चौपाल/चौराहाविविधा

बकवास करता है….इसे जेल भेज दो..!

यह किसान हैं मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के ग्राम खुरपा का। नाम है पीके पुरोहित, पहले रेल्वे में नौकरी करते रहे, अब रिटायर हो गए। सोचा अपनी जमीन पर खेती करेंगे, अनाज उपजाएँगे। गांव पहुंचे तो बारिश के मौसम में सड़क की हालत देखी न गई, छोटे स्कूल जाते बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और आसपास के आधा दर्जन ग्रामीणों का दर्द देखा न गया। 61 साल के बुजुर्ग ने हिम्मत की और ग्राम पंचायत स्तर से सीएम हेल्प लाइन तक सड़क के लिए आवेदन कर दिया। अधिकारी यहां से वहां चक्कर लगवाते रहे। 2 किलोमीटर की यह सड़क बुजुर्ग को मीलों दौड़ाती रही पर सड़क बन न सकी। किसी ने बताया कलेक्टर नरसिंहपुर के पास जाओ, बड़ा अच्छा अधिकारी है, लोकसेवक है तुम्हें न्याय और दोषियों को सजा मिलेगी। 21 अगस्त 2018 दिन मंगलवार को पीके पुरोहित कलेक्टर नरसिंहपुर की जनसुनवाई में अपना दुखड़ा सुनाने पहुंच गया। लाईन में लगा, नम्बर आया तो कलेक्टर साहब ने समस्या पूछी। बुजुर्ग ने सब कागज सामने रख दिया, बताया कि साहब सड़क नहीं बन रही। कलेक्टर ने कहा आपकी यह समस्या पीडब्ल्यूडी हल करेगा, बुजुर्ग पीडब्ल्यूडी की टेबिल पर पहुंचा, वहां कोई नहीं था तो बुजुर्ग वापस कलेक्टर को यह बताने चला गया। साहब को बताया कि वहां कोई नहीं हैं, उनसे कहा कि साहब बुजुर्ग आदमी हूँ, हर जिम्मेदार को अपने गांव की पीड़ा सुना चुका पर हल नहीं निकल रहा। साहब ने कहा तुम्हारे कहने से रोड नहीं बन जायेगी। बुजुर्ग ने कहा साहब, आप तो बड़े अधिकारी हैं लोग आपसे फरियाद सुनाते हैं अगर समस्याएं हल नहीं होंगी तो लोग कहाँ जाएंगे। साहब को गुस्सा आ गया, लाल पीले हो गये, कहा बकवास करता है…. और कहा इसे जेल भेज दो। बुजुर्ग ने कहा साहब हो सकता है मुझसे गलती हो गई जो सड़क का आवेदन लेकर आ गया, हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाया, बुजुर्ग की एक न सुनी और एक सिपाही उस बुजुर्ग को लेकर थाना कोतवाली नरसिंहपुर आ गया। थाने में कुछ घंटे बैठाकर रखा, टीआई ने पूछा दादा क्यों आये हो तो दादा ने उन्हें सब बता दिया। टीआई ने कहा कोई बात नहीं कुछ नहीं होगा। फिर टीआई साहब के पास एक फोन आया। कागजों पर पेन जल्दी चलने लगे, लिखा पढ़ी हुई, दस्तखत करवाये तो बुजुर्ग ने पूछा यह सब क्या है। पुलिस ने बताया आप पर 151 की कार्रवाई की गई है। बुजुर्ग को एसडीएम कोर्ट ले जाया गया, यहाँ एसडीएम साहब नहीं थे, फोन से स्टाफ ने बात की, कागजों पर कुछ लिखा और पुलिस वाले के हाथ थमा दिया। बुझे चेहरे और उदास मन से पुलिस वाले ने बुजुर्ग से कहा आपको जेल जाना होगा। यह शब्द बुजुर्ग ने सुने तो 61 साल की जिंदगी एक पल में नजरों के आगे घूम गई। बुजुर्ग को जेल भेजा गया, चार दिन बाद 25 अगस्त 2018 कोदस एकड़ की एक करोड़ की बही पर जमानत मंजूर हुई। जब बुजुर्ग जेल से बाहर आया तो उसकी प्रतिष्ठा, मान सम्मान सब खत्म हो चुका था, इन दिनों में वह कई बार मरा, आत्मा उसे कई मर्तबा कचोटती रही पर जेल की ऊंची दीवारों से हर बार उसकी आवाज वापस लौट आती। बुजुर्ग जेल से वापस आया तो ठान लिया कि सड़क भी बनवाकर रहूंगा और उसके साथ हुए अन्याय की लड़ाई भी लड़ूंगा। जेल से लौटकर बुजुर्ग ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिया घटना दिवस की सीसीटीव्ही फुटेज सहेजने और कलेक्टर पर कार्रवाई की बात भी कही। जब बुजुर्ग थक गया तो 61 वर्ष की हड्डियों ने जोर मारा, खुदको समेटा और दुनियां के सामने अपना दर्द बयां कर दिया। कलेक्टर नरसिंहपुर ने बुजुर्ग के इन आरोपों का खंडन किया है, कलेक्टर कहते हैं यह शराब पिये था, हुड़दंग कर रहा था इसलिए थाने भिजवाया। हो सकता है बुजुर्ग नशे में हो, पर जो नशा अफसरों के सिर चढ़कर बोल रहा है उसका उतारा नहीं हो पा रहा है। आप बुजुर्ग का दर्द सुनेंगे तो शायद आपको एहसास हो कि इस उम्र में जेल जाना क्या होता है, उसका कुसूर सिर्फ इतना है कि वह चाहता है दो किलोमीटर की सड़क बन जाए, पर इस सड़क ने उसे 4 दिन जेल की हवा खिला दी। बुजुर्ग पीके पुरोहित को बूट पहनना पसंद नहीं पर उनकी मजबूरी है कि खस्ताहाल सड़क पर वह इनके बिना चल नहीं सकते। इस मामले में सब चुप हैं, मौन इसलिए भी हैं कि सरकारी दावों की कलई खुल जाएगी और नेताओं के वादों की असलियत सामने आ जायेगी इसलिए जनसुनवाई जारी रहे, समस्याएं हल हों या न हों पर सीएम का चेहरा मुस्कुराता रहे।
Date-26 अगस्त 2018

समीर खान
नरसिंहपुर

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