर कार्रवाई करने के बजाए, उन्हें प्रमोट कर दिया गया।
– वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में भी एमबीए, कॉमर्स, इकोनॉमिक्स, लाइब्रेरी साइंस विभाग में अपात्रों को एसोसिट प्रोफेसर, प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया गया।
– तत्कालीन कुलसचिव रंजनकुमार प्रधान को विवादित ढंग से नियुक्त किया। बाद में बगैर वैधानिक कार्रवाई किए बाहर कर दिया। उनकी जगह स्वयं की नियुक्ति को लेकर सवालों में घिरे डिप्टी रजिस्ट्रार को कुलसचिव का प्रभार दे दिया गया।
– पैरामेडिकल विभाग में अपात्र व्यक्तियों को शिक्षकों के पद पर नियुक्त किया गया।
24/04/2023



