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सागर। डिजिटल इंडिया और कैशलेस सुविधा के नाम पर हाईवे पर कैसे आम जनता की जेब काटी जा रही है, इसका एक सनसनीखेज मामला सागर के उपभोक्ता आयोग पहुँचा है। एक अधिवक्ता के साथ ललितपुर-झाँसी हाईवे स्थित वीगाखेत टोल प्लाजा पर जो हुआ, वह न केवल सेवा में कमी है, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ खुलेआम धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है। सागर निवासी अधिवक्ता पवन कुमार सोनी ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और वीगाखेत टोल प्लाजा के खिलाफ आयोग में परिवाद दायर किया है। परिवादी के अनुसार, 15 नवंबर 2025 को सुबह जब वह ओरछा जा रहे थे, तब टोल प्लाजा पर उनसे एक ही यात्रा के लिए तीन बार पैसे वसूले गए।
लूट का खेल 90 रु. से शुरू होकर 382 रु. तक पहुंचा
अधिवक्ता सोनी ने अपनी शिकायत में बताया कि मैं, अपने साथी अधिवक्ता की कार में सवार था। जो कुछ समय पहले ही खरीदी गई थी। आरटीओ समेत अन्य औपचारिकताओं के चलते फास्ट टैग कार्ड जारी नहीं हुआ था। जब मैंने इस बारे में टोलकर्मियों को जानकारी दी तो उन्होंने कहा कि आप यूपीआई से भुगतान कर दें। इसमें आपको मूल टोल राशि की सवा गुना राशि देना होगी। मैंने सहमति देते हुए यूपीआई का क्यूआर कोड स्कैन किया तो 90 रु. कट गए। लेकिन कर्मचारियों ने कहा कि यह गलत पेमेंट है, आपको 112.50 रुपये देने थे। मैंने कहा कि आप शेष राशि नकद ले लें या उक्त राशि वापस कर दें ताकि मैं 112.50 रुपए का फिर से भुगतान कर दूं। लेकिन कर्मचारियों ने तर्क दिया कि आप कस्टमर केयर पर शिकायत कर दें। आपको यह राशि वापस मिल जाएगी। मैंने हालात से समझौता करते हुए उक्त राशि का यूपीआई का भुगतान कर दिया। लेकिन देखा कि टोल बैरियर अभी भी नहीं खुला था। तब एक कर्मचारी ने कहा कि, यह सिस्टम नया शुरु हुआ है, इसलिए दिक्कत हो रही है। अब आप एक काम करेें कि निर्धारित टोल राशि का का दोगुना यानी 180 रु. नकद जमा कर दें। मैंने टोल स्टाफ से कहा कि आप लोग धीरे-धीरे कर मुझे 200 रु. से अधिक ले चुके हैं और अब फिर करीब इतनी राशि मांग रहे हैं। लेकिन टोलकर्मी अपनी बात पर अड़े रहे और आखिकार उन्होंने मुझे रसीद देते हुए 180 रु. और वसूल लिए। मैंने इस संबंध में टोल संबंधी शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 1033 पर शिकायत की लेकिन एक महीना गुजरने के बाद भी निराकरण नहीं हुआ तो मैंने उपभोक्ता आयोग की शरण लेने का निर्णय लिया।
आयोग के माध्यम से मांगा 2 लाख रु. का हर्जाना
पीड़ित अधिवक्ता पवनकुमार सोनी ने टोल प्लाजा द्वारा अधिक राशि वसूली को ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ और ‘सेवा में कमी’ बताते हुए जिला उपभोक्ता आयोग से अवैध रूप से वसूले गए 382.50 रुपये सालाना 18 प्रतिशत की ब्याज सहित वापस दिलाने और मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रु. व सेवा में कमी के लिए अलग से 1 लाख रु. का हर्जाना देने की मांग की है।
17/12/2025



