आबकारी स्टाफ बना अवैध शराब विक्रेता! वेयर हाउस से बगैर खरीद दुकानों पर कहां से आ रहा स्टॉक ?

सागर। जिले के कतिपय आबकारी अधिकारी-कर्मचारी अवैध शराब विक्रेता बन बैठे हैं ! ये आरोप हम नहीं लगा रहे। ये तो उन पांच सरकारी शराब दुकानों के स्टॉक के आंकड़े बोल रहे हैं। जहां बीते 7-8 दिन में शासकीय विदेशी व देसी मदिरा भंडारगृहों से दो- पांच पेटी से ज्यादा शराब नहीं खरीदी गई। मतलब साफ है कि इन दुकानों पर कतिपय शराब तस्करों का और पास की प्राइवेट लाइसेंसी शराब दुकान का माल खपाया जा रहा है। बता दें कि इस समय जिले में पांच दुकान गढ़ाकोटा-1, जमुनिया, कर्रापुर, मधुकरशाह वार्ड(तहसीली) और गुजराती बाजार (रेलवे स्टेशन के सामने) का संचालन शासन द्वारा किया जा रहा है। इनमें से जमुनिया और मधुकरशाह वार्ड का चार्ज आबकारी एसआई रोशनी उरेती और गुजराती बाजार व कर्रापुर का प्रभार सिया राम चौधरी के पास है।
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भंडारगृह से माल उठाने की छूट, लेकिन नहीं ले रहे
शासन के नियमानुसर, जिन दुकानों का संचालन आबकारी विभाग को करना पड़ता है। वहां प्राइवेट ठेकेदार की तर्ज पर सरकारी वेयर हाउसों से देसी-विदेशी शराब का आवंटन, सरकारी नियंत्रण में चल रही दुकान के संबंधित प्रभारी अधिकारी को करना होता है। लेकिन इन लोगों द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा। सूत्रों के अनुसार इसका सीधा लाभ समीपस्थ लाइसेन्सी ठेकेदार व यहां -वहां अवैध शराब बेचने वालों को मिल रहा है। जबकि शासन को आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है। उदाहरण के लिए शहर की मधुकर शाह और गुजराती बाजार दुकानों की रूटीन टाइम में रोज की बिक्री 2- 2.50 लाख रु. है। लेकिन वर्तमान में इन दुकानों की ऑन रिकार्ड बिक्री 50-70 हजार रु. रोज की हो गई है। अगर इन दुकानों पर प्राइवेट ठेकेदार की भांति 2-2.50 लाख रु. की बिक्री आती है तो शासन को 10% की दर से 20- 25 हजार रु. वेट मिलेगा। लेकिन इन दुकानों में शासकीय खरीदी के बजाए अवैध तरीके से लाया गया माल ऑफ द रिकॉर्ड बेचा जा रहा है।
सिपाही गायब, चार-चार सेल्समैन
सरकारी शराब दुकानों में धांधली के लिए केवल मैदानी ही नहीं कार्यालयीन स्टाफ भी जिम्मेदार है। जानकारी के अनुसार जिले में इस समय 22 सिपाही हैं। लेकिन इनमें से केवल 5 को दुकानों पर ड्यूटी दी गई है जबकि दर्जन भर को ऑफिस में बैठाया गया है। दुकान पर एक सिपाही की मौजूदगी का फायदा वहां मौजूद 4-4 अवैध सेल्समैन बाहरी शराब को खपा कर उठा रहे हैं। हालांकि इस सब के बारे में सिपाही और प्रभारी उपनिरीक्षक को जानकारी नहीं हो, ऐसा संभव नहीं है।
प्रभारी सहायक आयुक्त लंबी छुट्टी पर !
सरकारी शराब दुकानों पर चल रहे अवैध शराब के खेल के बीच एक और जानकारी मिली है। चर्चा है कि जिले की प्रभारी आबकारी सहायक आयुक्त कीर्ति दुबे अवकाश पर हैं। सूत्र बताते हैं कि पिछले महीने चली टेंडर प्रक्रिया में उनके उदासीन व गैर-जिम्मेदाराना रवैए को भोपाल व ग्वालियर में बैठे अफसरों ने गंभीरता से लिया था। चर्चा है कि अफसरों से टेलीफोनिक बातचीत के बाद दुबे पिछले महीने ही मेडिकल लीव पर निकल गईं। यहां बता दें कि प्रभारी सहायक आयुक्त ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान नए-पुराने आबकारी ठेकेदारों से प्री- बिड सरीखा को संपर्क नहीं किया। जिसके चलते कई-कई चरण में शराब के टेंडर करना पड़े। बहरहाल शासन ने सागर की 5 दुकान समेत प्रदेश की सभी सरकारी दुकानों के टेंडर के लिए उनकी आरपी से 35% कम राशि पर टेंडर स्वीकृति का निर्णय लिया है।…..9425172417
08 / 04/2026



