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मंडी टैक्स विवाद: करोड़ों रुपए की वापसी में ”झोल”, क्या डकार ली जाएगी बीड़ी निर्माताओं के हक की राशि?

सागर। कृषि उपज मंडी समिति सागर में तंबाकू पर लगाए गए मंडी टैक्स को लेकर तीन दशक से चल रहा कानूनी विवाद अब एक नए मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने बीड़ी निर्माताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए टैक्स के रूप में वसूली गई करोड़ों की राशि वापस लौटाने का आदेश दिया था। इधर कई साल तक मंडी प्रशासन ने इस संबंध में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया। वह तो बीते महीनों में जब भारतीय रिजर्व बैंक ने अन-ऑपरेट एकाउंट्स की राशि राजसात करने का अभियान चलाया तो मंडी प्रशासन ने इस मामले में सक्रियता दिखाई और मंडी प्रशासन व बीड़ी कारोबारियों के इस ज्वाइंट एकाउंट को बंद होने से बचा लिया। लेकिन अब इस एकाउंट में जमा राशि के वितरण को लेकर मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि रिकॉर्ड की कमी और पारदर्शिता के अभाव में इस बड़ी रकम की ”बंदरबांट” की जा सकती है।

90 के दशक में मंडी शुल्क पर विवाद के चलते खोला गया था एकाउंट

यह विवाद 90 के दशक का है, जब कृषि उपज मंडी समिति ने तंबाकू पर टैक्स लगाया था। बीड़ी उद्योगपतियों ने इसे इस आधार पर चुनौती दी थी कि तंबाकू गुजरात जैसे अन्य राज्यों से प्रोसेस्ड होकर आती है, जहां पहले ही टैक्स चुकाया जा चुका होता है। सुनवाई के दौरान न्यायालय के निर्देश पर एसबीआई की गुजराती बाजार शाखा में एक ज्वाइंट एकाउंट खुलवाया गया था, जिसमें सभी बीड़ी निर्माताओं द्वारा जमा टैक्स की राशि जमा की गई। अब सुप्रीम कोर्ट ने टैक्स को निरस्त कर इस खाते में जमा लगभग 3 करोड़ की राशि संबंधित फर्मों को लौटाने का आदेश दिया है।

मंडी प्रशासन की चुप्पी और रिकॉर्ड पर संशय

मंडी सूत्रों का कहना है कि इस राशि पर क्लेम करने के लिए बीड़ी एंड टोबैको मर्चेंट एसोसिएशन ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी नई गल्ला मंडी कार्यालय में जमा करा दी है। लेकिन कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारी इस सब से अनभिज्ञता जता रहे हैं। आचरण ने जब मंडी के अकाउंटेंट अजय सक्सेना से इस संबंध में चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि,कोर्ट से अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। इसलिए इस राशि को बीड़ी काराबोरियों को सौंपने का सवाल ही नहीं उठता। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि, अगर फैसला व्यापारियों के पक्ष में आता है तब आप यह राशि कैसे वितरित करेंगे। जवाब में उन्होंने कहा कि, 25 साल पुराना रिकॉर्ड है। मुमकिन है कि नष्ट हो गया हो। बहरहाल एकाउंटेंट सक्सेना का यह जवाब बीड़ी निर्माताओं के बीच बेचैनी पैदा कर सकता है। आखिर में सवाल ये उठता है कि यदि मंडी के पास डेटा नहीं है, तो वह असली हकदारों की पहचान कैसे करेगी? क्या व्यापारियों से रिकॉर्ड मांगे जाएंगे या फिर अपनी मर्जी से सूची तैयार कर ली जाएगी?

प्रभावशाली बीड़ी फर्म की सांठगांठ और कमीशनखोरी की बू

मंडी सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पर्दे के पीछे से खेल शुरू हो चुका है। चर्चा है कि एक प्रभावशाली बीड़ी फर्म के नुमाइंदे ने मंडी बोर्ड ऑफिस और बैंक शाखा में संपर्क कर इस पूरी राशि को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिशें तेज कर दी हैं। वहीं, मंडी प्रशासन द्वारा जमाकर्ता फर्मों की सूची सार्वजनिक न करना ”कमीशनखोरी” और ”मैनुपुलेशन” की संभावनाओं को जन्म दे रहा है। जानकारी मिली है कि टैक्स जमा करने वाली कतिपय बीड़ी फर्मों को इस खेल के बारे में जानकारी मिल गई है। लेकिन उन्होंने फिलहाल ”वेट एंड वॉच” की नीति अपनाई है। साथ ही उन्होंने अपना पुराना रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। ऐसे में यदि मंडी बोर्ड और एसबीआई ने राशि लौटाने की कोई पारदर्शी प्रणाली तय नहीं की तो संबंधित फर्में अदालत की अवमानना और वसूली के नए मुकदमे दायर कर सकती हैं।

23/12/2025

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