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कॉन्वेंट स्कूल ने सिंधु समाज से माफी मांगी, हिंदुवादी बोले…बच्चों को तिलक क्यों नहीं लगाने देते

सागर। शासन द्वारा जानकारी मांगने के नाम पर सिंधु समुदाय के अभिभावकों से उनका धर्म पूछने के मामले में सेंट जोसेफ कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कैंट बैकफुट पर आ गया है। गुरुवार को स्कूल के पीआरओ सौरभ राय समेत कुछ अन्य प्रतिनिधि संत कंवरराम वार्ड स्थित सिंधु धर्मशाला पहुंचे। जहां उन्होंने अपने इस कृत्य के लिए लिखित में माफी मांगी। स्कूल की प्राचार्या सिस्टर मोली थॉमस की तरफ से भेजे गए माफीनामे में कहा गया कि हमारी मंशा किसी भी धर्म, समुदाय, जाति, समाज या धर्म के लोगों को ठेस पहुंचाने की नहीं है।

इसके बावजूद अगर हम लोगों से त्रुटि हुई है तो हम इसके लिए माफी मांगते हैं। इस मामले में हिंदु संगठनों द्वारा जो बिंदु संज्ञान में लाया गया है। उसके आधार पर धर्म संबंधी जानकारी मांगने वाले प्रपत्र में संशोधन कर दिया गया है। साथ ही इस प्रपत्र को तैयार करने वाले विद्यालयीन स्टाफ को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। दूसरी ओर इस माफीनामे के बाद हिंदुवादी नेता कपिल स्वामी समेत पूज्य सिंधु पंचायत के अध्यक्ष मोहनलाल सोम्या ने इस मामले को यहीं समाप्त करने पर सहमति दी। हालांकि स्वामी ने कहा कि, सागर में यह सब हुआ है तो हम इसे त्रुटि मान लेते हैं। लेकिन प्रदेश के अन्य स्कूलों से इसी तरह के प्रपत्रों के जरिए हिंदुओं को बांटने वाली जानकारी मांगने की जानकारी मिलती है तो फिर इस संबंध में आप लोग जवाब देेने के लिए तैयार रहें।

मां सरस्वती की मूर्ति विराजित करें, कलावा-तिलक पर रोक-टोक नहीं करें

माफी संबंधी इस औपचारिकता के बाद कपिल स्वामी ने कहा कि आपके स्कूल में सभी धर्मों के बच्चे पढ़ते हैं। इस हिसाब से आपको सभी धर्म की मूर्तियां-फोटो परिसर में लगाना चाहिए। इसके बावजूद हमारी मांग केवल इतनी है कि आप कम से कम ज्ञान व विद्या की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा स्कूल में उचित स्थान पर विराजमान करें। जवाब में स्कूल के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि हम इस संबंध में प्रबंधन से चर्चा कर जवाब देंगे। स्वामी ने कहा कि इसमें चर्चा की आवश्यकता नहीं है, हम कोई सभी देवी-देवताओं की मूर्ति के लिए नहीं बोल रहे। बहरहाल, आपको जल्द से जल्द मां सरस्वती की एक प्रतिमा भेंट की जाएगी। जिसे आप उचित स्थान पर प्रतिष्ठित कराएं। आखिर में स्वामी ने स्कूली बच्चों के तिलक लगाने, कलावा बांधने, कड़ा, बाली पहनने आदि पर लगे प्रतिबंध पर बात की। जवाब में प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। बच्चे तिलक, कलावा आदि के लिए स्वतंत्र हैं। चर्चा के दौरान सिंधु समुदाय से चंदू बुधवानी, अनिल लालवानी, महाकाल हिंदु संगठन के शुभम शुक्ला, कमल चौरसिया, हिंदु महासेना से कौशल यादव, करण कलासिया समेत बड़ी संख्या में अन्य समाज-समुदाय के लोग मौजूद थे।

07/08/2025

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